किसी भी समझौते को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती सिर्फ अनुबंध को ही चुनौती दी जा सकती है-रवि शंकर सिंह

किसी भी समझौते को कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती सिर्फ अनुबंध को ही चुनौती दी जा सकती है-रवि शंकर सिंह

भिलाईं इस्पात मजदूर संघ के महामंत्री रविशंकर सिह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी कि बीएसपी अधिशासी कर्मचारी संघ तथा सेल प्रबन्धन के बीच वेतन समझौता से सम्बन्धित अनियमितता पर आधारित मामला दाखिल किया है भिलाई इस्पात मजदूर संघ इस पहल को कर्मचारी हित में उचित माना है। दिनांक 28/06/2023 को मुख्य श्रमायुक्त, दिल्ली के माध्यम वार्ता की पहल तो हुई किन्तु मुख्य श्रमायुक्त ने मामले की सुनवाई करने से स्वयं को अधिकृत नहीं मानते हुए मामले को केन्द्रीय उप श्रमायुक्त, रायपुर के पास दाखिल करने को कहा है। चुंकि यूनियन का पंजीकरण छत्तीसगढ़ से है तथा भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मचारियों का है इसलिए यह मामले के लिए केन्द्रीय उप श्रमायुक्त, रायपुर ही अधिकृत माना जाएगा।


कुछ कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है कि जो यूनियन एमओयू पर हस्ताक्षर नहीं किया है वह परिवाद दायर कर सकती है।
इस पर भिलाई इस्पात मजदूर संघ यह स्पष्ट करना चाहता है कि किसी भी एमओयू को किसी भी न्यायालय मे अथवा श्रमायुक्त के पास चुनौती नहीं दिया जा सकता है क्योंकि वह समझौता है अनुबंध नहीं कानूनन इसकी मान्यता नहीं है। अगर गलत एमओए होता है तो उसे चुनौती दिया जा सकता है। वह समय अभी आया नहीं है।

एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाली यूनियनों को चाहिए कि प्रबन्धन पर एमओए करने हेतु दबाव बनाए, पर यह यूनियनें ऐसा न कर भारतीय मजदूर संघ को दोषी साबित करते हुए दूषप्रचार कर कर्मचारियों को दिग्भ्रमित करने काम कर रही है। एमओए एनजेसीएस मे प्रतिभागी सभी यूनियनों के साथ ही सम्भव होगा यदि ऐसा नहीं हुआ तो चुनौती दी जाएगी। बहुत जल्दी एमओयू की अवधि भी समाप्त होने वाली है, प्रबन्धन समझौता करने के लिए पहल करेगी ही अन्यथा एमओयू के आधार पर किया गया भुगतान पर आडिटर जनरल द्वारा रोक लगाई जा सकता है।
समय की प्रतीक्षा करें, भिलाईं इस्पात मजदूर संघ ( बी एम एस )कर्मचारियों के हितो के साथ ही रहने के लिये कृत संकल्पित है।