बड़ी खबर: कस्टम मिलिंग मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ आर्थिक अपराध दर्ज, कैलाश रूंगटा, पारसमल चोपड़ा,रोशन चंद्राकर मुख्य आरोपी बने, जानिए पूरा मामला

रायपुर. प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी की रिपोर्ट को आधार बनाकर आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने कस्टम मिलिंग मामले में भ्रष्टाचार करने वाले मुख्य पांच आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है.

इसके अंतर्गत मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी, मार्केटिंग आफिसर प्रीतिका पूजा केरकेटटा, राइर्स मिल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कैलाश रूंगटा और वाइस प्रेसीडेंट पारसमल चोपड़ा, कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर को आरोपी बनाया गया है. चंद्राकर का मामला न्यायालय में लंबित है तथा उपरी पहुंच के चलते गिरफतारी से बचता रहा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार अपराध क्रमांक 01-2024 की धारा 120बी, 409, भादवि की धारा 13-1 क सहपाठित धारा 13-2 एवं धारा 11 के तहत अपराध दर्ज किया गया है. ईडी की रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न राईस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम एवं एफसीआई में जो कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता है, इस प्रक्रिया के व्यापक पैमाने पर भष्टाचार कर प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध राशि की वसूली की गई. अनुमान है कि ऐसा करके 140 करोड का भ्रष्टाचार किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक मार्केटिंग आफिसर प्रीतिका पूजा केरकेटटा को मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी के मार्फत रोशन चंद्राकर के द्वारा निर्देश था कि उन्हीं राईस मिलर्स के बिल का भुगतान किया जाना है, जिनकी वसूली की राशि रोशन चंद्राकर ने प्राप्त की है. किन राईस मिलर्स को भुगतान किया जाना है इसकी जानकारी संबंधित जिले के के राइस मिलर्स एसोसिएशन द्वारा मनोज सोनी के द्वारा प्राप्त होती थी.

आयकर विभाग द्वारा की गई तलाशी की कार्यवाही से लगभग 1.6 करोड की कैश राशि प्राप्त हुई है. जिसका कोई लेखा जोखा नही है तथा बहुत सारे आपत्तिजनक दस्तावेज एवं डिजिटल डिवाईस प्राप्त हुए हैं. लगभग 140 करोड़ की अवैध वसूली राईस मिलर्स से किया जाना पाया गया है।

आगे कहा गया है कि राईस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम एवं एफसीआई मे जो कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता था में व्यापक पैमाने में भ्रष्टाचार कर प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध राशि की वसूली की जाती रही तथा नामजद आरोपियों को इसके लिए दोषी पाया गया है।

सूत्रों के मुताबिक इन सबमें मुख्य आरोपी सरकारी अफसर मनोज सोनी-जोकि टेलीकाम विभाग से डेपुटेशन पर पूर्व की सरकार द्वारा मार्कफेड में लाया गया, ने सारे घोटाले को अंजाम दिया. बताया जाता है कि सोनी के कनेक्शन कांग्रेस और भाजपा दोनों ही सरकारों में हैं इसलिए वह पूर्व की भाजपा सरकार और फिर कांग्रेस सरकार में जमकर मजे किए हैं. इसी तरह राइस मिल एसेासिएशन के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर भी मुख्य आरोप माना जा रहा है जिसने बिचौलिए की भूमिका अदा करके राइस मिलर्स से अवैध धन की उगाही की. चंद्राकर का मामला पहले से ही न्यायालय में लंबित है तथा अपनी पहुंच के आधार पर गिरफतारी से बचता रहा है।