CGPSC Scam: CGPSC महाघोटाले के आरोपी पूर्व अधिकारियों सहित कांग्रेस के कई नेताओं पर FIR

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाला मामले में EOW ने केस दर्ज कर लिया है. पूर्व चेयरमेन टामन सोनवानी, जीवन किशोर सहित कई कांग्रेस के नेताओं पर एफआईआर हुई है।

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाला मामले में बुधवार को EOW ने केस दर्ज कर लिया है. पूर्व चेयरमेन टामन सोनवानी, जीवन किशोर ध्रुव सहित कई कांग्रेस के नेताओं पर एफआईआर दर्ज की गई है. बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले ही बीजेपी ने पीएससी घोटाला मामले की हाई लेवल जांच कराने का वादा किया था. इस मामले में 2 साल में 40 से ज्यादा शिकायतें भी हुई. विधानसभा सत्र के दौरान भी पीएससी घोटाले का मुद्दा सदन में उठा था. इस मामले में रिश्तेदारों को नौकरी देने से लेकर, परीक्षा में अनियमितता, फर्जीवाड़ा, रिजल्ट में गड़बड़ी से लेकर पक्षपात करने का भी आरोप लगाया गया है।

बता दें कि छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC) राज्य के विभिन्न विभागों में भर्तियां करता है. इसी के जरिए राज्य सरकार के प्रशासनिक पदों पर भी भर्ती होती है. इसी के तहत DSP, डिस्ट्रिक्ट एक्साइज ऑफिसर, ट्रांसपोर्ट सब-इंस्पेक्टर, एक्साइज सब-इंस्पेक्टर सहित कई पदों पर भर्ती की जाती है. CGPSC की ऐसी ही एक भर्ती में घोटाले का आरोप लगाया गया है. कई अभ्यर्थियों के सलेक्शन पर सवाल खड़े किए गए थे।

सरकार ने सीबीआई जांच का दिया था आदेश

मालूम हो कि राज्य शासन ने इस मामले की केन्द्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से जांच कराए जाने का फैसला लिया गया था. फिर EOW और ACB को जानकारी दी गई थी कि छत्तीसगढ़ राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा साल 2021 जो 170 पदों के लिए ली गई थी. इसका रिजल्ट 11 मई 2021 को जारी किया गया था. इसके बाद राज्य लोकसेवा आयोग पर अनियमितता और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए ननकीराम कंवर और अन्य के माध्यमों से शिकायतें की गई थी।

शिकायती पत्र के आधार पर पाया गया कि छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और अन्य लोगों ने अपने पद का दुरुपयोग किया. छत्तीसगढ़ लोकसेवा आयोग की चयन प्रक्रिया साल 2020 और 2021 तथा असिस्टेंट प्रोफेसर चयन परीक्षा में नियम विरूद्ध तरीके से अपने बेटे, बेटी और रिश्तेदारों को कई पात्र योग्य अभ्यार्थियों के बदले इनका चयन शासकीय पदों पर किया गया था।