शराब घोटाला मामला: एपी त्रिपाठी फरार,घर के बाहर बैठी ईओडब्ल्यू की टीम,जानिए क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला मामले में ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई की है. मिली जानकारी के मुताबिक ईओडब्ल्यू ने प्रदेश के 14 बड़े लोगों के ठिकानों पर दबिश दी है. साथ ही छत्तीसगढ़ के तीन बड़े डिक्शनरी केडिया वेलकम और भाटिया ग्रुप के भी ठिकानों पर ईओडब्ल्यू की टीम ने छापेमार कार्रवाई कर रही है. इसके साथ ही अरुणपति त्रिपाठी के घर के बाहर भी ईओडब्ल्यू की टीम बैठी हुई है, क्योंकि वह जेल से निकलने के बाद से ही गायब हैं. यह छापेमार करवाई रायपुर बिलासपुर और दुर्ग सहित कई अन्य शहरों में एक साथ की गई है.

14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई: बताया जा रहा है कि लगभग 150 से अधिक अफसर की टीम इस छापेमार कार्रवाई को अंजाम दे रही है. इसके पहले ईओडब्ल्यू ने विशेष न्यायाधीश निधि शर्मा की कोर्ट से सर्च वारंट लिया. उसके बाद 14 ठिकानों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की. हालांकि इस कार्रवाई के दौरान अब तक क्या बरामद हुआ है? इस बारे में अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. फिलहाल EOW टीम की कार्रवाई जारी है।

ये तीन हैं मास्टरमाइंड: बता दें कि ईडी के प्रतिवेदन पर ईओडब्ल्यू ने केस दर्ज किया. उसके बाद लगातार छापेमारी जारी है. इस बीच ईओडब्ल्यू की टीम ने होलोग्राम सप्लाई करने वाले मैसेज प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्‍म्‍स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर भी दबिश दी है. इसी साल जनवरी में ईडी के पत्र के आधार पर ईओडब्ल्यू ने एफआईआर दर्ज किया था, जिसमें अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी और अनवर ढेबर को शराब घोटाला का मास्‍टर माइंड बताया गया है. इन्हीं तीनों को शराब घोटाला से होने वाली आमदनी का बड़ा हिस्‍सा माना जाता था।

ये मिलकर करते हैं प्लानिंग: मिली जानकारी के मुताबिक अनिल टुटेजा आईएएस अफसर हैं. जब यह घोटाला हुआ, तब वे वाणिज्‍य एवं उद्योग विभाग के संयुक्‍त सचिव थे. दूरसंचार सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए अरुणपति त्रिपाठी आबकारी विभाग के विशेष सचिव और छत्‍तीसगढ़ मार्केटिंग कार्पोरेशन के एमडी थे. वहीं, अनवर ढेबर कारोबारी हैं. एफआईआर के अनुसार ढेबर और टुटेजा ने मिलकर पूरी प्‍लानिंग की थी।