भिलाई में ईद का दिखा उत्साह, मस्जिदों में अता हुई ईद की नमाज, लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर दी बधाई,जानिए क्यों मनाया जाता है ये त्योहार

भिलाई के से 6,फरीद नगर,केम्प 1,रिसाली सहित सभी मस्जिदों में बहुत बड़ी तादाद में मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद नमाज पढ़ी. ईद की नमाज के बाद सभी ने एक दूसरे को गले मिलकर ईद की बधाइयां दी. बच्चे इस मौके पर काफी खुश नजर आए. बड़े, बुजुर्ग सभी अल्लाह ताला का शुक्रिया करते दिखाई दिए. बाजारों में भी छोटे-छोटे बच्चे ईद के मौके पर एक दूसरे को गले लगाते दिखे.ईद के मौके पर बड़े-बुजुर्गों ने बच्चों को ईद मुबारकबाद दी और उन्हें गले लगाकर उनसे स्नेह जताया.छत्तीसगढ़ में छोटे-छोटे बच्चे बहुत ही खूबसूरत लिबास में नजर आ रहे हैं और एक दूसरे को गले मिलकर ईद मुबारक कह रहे हैं

रमजान के आखिरी दिन टूटता है उपवास :

ईद-उल-फितर, रमजान के अंत में महीने भर के उपवास को तोड़ने के त्योहार के रूप में भी जाना जाता है. इसलिए इस दिन खानपान भी खास होता है. ईद के त्यौहार के समय ‘सेवइयां’ (सेंवई) त्योहार का पर्याय बन गई हैं. इस मौके पर कई घरों में सेवईयां बड़े खास तरीके से बनाई जाती है.वहीं कई जगहों पर बिरयानी बनाकर दावत देने का भी रिवाज है. देश समेत छत्तीसगढ़ के बड़े नेताओं ने दी ईद की मुबारकबाद दी है।

ईद उल फितर का महत्व
इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, रमजान महीने के अंत में ही पहली बार कुरान आई थी. मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ. मान्यता है कि पैगंबर हजरत मुहम्मद ने बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी. इस जीत की खुशी में उन्होंने सबका मुंह मीठा करवाया गया था. इसी दिन को मीठी ईदी या ईद-उल-फितर के रूप में मनाया जाता है।