भिलाई की बेटी का कान्स में जलवा: जूही ने दिखाई धरती की पीड़ा,जूही व्यास जूरी पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं…,पहनी ऐसी ड्रेस की दुनिया रह गई हैरान, ड्रेस पहन रेड कार्पेट पर चली

जूही व्यास की ड्रेस को वियतनाम के प्रसिद्ध डिजाइनर गुयेन टीएन ट्रियन ने डिजाइन किया। इस ड्रेस को तैयार करने में दो महीने से अधिक का समय लगा। इस ड्रेस के माध्यम से धरती की पीड़ा को दर्शाया गया है।

फांस में कान्स फिल्म फेस्टिवल दुनिया भर में ग्लैमर, सिनेमा और सेलिब्रिटीज के जाना जाता है। इस बार छत्तीसगढ़ से दुर्ग को रहने वाली जूही व्यास ने पहली बार पहुंची। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाली राष्ट्रीय संस्था ग्रीनपीस इंडिया के साथ जूही व्यास कान्स में पहुंची। जहां जूही व्यास ने संस्था की राष्ट्रीय निदेशक मोहिनी शर्मा के साथ मिलकर वॉइस ऑफ द प्लैनेट अभियान के तहत ग्लोबल वार्मिंग से जुड़े संदेश के साथ अनोखी ड्रेस पहनी।

जूही व्यास की ड्रेस को वियतनाम के प्रसिद्ध डिजाइनर गुयेन टीएन ट्रियन ने डिजाइन किया। इस ड्रेस को तैयार करने में दो महीने से अधिक का समय लगा। इस ड्रेस के माध्यम से धरती की पीड़ा को दर्शाया गया है। जूही को ड्रेस जलती हुई पृथ्वी का प्रतीक थी, जिसमें तापमान में बढ़ोतरी और जलवायु असमानता के परिणामों को दिखाया गया। आग जैसे रंगों और डिजाइन से सजी इस ड्रेस को दुनिया के संकट की ओर इशारा करती है और प्रदूषण फैलाने वालों को भविष्य की पृथ्वी को दर्शाया गया।

जूही व्यास दुर्ग के भिलाई की रहने वाली है। जूही दो बच्चों की मां है और सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपनी करियर की शुरुआत की थी। वह एक मेकअप आर्टिस्ट और मॉडल भी हैं। लगभग 12 साल पहले जूही ने लेडिस सैलून एंड स्पा की शुरुआत की थी। जूही व्यास ने वर्ष 2022 में मिसेज इंडिया इंक प्रतियोगिता में पहली रनर अप का खिताब जीता। वर्ष 2023 में कैलिफोर्निया में आयोजित मिसेज ग्लोब प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया और पीपल्स चॉइस का खिताब जीतकर पहली भारतीय बनीं। वर्ष 2024 में जूही ने चीन में आयोजित मिसेज ग्लोब प्रतियोगिता में जूरी पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

कई ब्यूटी खिताब भी जीते

जूही ने 2022 में ‘मिसेज इंडिया इंक’ प्रतियोगिता में प्रथम रनर-अप का खिताब जीता।
2023 में, उन्होंने कैलिफोर्निया में आयोजित ‘मिसेज ग्लोब’ प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया और ‘पीपल्स चॉइस’ का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बनीं।
2024 में, चीन में आयोजित ‘मिसेज ग्लोब’ प्रतियोगिता में, जूही व्यास जूरी पैनल में शामिल होने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
कांस फिल्म फेस्टिवल को जानिए।

कांस फिल्म फेस्टिवल का मकसद अलग-अलग तरह की फिल्मों और सिनेमेटोग्राफी को बढ़ावा देना था।
1939 में दुनिया में सिर्फ एक वेनिस फिल्म फेस्टिवल हुआ करता था। इसमें इटली के तानाशाह मुसोलिनी और जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर आपस में ही सलाह कर फिल्मों को अवॉर्ड दे दिया करते थे।
फिल्म में एक्टिंग, मेकिंग और कला जैसी चीजों का ध्यान नहीं रखा जाता था। इसी मनमानी के खिलाफ 1939 में फ्रांस के कांस शहर में ‘कांस फिल्म फेस्टिवल’ शुरू हुआ।
सितंबर 1939 में शुरू हुए पहले कांस फिल्म फेस्टिवल को दूसरे ही दिन रोकना पड़ा था।
सितंबर 1939 में शुरू हुए पहले कांस फिल्म फेस्टिवल को दूसरे ही दिन रोकना पड़ा था।
जून 1939 में कांस फिल्म फेस्टिवल की घोषणा हुई। पेरिस में बताया गया कि यह 1 से 20 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा।
फ्रांस की नीस सिटी के पास मौजूद कांस बीचेस का शहर है, जहां ये फेस्टिवल होता है।
फेस्टिवल के लिए मूवीज सिलेक्ट कर ली गईं। अगस्त के आखिर तक यहां स्टार्स भी पहुंचने लगे। 1 सितंबर की सुबह फिल्मों की स्क्रीनिंग भी शुरू हो गई।
तभी खबर आई कि हिटलर ने पोलैंड पर हमला बोल दिया है और इस जंग के चलते कांस फिल्म फेस्टिवल को पहले दिन ही रोकना पड़ा।
दो दिन के बाद फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया। ये सेकेंड वर्ल्ड वॉर की शुरुआत थी। जंग करीब 6 साल चली।
इसके बाद 1946 में कांस फिल्म फेस्टिवल हुआ जिसमें कुल 22 फिल्मों का प्रीमियर हुआ।
इसके बाद 1946 में कांस फिल्म फेस्टिवल हुआ जिसमें कुल 22 फिल्मों का प्रीमियर हुआ।
जंग खत्म होने के बाद 1946 में फ्रांस की प्रोविंशियल सरकार ने फ्रेंच रिवेरा में टूरिस्ट्स को दोबारा आकर्षित करने के लिए कांस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत को मंजूरी दी।
इसके बाद 20 सितंबर 1946 को इस फेस्टिवल की शुरुआत हुई। 18 देशों के रिप्रेजेन्टेटिव इस फेस्टिवल का हिस्सा बने।
इसके बाद 1948 और 1950 में फेस्टिवल को फाइनेंशियल इश्यूज के चलते कैंसिल कर दिया गया। हालांकि 1952 से ये फेस्टिवल लगातार हो रहा है।