देशभर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया, जहां लाखों लोग एकजुट होकर मुल्क की सलामती और अमन-चैन की दुआएं मांग रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद की नमाज अदा की और एक-दूसरे को गले लगाकर ईद मुबारक कहा।

भिलाई-दुर्ग में हजारों लोगों ने पढ़ी नमाज


भिलाई-दुर्ग में भी बकरीद पूरे श्रद्धा और शांति के माहौल में मनाई गई। शहर की ऐतिहासिक मस्जिदों में शहरकाजी ने नमाज पढ़ाई। नमाज के बाद मुल्क की सलामती, अच्छी बारिश, बीमारों की शिफा और हिफाजत के लिए दुआ की गई। जिनमें कुछ बड़ी मस्जिदों में हजारों लोग नमाज के लिए जुटे। सभी जगह विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए।”


फरीद नगर की ईदगाह में सुबह से ही नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुपेला TI सहित भारी पुलिस बल ईदगाह के बाहर मौजूद रहा, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। प्रशासन ने शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए, जिसके चलते नमाज़ सुचारु रूप से संपन्न हुई। नमाजियों ने देश में अमन-चैन और भाईचारे की दुआ मांगी।

वहीं, दुर्ग में भी ईद-उल-अज़हा की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से विभिन्न मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की गई।
क्या है बकरीद का धार्मिक महत्व?
बकरीद को इस्लाम धर्म में ‘ईद-उल-अजहा’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है “कुर्बानी की ईद”। यह त्योहार हजरत इब्राहीम की उस भक्ति और त्याग की याद में मनाया जाता है, जब उन्होंने अल्लाह के आदेश पर अपने बेटे हजरत इस्माईल की कुर्बानी देने का फैसला किया था। लेकिन अल्लाह ने उनकी नीयत देखकर बेटे की जगह एक दुम्बा भेज दिया और बलिदान को स्वीकार किया।
कुर्बानी की परंपरा: बलिदान और इंसानियत का संदेश
बकरीद की सबसे प्रमुख रस्म होती है कुर्बानी। इस दिन मुस्लिम समाज के लोग बकरी, दुम्बा, ऊंट या भैंस जैसे जानवर की बलि देते हैं। कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है –
गरीबों के लिए
रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए
अपने परिवार के लिए
इस बंटवारे के जरिए समाज में एकता, समानता और इंसानियत का संदेश दिया जाता है।
तीन दिन तक दी जा सकती है कुर्बानी
बकरीद केवल एक दिन का त्योहार नहीं है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार जिलहिज्जा की 10वीं, 11वीं और 12वीं तारीख को कुर्बानी दी जा सकती है।
इस मौके पर लोग नए कपड़े पहनकर एक-दूसरे से गले मिले, मिठाइयां और तोहफे बांटे। बच्चों में खास उत्साह देखने को मिला। वहीं कई लोगों ने गरीबों को दान देकर त्याग और सेवा की परंपरा को निभाया।
बकरीद की 5 अहम बातें
बकरीद को इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है।
इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक यह त्योहार जुल-हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है।
इस दिन सुबह नमाज अदा करने के बाद जानवर की कुर्बानी दी जाती है।
जिनके पास 50 हजार रुपए या उससे ज्यादा की रकम या संपत्ति होती है, उनके लिए कुर्बानी देना जरूरी माना गया है।
कुर्बानी का मांस तीन हिस्सों में बांटा जाता है- पहला गरीबों को, दूसरा रिश्तेदारों को और तीसरा अपने परिवार के लिए रखा जाता है।









































