भारत के 2047 विजन पर जागरूकता कार्यक्रम

भारत के 2047 विजन पर जागरूकता कार्यक्रम
सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई के स्नातकोत्तर वाणिज्य विभाग ने छत्तीसगढ़ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (भिलाई इकाई) के सहयोग से एक युवा जागरूकता कार्यक्रम “ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को एक उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करने के लिए प्रेरित करना था, जहां भारत आशा और प्रगति की किरण बनकर चमके।

अपने स्वागत भाषण में, विभागाध्यक्ष डॉ. सपना शर्मा ने छात्रों में नागरिकता संबंधी दक्षताओं को विकसित करने और उन्हें एक अधिक स्थायी एवं न्यायसंगत विश्व के निर्माण हेतु सक्षम बनाने में नागरिक शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला।
डॉ. शाइनी मेंडोन्स, प्रभारी प्राचार्य ने उद्योग-अकादमिक तालमेल में निवेश करने की संस्थागत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया, जो भविष्य में नवाचारों और तीव्र गति वाली अर्थव्यवस्था की जटिलताओं से निपटने के लिए कार्यबल की तत्परता का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने इस सिद्ध तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया कि आत्मनिर्भरता के पथ पर अग्रसर भारत अपने लक्ष्य को युवाओं की जागरूक भागीदारी के बिना प्राप्त नहीं कर सकता।
अपने अध्यक्षीय उध्बोधन में प्रशासक फादर डॉ. पी.एस. वर्गीस ने इस बात पर पर बल दिया कि युवा अर्जित परंपराओं के निष्क्रिय प्राप्तकर्ता नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र के भाग्य को बदलने की क्षमता से संपन्न हैं। उन्होंने विभाग की पहल की सराहना की और आशा व्यक्त की कि इस सहयोग से इंटर्नशिप कार्यक्रमों के लिए साझेदारी, नवाचार केंद्रों की स्थापना, तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने और नेटवर्किंग के अवसर प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन कार्यक्रमों की शुरुआत होगी।
इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र के विधायक माननीय श्री ललित चंद्राकर ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति से महाविद्यालय को अनुगृहीत किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि युवा सशक्तिकरण का अर्थ मात्र अवसर प्रदान करना नहीं है – इसका उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां युवा उन्नति कर सकें, योगदान दे सकें और नेतृत्व कर सकें। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे भारत की विकास गाथा के केवल साक्षी बनने के बजाय, उसके लेखक, कथावाचक और नायक बनें। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि इस रूपांतरण के अग्रदूत बनने के लिए उन्हें प्रभावी समय प्रबंधन का अभ्यास करना होगा, अपनी शिक्षा की ज़िम्मेदारी लेनी होगी, सोच-समझकर निर्णय लेने होंगे और चुनौतियों और बाधाओं का डटकर सामना करना होगा।


श्री अजय भसीन, प्रदेश महामंत्री, छत्तीसगढ़ चेम्बर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज ने राष्ट्र निर्माण, नवाचार और वैश्विक नेतृत्व में सक्रिय रूप से शामिल होकर युवाओं द्वारा अपनी मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान के प्रचार-प्रसार, स्वदेशी संसाधनों के उपयोग तथा स्वदेशी आर्थिक आधार को मजबूत करने और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए लाभ-साझाकरण तंत्र को लागू करने के गुणों पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों से स्थानीय बाजारों से खरीदारी करके, सोशल मीडिया पर इन उत्पादों का प्रचार करके तथा स्थानीय उत्पाद मेलों में भाग लेकर स्थानीय रूप से उत्पादित वस्तुओं का समर्थन करने का प्रण लेने का आग्रह किया।
श्रीमती सुमन कन्नौज, अध्यक्ष, महिला चेम्बर, भिलाई ने छात्रों को उत्तम “साइबर स्वच्छता” का अभ्यास करने और उसे बढ़ावा देने, अपने व्यक्तिगत डेटा की रक्षा करने और अपने समुदायों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि सामूहिक जिम्मेदारी की भावना से व्यापक सुरक्षा-सचेत संस्कृति का विकास होगा, जहां हर कोई डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में अपनी भूमिका को समझेगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नीलम गांधी और श्री सुनील मिश्रा ने किया और इसमें सभी संकायों के विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकगण सम्मिलित हुए। डॉ. शीजा वर्की ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया और छात्रों को भविष्य के नेताओं के रूप में उनकी ज़िम्मेदारियों से अवगत कराने में ऐसे कार्यक्रमों के योगदान की सराहना की, जिससे युवाओं को राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में स्थापित किया जा सके।