भारती आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित हुआ स्वर्णप्राशन संस्कार

भारती आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित हुआ स्वर्णप्राशन संस्कार

भारती आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल में प्रति माह की तरह इस माह भी दिनांक 14 अक्टूबर 2025 को स्वर्णप्राशन संस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 50 से अधिक बच्चों का स्वर्णप्राशन किया गया।
स्वर्णप्राशन संस्कार के बारे मे जानकारी देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य एवं प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य डाक्टर मानस रंजन होता ने बताया की यह एक प्राचीन आयुर्वेदिक प्रक्रिया है, जिसमें 1 से 16 वर्ष तक के बच्चों को विशेष रूप से तैयार स्वर्णभस्म युक्त मिश्रण दिया जाता है। यह प्रक्रिया बच्चों की स्मरणशक्ति, रोग प्रतिरोधक क्षमता, बुद्धि और शारीरिक विकास को बढ़ाने में अत्यंत लाभकारी होती है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अन्य विषय विशेषज्ञो ने स्वर्णप्राशन के महत्व और उसके वैज्ञानिक लाभों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से पुष्य नक्षत्र के दिन स्वर्णप्राशन कराने से बच्चों का सर्वांगीण विकास होता है और वे रोगों से अधिक सुरक्षित रहते हैं।


स्वर्णप्राशन संस्कार के अतिरिक्त भारती आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल अपनी अत्याधुनिक आयुर्वेदिक चिकित्सा सुविधाओं के लिए भी जाना जाता है। यहाँ 100 बिस्तरों का सुसज्जित अस्पताल, आपातकालीन सेवा , शल्यक्रिया , स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा नेत्र, कान, नाक, गला के विशेषज्ञों चिकित्सको की सेवाए उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त, यहाँ पंचकर्म एवं फिजियोथेरेपी जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाएँ भी दी जा रही हैं,जो वर्तमान जीवन शैली के मद्देनजर अत्यन्त प्रासंगिक है ।


विदित हो की भारती आयुर्वेदिक हॉस्पिटल विगत 10 वर्षों से निरंतर सेवारत है तथा जनसाधारण को आयुर्वेद के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के साथ-साथ समाज में स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने हेतु विभिन्न जनकल्याणकारी कार्यक्रमों जिसमे निशुल्क स्वास्थ्य शिविरो विशेषतः ग्रामीण क्षेत्रो मे का आयोजन शामिल है ।संस्था के उपप्राचार्य डाक्टर अमय भोसले ने जनसामान्य से उपलब्ध सुविधाओ का अधिक से अधिक उपयोग करने का आव्हान किया ।