छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में लंबे समय से चल रही हलचल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। जिलाध्यक्षों के फेरबदल को लेकर बनाई जा रही नई सूची कांग्रेस आज जारी कर सकती है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें जिलों के पैनल, नामों की समीक्षा और अंतिम चयन पर विस्तार से चर्चा की गई। इन बैठकों के दौर ने साफ कर दिया है कि संगठन में बड़ा और निर्णायक बदलाव आने वाला है।

इसके अलावा पार्टी के पर्यवेक्षकों ने भी AICC को अलग से रिपोर्ट सौंपकर सुझाव और समीक्षा साझा की है। हालाकिं नई नियुक्तियों के बाद संगठन को और मजबूत बनाने पर जोर दिया जाएगा।


कांग्रेस में नए जिलाध्यक्ष के ऐलान को लेकर हलचल तेज हो गई हैं. इस दौड़ में 2 पूर्व विधायक,पूर्व महापौर समेत कई दिग्गज संगठन की कमान चाहते हैं। कांग्रेस ने हर जिले से 6-6 नामों का पैनल तैयार किया था, संभावना जताई जा रही है कि आज या कल तक जिलाध्यक्ष के नाम घोषित हो सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की मंजूरी के बाद फाइनल लिस्ट ही जारी होगी। वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा और गहन छंटनी के बाद बनाई गई शॉर्टलिस्ट पर अब अंतिम सहमति हो चुकी है। राहुल गांधी के साथ हुई ताजा चर्चा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बिहार चुनाव के बाद कांग्रेस अब पूरी तरह संगठन को मजबूत करने के मोड में जा चुकी है और छत्तीसगढ़ में होने वाला यह फेरबदल उसी रणनीति का अहम हिस्सा है।


कांग्रेस में जिलाध्यक्ष पद की बढ़ी अहमियत
कांग्रेस आलाकमान ने इस बार संगठन में बदलाव की नई नीति लागू की है. निर्देश साफ हैं कि उदयपुर डिक्लेरशन के मुताबिक, 50 फीसदी पदाधिकारी 50 साल से कम उम्र के होंगे यानी पार्टी अब संगठन में युवाओं को आगे लाने की दिशा में काम कर रही है. लेकिन इस फैसले के बाद पुराने और अनुभवी नेताओं में बेचैनी भी बढ़ गई है. कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि संगठन की पकड़ और वर्षों का अनुभव एक झटके में कम नहीं आंका जा सकता

जानिए, क्यों खास है कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पद
दरअसल, कांग्रेस के अंदर अब जिलाध्यक्ष सिर्फ औपचारिक चेहरा नहीं रह गया. वह संगठन के बूथ स्तर से लेकर विधानसभा क्षेत्र और जिला मुख्यालय तक पार्टी का सबसे मजबूत नेता होगा. हर जिले का जिलाध्यक्ष अपनी रिपोर्ट सीधे हाईकमान को भेजेगा है और चुनाव के दौरान टिकट तय करते समय जिलाध्यक्ष की रिपोर्ट ही सबसे अहम मानी जायेगी. यही वजह है कि मौजूदा विधायक हों या पूर्व मंत्री, सभी इस पद पर कब्जा चाहते हैं।
राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कि रायपुर शहर कांग्रेस की कमान सुबोध हरितवाल के हाथों में और रायपुर ग्रामीण की कमान प्रवीण साहू,दुर्ग ग्रामीण में राकेश ठाकुर का नाम लगभग तय दुर्ग शहर में पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल जिलाध्यक्ष बनने की रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। इनकी दावेदारी सबसे मजबूत दिखाई दे रही है। बस औपचारिक घोषणा बाकी है। कई जिलों में इस बार नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं।
इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा,कई जिलों में टकराव के आसार,अगर घोषणा नह हुई तो 14 दिसंबर के बाद होगी,
अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में मजबूती के लिहाज से भी पद अहम है. क्योंकि, कांग्रेस में टिकट वितरण के लिहाज से जिलाध्यक्ष पद को काफी प्रभावशाली माना जा रहा है. ऐसे में नाम जारी होने से पहले ही कई जिलों में टकराव के आसार भी नजर आ रहे हैं. हालांकि, संगठन में युवाओं की एंट्री को लेकर कई वरिष्ठ नेता असहज हैं. ऐसे में लिस्ट जारी होने के बाद कई युवा नेताओं और पार्टी के पुराने नेताओं के खेमे के बीच विवाद की भी आशंका है।
पूरे प्रदेश में नई सूची को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं। कौन हटेगा, कौन आएगा, किस जिले में किस गुट का पलड़ा भारी रहेगा—इन सब पर चर्चा चरम पर है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के लिए आने वाले 48 घंटे बेहद अहम होने वाले हैं, अगर घोषणा नह हुई तो 14 दिसंबर के बाद होगी,क्योंकि इस सूची के साथ ही संगठन की आने वाली दिशा और रणनीति भी तय होगी।




































