सड़क सुरक्षा का मज़ाक? मंत्री गजेंद्र यादव बिना हेलमेट बाइक चलाते दिखे, सोशल मीडिया में बवाल

मंत्री का यह कृत्य न केवल सड़क सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना है, बल्कि आम जनता के लिए बनाए गए कानूनों पर दोहरे मापदंड का भी उदाहरण बन गया है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर मंत्री की तीखी आलोचना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब आम नागरिक बिना हेलमेट वाहन चलाने पर तत्काल चालान और कार्रवाई का सामना करते हैं, तो जनप्रतिनिधियों पर नियम लागू क्यों नहीं होते?

सोशल मीडिया यूजर्स ने तंज कसते हुए लिखा है कि “हेलमेट लगेगा तो मंत्री जी का चेहरा नहीं दिखेगा” और “क्या ट्रैफिक नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?”। कई लोगों ने दुर्ग पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं कि बिना हेलमेट बाइक चलाने वाले मंत्री पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

जहां एक ओर पुलिस आम लोगों के चालान काटने में तत्पर दिखाई देती है, वहीं एक मंत्री द्वारा खुलेआम नियम तोड़े जाने पर पुलिस की चुप्पी कानून की समानता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है।

सड़क सुरक्षा माह का उद्देश्य नियमों के प्रति जागरूकता फैलाना है, लेकिन जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही नियमों की अनदेखी करेंगे, तो आम जनता से अनुशासन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?

अब देखना यह होगा कि क्या कानून मंत्री और आम नागरिक—दोनों के लिए समान रूप से लागू होता है, या सड़क सुरक्षा के नियम केवल आम जनता तक ही सीमित रह जाएंगे।

यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ही नियम तोड़ेंगे और उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, तो कानून की समानता और सड़क सुरक्षा का संदेश खोखला साबित होगा।अब निगाहें प्रशासन और पुलिस पर हैं—क्या कानून सबके लिए बराबर है या सिर्फ आम जनता तक सीमित?