"ऑपरेशन थिएटर में चींटियां, मरीजों की जान भगवान भरोसे!दुर्ग जिला अस्पताल की बदहाल व्यवस्था की खुली पोल"
दुर्ग। जिस ऑपरेशन थिएटर में मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए उच्च स्तरीय स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन किया जाना चाहिए, वहां चींटियों का डेरा जम जाना स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। दुर्ग जिला अस्पताल की मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) यूनिट के ऑपरेशन थिएटर में बड़ी संख्या में चींटियां पहुंचने के कारण पिछले तीन दिनों से सर्जरी ठप पड़ी हुई है। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऑपरेशन थिएटर जैसे संवेदनशील स्थान तक चींटियां पहुंचीं कैसे? क्या नियमित साफ-सफाई, पेस्ट कंट्रोल और संक्रमण नियंत्रण की व्यवस्थाएं केवल कागजों तक सीमित हैं? यदि ऑपरेशन थिएटर में चींटियां पहुंच सकती हैं, तो मरीजों की सुरक्षा को लेकर अस्पताल प्रशासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
पिछले तीन दिनों से ऑपरेशन थिएटर बंद होने के कारण कई मरीजों के नियोजित ऑपरेशन टाल दिए गए हैं। मरीजों और उनके परिजनों को नई तारीख देकर वापस भेजा जा रहा है। जिन लोगों ने लंबे समय से ऑपरेशन की तारीख का इंतजार किया था, उन्हें अब अतिरिक्त शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि सीजेरियन डिलीवरी को भी दूसरे ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट करना पड़ा है। वर्तमान में मेजर ऑपरेशन थिएटर की एक टेबल पर सीजेरियन डिलीवरी कराई जा रही है, जबकि दूसरी टेबल पर केवल इमरजेंसी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इसके चलते आर्थोपेडिक, जनरल सर्जरी और अन्य प्लान ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। अस्पताल में प्रतिदिन होने वाली लगभग पांच सर्जरियां पिछले तीन दिनों से प्रभावित हैं।
जिला अस्पताल में तीन जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन और दो ईएनटी विशेषज्ञ मौजूद हैं, लेकिन ऑपरेशन थिएटर की उपलब्धता सीमित होने के कारण चिकित्सक समय पर मरीजों का उपचार नहीं कर पा रहे हैं। सवाल यह भी है कि यदि किसी दिन बड़ी संख्या में इमरजेंसी मरीज पहुंच जाएं, तो अस्पताल की व्यवस्था किस प्रकार उन्हें संभालेगी?
स्वास्थ्य विभाग करोड़ों रुपये खर्च कर आधुनिक सुविधाओं का दावा करता है, लेकिन ऑपरेशन थिएटर में चींटियां पहुंच जाना इन दावों की वास्तविकता सामने लाने के लिए काफी है। मरीजों की जान से जुड़े स्थानों पर इस तरह की लापरवाही को किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माना जा सकता।
दुर्ग के सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज के अनुसार, मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एमसीएच यूनिट के ऑपरेशन थिएटर को अस्थायी रूप से बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि पेस्ट कंट्रोल और आवश्यक निर्माण संबंधी कार्य कराए जा रहे हैं तथा दो से तीन दिनों में ऑपरेशन थिएटर को पुनः शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, यह घटना कई अहम सवाल छोड़ जाती है—क्या अस्पताल प्रशासन नियमित रूप से ऑपरेशन थिएटर का निरीक्षण करता है? पेस्ट कंट्रोल की व्यवस्था कब और कितनी बार की जाती है? और सबसे महत्वपूर्ण, यदि समय रहते चींटियों की मौजूदगी का पता नहीं चलता तो क्या मरीज संक्रमण के खतरे का शिकार हो सकते थे?
दुर्ग जिला अस्पताल की यह घटना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक चेतावनी है। ऑपरेशन थिएटर में चींटियों का पहुंच जाना महज एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर मामला है, जिसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
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