भिलाई इस्पात संयंत्र को अवैध कब्ज़ाधारियों के विरुद्ध बड़ी जीत: हाईकोर्ट ने खारिज कीं सभी 10 याचिकाएँ, अब 69 करोड़ रुपये की वसूली और भूमि कब्ज़े का रास्ता साफ़
भिलाई (छत्तीसगढ़): माननीय उच्च न्यायालय, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) द्वारा माननीय जस्टिस श्री अमितेंद्र किशोर प्रसाद के न्यायालय में भिलाई इस्पात संयंत्र (सेल) के विरुद्ध दायर सभी दस रीट याचिकाएँ खारिज (Dismiss) कर दी गई हैं। यह निर्णय भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए अवैध कब्ज़ाधारियों के विरुद्ध बड़ी जीत सिद्ध हुआ है।
खारिज की गई याचिकाएँ -
1. WPC/3667/2022 — DP Bansal Commercial Pvt. Ltd. बनाम SAIL, BSP व अन्य
2. WPC/3673/2022 — M/s लक्ष्मी चंद्र अग्रवाल बनाम SAIL, BSP व अन्य
3. WPC/3691/2022 — दुर्गा धरम कांटा बनाम SAIL, BSP व अन्य
4. CONT/512/2022 — M/s आई.ए. दास, बनाम के.के. यादव, GM(Enforcement), BSP (अवमानना याचिका)
5. WPC/13976/2022 — M/s बंसल ब्रदर्स बनाम SAIL, BSP व अन्य
6. WPC/14555/2022 — M/s रफ़ीक / मो. अशरफ़ / मशकूर बनाम SAIL, BSP व अन्य
7. WPC/4582/2022 — M/s मशकूर अहमद बनाम SAIL, BSP व अन्य
8. WPC/1882/2023 — M/s मदनलाल बनाम SAIL, BSP व अन्य
9. WPC/1769/2022 — M/s आई.ए. धस एस्टाब्लिशमेंट (स्वामी - वेद प्रकाश चोपड़ा) बनाम SAIL, BSP व अन्य
10. WPC/3644/2022 — M/s महालक्ष्मी ट्रेडर्स बनाम SAIL, BSP व अन्य
वसूली हेतु देय राशि — कुल लगभग 69 करोड़ रुपये
इन पार्टियों से वसूली जाने वाली कुल राशि 37 करोड़ रुपये राजस्व (जी.एस.टी. रहित) है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2022 में नगर तथा राज्य सरकार की दर से भूमि की लागत 32 करोड़ रुपये आँकी गई है। दोनों मिलाकर कुल देय राशि लगभग 69 करोड़ रुपये बनती है। अब भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा इन पार्टियों से 37 करोड़ रुपये की राजस्व वसूली करने तथा लगभग 32 करोड़ रुपये की बी.एस.पी. भूमि पर कब्ज़ा लेने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
ताले तोड़कर किया गया था संयंत्र की भूमि पर अवैध कब्ज़ा
उल्लेखनीय है कि ये सभी फर्म / प्रतिष्ठान तत्कालीन महाप्रबंधक (एनफोर्समेंट) श्री के.के. यादव के नेतृत्व में, माननीय संपदा न्यायालय के आदेश पर, कार्यपालक मजिस्ट्रेट एवं पुलिस बल की उपस्थिति में अप्रैल 2022 तथा अगस्त 2022 में सील किए गए थे। किंतु इन फर्मों ने संपदा न्यायालय के आदेश से सील किए गए प्रतिष्ठानों के ताले स्वयं तोड़कर वहाँ दोबारा कब्ज़ा जमा लिया था।
तत्पश्चात वर्ष 2022 में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इन फर्मों को स्टे (स्थगन) का लाभ प्रदान किया गया था, जिसके कारण वसूली एवं भूमि कब्जा कार्यवाही लंबित रह गई थी।
अब माननीय उच्च न्यायालय द्वारा सभी याचिकाएँ खारिज कर दिए जाने से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है - भिलाई इस्पात संयंत्र अब राजस्व वसूली तथा अपनी भूमि पर कब्ज़े के लिए कानूनी कार्यवाही करने हेतु स्वतंत्र है।
केस पैरवी
भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से छत्तीसगढ़ राज्य के उप महाधिवक्ता श्री सौरभ कुमार पांडेय ने इन मामलों की पैरवी की।
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