BSP के गेटों पर ट्रकों की आवाजाही प्रभावित, ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं पर सांसद विजय बघेल ने CEO और CISF DIG से की चर्चा
VTS-सर्वर की तकनीकी दिक्कतों, वाहनों की एंट्री-निकासी में देरी और गेटों पर घटती आवाजाही का मुद्दा उठा; अतिरिक्त गेट, पार्किंग और ऑटोमेशन व्यवस्था सुधारने की मांग
भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) के विभिन्न गेटों पर ट्रकों की आवाजाही, डिस्पैच और परिवहन व्यवस्था में आ रही समस्याओं को लेकर भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन एवं स्टील चैंबर भिलाई के प्रतिनिधिमंडल ने दुर्ग सांसद विजय बघेल से उनके निवास पर मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने संयंत्र के गेटों पर वाहनों के प्रवेश और निकासी में हो रही देरी, व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) एवं सर्वर की तकनीकी समस्याओं, पार्किंग की कमी और डिस्पैच प्रक्रिया में आ रही बाधाओं से सांसद को अवगत कराया।
ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि तकनीकी दिक्कतों और प्रवेश व्यवस्था में देरी के कारण वाहनों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है। इसका असर परिवहन कार्य की गति, वाहनों के परिचालन और डिस्पैच व्यवस्था पर पड़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों के स्तर पर आवश्यक पहल करने की मांग की।
ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को सुनने के बाद सांसद विजय बघेल ने तत्काल भिलाई इस्पात संयंत्र के CEO चित्तरंजन महापात्रा से चर्चा की। उन्होंने CISF DIG चंदन झा से भी फोन पर बातचीत कर संयंत्र के विभिन्न गेटों पर ट्रांसपोर्टरों को हो रही परेशानियों की जानकारी दी। सांसद ने वाहनों की आवाजाही सुचारु बनाने और प्रवेश-निकासी प्रक्रिया में आ रही बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विभिन्न गेटों पर वाहनों की संख्या में गिरावट का दावा
भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सांसद को सौंपे गए लिखित आवेदन में संयंत्र के विभिन्न गेटों पर पहले की तुलना में वाहनों की आवाजाही कम होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। एसोसिएशन के अनुसार, गेटों पर वाहनों की संख्या में कमी आने से डिस्पैच और परिवहन कार्य प्रभावित हो रहा है। संगठन ने अपने आवेदन में पहले और वर्तमान में प्रवेश करने वाले वाहनों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए।
एसोसिएशन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, रोलिंग मिल गेट पर पहले प्रतिदिन लगभग 120 से 130 गाड़ियां प्रवेश करती थीं, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 50 से 60 रह गई है। इसी तरह डिस्पोजल गेट पर पहले प्रतिदिन लगभग 60 से 65 गाड़ियों की आवाजाही होती थी, जबकि अब करीब 25 से 30 गाड़ियां ही प्रवेश कर पा रही हैं।
वहीं, बोरिया गेट पर पहले प्रतिदिन लगभग 105 से 110 गाड़ियों के प्रवेश की जानकारी दी गई है। एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 70 से 80 गाड़ियों तक रह गई है।
संगठन का कहना है कि गेटों पर वाहनों की आवाजाही में आई इस कमी के कारण परिवहन कार्य की गति प्रभावित हो रही है। एसोसिएशन ने संबंधित प्रबंधन से इन आंकड़ों की समीक्षा कर प्रवेश व्यवस्था में सुधार करने तथा वाहनों की आवाजाही बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
VTS और सर्वर की तकनीकी दिक्कतों से बढ़ रहा इंतजार
प्रतिनिधिमंडल ने बैठक के दौरान व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) और सर्वर में बार-बार आने वाली तकनीकी समस्याओं का मुद्दा भी उठाया। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, इन प्रणालियों के प्रभावित होने से वाहनों की एंट्री और एग्जिट प्रक्रिया में देरी होती है। इसके चलते वाहन चालकों को गेटों पर लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है और परिवहन के निर्धारित कार्यों को समय पर पूरा करने में परेशानी आती है।
एसोसिएशन ने मांग की कि VTS और सर्वर से संबंधित समस्याओं का स्थायी तकनीकी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि वाहनों के प्रवेश एवं निकासी की प्रक्रिया बिना अनावश्यक रुकावट के पूरी हो सके। संगठन का मानना है कि तकनीकी व्यवस्था में सुधार से गेटों पर लगने वाला समय कम होगा और डिस्पैच प्रक्रिया को गति मिलेगी।
इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने गेटों के आसपास पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने की समस्या भी उठाई। ट्रांसपोर्टरों के अनुसार, वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग उपलब्ध होने से गेटों के आसपास अनावश्यक दबाव कम किया जा सकता है और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकता है।
खाली और लोडेड वाहनों के लिए अलग व्यवस्था की मांग
ट्रांसपोर्टरों ने संयंत्र में खाली वाहनों के प्रवेश और माल लोड होने के बाद वाहनों की निकासी के लिए बेहतर व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। एसोसिएशन ने सुझाव दिया कि खाली वाहनों के प्रवेश तथा लोडेड वाहनों की निकासी के लिए अलग या अतिरिक्त गेट की सुविधा विकसित करने पर विचार किया जाना चाहिए।
संगठन के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और अतिरिक्त गेट की सुविधा उपलब्ध होने से विभिन्न गेटों पर वाहनों का दबाव कम हो सकता है। इससे खाली वाहनों को प्रवेश देने और लोडेड वाहनों को बाहर निकालने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने ऑटोमेशन आधारित चेकिंग सिस्टम लागू करने की मांग भी रखी। एसोसिएशन का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से वाहन जांच और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित एवं तेज बनाया जा सकता है।
लोडिंग के बाद दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया तेज करने पर जोर
बैठक में ट्रांसपोर्टरों ने लोडिंग पूरी होने के बाद आवश्यक दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में सुधार की मांग भी की। उनके अनुसार, लोडिंग के बाद कागजी कार्रवाई और अन्य औपचारिकताओं में लगने वाला अतिरिक्त समय वाहनों की निकासी को प्रभावित करता है।
एसोसिएशन ने मांग की कि दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया को तेज, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जाए, ताकि माल लोड होने के बाद वाहनों को अनावश्यक रूप से रुकना न पड़े। संगठन का कहना है कि इससे ट्रांसपोर्टरों के समय और परिचालन लागत में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
प्रतिनिधिमंडल ने इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए BSP प्रबंधन से तकनीकी व्यवस्था, गेट संचालन, पार्किंग और दस्तावेजी प्रक्रिया की समीक्षा कर आवश्यक सुधार करने का आग्रह किया।
सांसद विजय बघेल ने BSP CEO और CISF DIG से की चर्चा
ट्रांसपोर्टरों की शिकायतों और मांगों को गंभीरता से लेते हुए सांसद विजय बघेल ने भिलाई इस्पात संयंत्र के CEO चित्तरंजन महापात्रा से तत्काल चर्चा की। इस दौरान संयंत्र के गेटों पर वाहनों की आवाजाही में आ रही बाधाओं और तकनीकी एवं परिचालन संबंधी समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर ध्यान आकर्षित किया गया।
सांसद ने CISF DIG चंदन झा से भी फोन पर बातचीत कर गेटों पर ट्रांसपोर्टरों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया। उन्होंने प्रवेश एवं निकासी व्यवस्था को सुचारु बनाने और वाहनों की आवाजाही में होने वाली देरी कम करने की आवश्यकता उठाई।
इस पहल के बाद ट्रांसपोर्टरों को उम्मीद है कि BSP प्रबंधन और CISF के समन्वय से समस्याओं के समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से प्रस्तावित सुधारों, उनकी समय-सीमा या समाधान की स्थिति के संबंध में विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
बैठक में स्टील चैंबर और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी रहे मौजूद
सांसद विजय बघेल के निवास पर हुई इस मुलाकात में स्टील चैंबर भिलाई की ओर से पवन अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल और दिनेश अग्रवाल शामिल हुए।
भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ‘छोटू’, कार्यकारी अध्यक्ष अनिल चौधरी, महासचिव मलकीत सिंह, संरक्षक महेंद्र सिंह, बलजिंदर सिंह, कोषाध्यक्ष जोगा राव और सचिव शाहनवाज कुरैशी उपस्थित रहे।
इसके अलावा मुन्ना सिंह, उमेश सिंह, दिलीप खटवानी, रिज्जु सिंह, विक्रम अग्रवाल, अमित सिंह, गजेंद्र साहू, सुधीर सिंह, मोनी, अरविंद, चलपत राव, आनंद सिंह, गुरप्रीत सिंह और प्रशांत सहित अन्य सदस्य भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।
## ट्रांसपोर्टरों के हितों की रक्षा और परिवहन व्यवस्था में सुधार पर जोर
भिलाई ट्रक ट्रेलर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने कहा कि संगठन ट्रांसपोर्टरों के हितों की रक्षा करने और भिलाई इस्पात संयंत्र में परिवहन व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। संगठन के अनुसार, गेटों पर तकनीकी समस्याओं का समाधान, पार्किंग की बेहतर सुविधा, वाहनों की प्रवेश-निकासी प्रक्रिया में सुधार और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाना समय की आवश्यकता है।
एसोसिएशन का मानना है कि इन व्यवस्थाओं में सुधार होने से ट्रांसपोर्टरों को अनावश्यक इंतजार से राहत मिल सकती है। साथ ही, वाहनों के परिचालन समय और लागत को नियंत्रित करने तथा संयंत्र से होने वाले डिस्पैच कार्य को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।
अब ट्रांसपोर्टरों की निगाहें BSP प्रबंधन और CISF की ओर हैं। प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि सांसद विजय बघेल द्वारा संबंधित अधिकारियों से चर्चा किए जाने के बाद गेटों पर आ रही तकनीकी और परिचालन संबंधी समस्याओं के निराकरण की दिशा में ठोस पहल होगी। ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांग है कि संयंत्र के विभिन्न गेटों पर वाहनों की आवाजाही बढ़ाने, VTS एवं सर्वर की समस्याओं को दूर करने और प्रवेश-निकासी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि परिवहन व्यवस्था सुचारु हो सके और डिस्पैच कार्य में अनावश्यक देरी कम हो।
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