रक्षाबंधन पर बहन की कलाई पर बांधी राखी, तीन दिन बाद दिल्ली में मौत ने छीना इकलौता बेटा; आखिरी कॉल पर दोस्त सुनता रहा मौत की गड़गड़ाहट
दुर्ग। जिस घर में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन की खुशियां थीं, उसी घर में अब मातम पसरा है। जिस बहन की कलाई पर 20 वर्षीय युवराज सोनी ने प्यार से राखी बंधवाई थी, आज वही बहन अपने भाई के लौटने का इंतजार कर रही है। लेकिन अब युवराज लौटकर नहीं आएगा। दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक इमारत हादसे ने दुर्ग के इस परिवार से उसका इकलौता बेटा हमेशा के लिए छीन लिया।
युवराज महज तीन दिन पहले ही रक्षाबंधन मनाकर दुर्ग से दिल्ली लौटा था। आंखों में बेहतर भविष्य के सपने थे, पढ़ाई पूरी कर कुछ बनने की उम्मीद थी और परिवार को भरोसा था कि उनका बेटा एक दिन उनका नाम रोशन करेगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दिल्ली पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद एक दर्दनाक हादसे ने 20 साल की जिंदगी को हमेशा के लिए खामोश कर दिया।
पिता का इकलौता बेटा, बहन का राखी वाला भाई
युवराज अपने पिता कन्हैया सोनी के इकलौते बेटे थे। उनकी एक छोटी बहन है, जो नौवीं कक्षा में पढ़ती है। रक्षाबंधन के मौके पर युवराज घर आए थे। बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी और परिवार ने साथ बैठकर त्योहार की खुशियां मनाई थीं।
किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यही रक्षाबंधन युवराज और उसके परिवार की आखिरी खुशहाल याद बन जाएगी।
घर से दिल्ली लौटते वक्त परिवार ने यही सोचा होगा कि बेटा अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जल्द ही फिर घर आएगा। लेकिन तीन दिन बाद आई खबर ने पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया।
‘हेलो... हेलो... तू ठीक है?’ और फिर हमेशा के लिए खामोशी
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि युवराज घटना के वक्त अपने बचपन के दोस्त आर्यन से फोन पर बात कर रहा था। दोनों के बीच घूमने जाने की योजना को लेकर बातचीत चल रही थी। जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ पल सब कुछ बदलने वाला है।
अचानक फोन पर तेज गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी।
आर्यन घबरा गया। उसने बार-बार फोन पर पूछा, ‘हेलो... हेलो... तू ठीक है?’
लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
फोन कट गया।
आर्यन को उम्मीद थी कि युवराज कुछ देर बाद वापस फोन करेगा। वह लगातार अपने दोस्त के फोन का इंतजार करता रहा। लेकिन फोन नहीं आया। बाद में जब उसे सत्य निकेतन में इमारत ढहने की जानकारी मिली तो उसके होश उड़ गए।
वह तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़ा।
दोस्त को तलाशता रहा, लेकिन मिली मौत की खबर
घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य चल रहा था। मलबे के बीच जिंदगी तलाशने की कोशिश की जा रही थी। आर्यन की नजरें सिर्फ अपने दोस्त युवराज को तलाश रही थीं। उसे उम्मीद थी कि शायद युवराज सुरक्षित होगा और जल्द ही उसके सामने आ जाएगा।
घंटों की तलाश और जानकारी जुटाने के बाद आर्यन को एम्स ट्रॉमा सेंटर से जो खबर मिली, उसने उसकी दुनिया हिला दी।
युवराज की मौत हो चुकी थी।
जिस दोस्त से कुछ देर पहले तक वह फोन पर बात कर रहा था, उसी दोस्त की आखिरी आवाज के बाद अब हमेशा के लिए खामोशी थी।
आर्यन के जेहन में अब भी गूंज रही है वह आखिरी आवाज
युवराज और आर्यन बचपन के दोस्त थे और एक ही गांव से ताल्लुक रखते थे। आर्यन के लिए इस हादसे को स्वीकार करना बेहद मुश्किल है। हादसे से ठीक पहले हुई बातचीत और उसके बाद फोन पर सुनाई दी वह भयावह गड़गड़ाहट उसके जेहन में बार-बार गूंज रही है।
कुछ पल पहले तक दोस्त से घूमने जाने की योजना बना रहा आर्यन अब उसके अंतिम सफर का गवाह बन गया।
एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचा परिवार
युवराज की मौत की खबर मिलते ही परिवार के लोग दिल्ली पहुंच गए। उनका पार्थिव शरीर एम्स ट्रॉमा सेंटर में रखा गया है। प्रशासन की ओर से परिवार से संपर्क कर हर संभव सहायता का आश्वासन दिया गया है। साथ ही पार्थिव शरीर को दुर्ग स्थित गृह जिला पहुंचाने में सहयोग की बात कही गई है।
जिस बेटे को पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजा था, अब उसी का पार्थिव शरीर घर लौटेगा।
सत्य निकेतन की पुरानी इमारत ने छीनी जिंदगी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सत्य निकेतन की संबंधित इमारत करीब 50 वर्ष पुरानी थी। इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। बताया जा रहा है कि काम के दौरान एक पिलर अस्थिर हो गया, जिससे पूरी संरचना कमजोर पड़ गई और देखते ही देखते इमारत ढह गई।
प्रारंभिक जांच में बेसमेंट में पानी भरने और चल रहे मरम्मत कार्य को भी हादसे की संभावित वजहों में शामिल किया जा रहा है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
रक्षाबंधन की आखिरी याद छोड़ गया युवराज
युवराज की मौत ने परिवार को ऐसा दर्द दिया है, जिसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। कुछ दिन पहले तक घर में बेटे के आने की खुशी थी। बहन ने भाई को राखी बांधी थी। परिवार ने साथ समय बिताया था। फिर युवराज दिल्ली लौट गया था, यह सोचकर कि जल्द ही पढ़ाई पूरी कर वापस आएगा।
लेकिन अब वही घर युवराज के पार्थिव शरीर के लौटने का इंतजार कर रहा है।
बहन की कलाई पर बंधी राखी शायद अब उसके भाई की सबसे आखिरी निशानी बनकर रह जाएगी। पिता के इकलौते बेटे के रूप में जिस युवराज से परिवार ने भविष्य की उम्मीदें जोड़ रखी थीं, वह उम्मीद एक दर्दनाक हादसे के मलबे में हमेशा के लिए दब गई।
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