झीरम हत्याकांड में एनआईए कोर्ट का फैसला आधा अधूरा न्याय, राजनैतिक षड्यंत्रों के पहलू की जांच नहीं : मुकेश चंद्राकर
भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का सच सामने आये
समर्पण करने वाले बड़े नक्सलियों से पूछताछ क्यों नहीं की गई
भिलाई नगर। जिला कांग्रेस कमेटी भिलाई के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने झीरम हत्याकांड में एनआईए कोर्ट के फैसले को आधा अधूरा न्याय बताया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से घटना के साजिश का पर्दाफाश नहीं हुआ है। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा की सुरक्षा क्यों हटाई गई थी ? यात्रा के मार्ग को किसने, क्यों बदलवाया था ? हमले की योजना किसने बनाई थी ? उन्होंने कहा कि झीरम मामले में भाजपा की तत्कालीन सरकार शुरू से संदिग्ध रही है। भाजपा नहीं चाहती कि झीरम का सच सामने आये। एनआईए की जांच और कार्य प्रणाली से यही साबित हुआ है।
श्री चंद्राकर ने अदालत के फैसले का आदर करते हुए कहा कि अदालत ने वही फैसला दिया है जो एनआईए ने तथ्य अदालत के सामने रखे थे। एनआईए की जांच शुरू से दिशाहीन रही है।एनआईए ने घटना के राजनैतिक षड्यंत्रों के पहलू की जांच नहीं की। श्री चंद्राकर ने बताया कि जिन 10 लोगों को एनआईए ने गिरफ्तारी किया था और जिनको दोषी पाया गया वे छोटे नक्सली थे। इतनी बड़ी घटना बिना बड़े नक्सली नेताओं के संभव नहीं था। एनआईए ने बड़े नक्सली नेताओं का नाम शुरू के एफआईआर में शामिल किया था बाद में उसको हटा दिया।
श्री चंद्राकर ने कहा कि जब बड़े नक्सलियों ने समर्पण किया तब सरकार ने दावा किया कि यह झीरम हमले में शामिल थे। फिर एनआईए ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं किया? घटना के प्रत्यक्षदर्शियों जो कि घायल भी थे उनमें से कितनों से एनआईए ने पूछताछ किया ? झीरम हमले के दौरान घायल और जीवित बचे पीड़ितों का बयान तक नहीं लिया गया, कई बार प्रभावित जांच एजेंसियो के समक्ष शपथ पत्र के साथ हाजिर हुए लेकिन उनके बयान शामिल ही नहीं किये गये । एनआईए ने छत्तीसगढ़ सरकार की पुलिस द्वारा गठित एसआईटी को जांच से क्यों रोका ? एनआईए ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी नक्सल से कब पूछताछ की ?
श्री चंद्राकर ने कहा कि शुरूआत में एनआईए की एफआईआर में दो प्रमुख नक्सली नेता गणपति और रमन्ना का भी नाम था।
गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, फिर चार्ज शीट से उनका नाम क्यों हटाया गया ?
भाजपा नहीं चाहती झीरम का सच सामने आये
श्री चंद्राकर ने कहा कि झीरम मामले में भाजपा की तत्कालीन सरकार शुरू से संदिग्ध रही है। भाजपा ने इस मामले की जांच रोकने की दिशा को भटकाने का हर संभव प्रयास किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता धर्मलाल कौशिक न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लेकर आये थे। कांग्रेस की सरकार ने एसआईटी का गठन किया तो एनआईए जांच रोकने स्टे लेकर आ गया। भाजपा नहीं चाहती झीरम का सच सामने आये । उन्होंने कहा कि घटना के वक्त भी सरकार व नक्सली में साठ-गांठ थी और आज फैसला आने के बाद भी बड़े लीडरों को एनआईए ने बचाया है।
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