आरक्षण से बदले वार्ड तो कांग्रेस सौंपे संगठन की कमान! ज्ञान चंद जैन ने दीपक बैज और धनेंद्र साहू को लिखा पत्र
भिलाई नगर निगम चुनाव में आरक्षण से प्रभावित पूर्व पार्षदों और एमआईसी सदस्यों को संगठन में जिम्मेदारी देने की मांग, स्थानीय कांग्रेस प्रत्याशियों को जिताने का दायित्व सौंपने का सुझाव
भिलाई। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के बीच वार्डों में आरक्षण के कारण प्रभावित हुए कांग्रेस के पूर्व पार्षदों और मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) सदस्यों की भूमिका को लेकर संगठन के भीतर नई पहल सामने आई है। जिला कांग्रेस कमेटी दुर्ग ग्रामीण के पूर्व महामंत्री एवं प्रवक्ता ज्ञान चंद जैन ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज तथा नगरीय निकाय क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालने वाले कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष धनेंद्र साहू को पत्र लिखकर ऐसे नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का अनुरोध किया है।
ज्ञान चंद जैन ने अपने पत्र में सुझाव दिया है कि भिलाई नगर निगम के आगामी नगरीय निकाय चुनाव में जिन वार्डों का आरक्षण बदलने से पूर्व वार्ड पार्षदों अथवा एमआईसी सदस्यों के चुनाव लड़ने का समीकरण प्रभावित हुआ है, उन्हें संगठन की मुख्यधारा में सक्रिय भूमिका दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि इन नेताओं के अनुभव, स्थानीय संपर्क और क्षेत्र में लंबे समय से किए गए कार्यों का उपयोग पार्टी को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है।
स्थानीय प्रत्याशियों को जिताने की जिम्मेदारी देने का सुझाव
ज्ञान चंद जैन ने पत्र में यह भी अनुरोध किया है कि जिन कांग्रेस नेताओं के वार्ड अब आरक्षण के कारण अन्य वर्ग के लिए आरक्षित हो गए हैं, उन्हें अपने स्थानीय क्षेत्र में पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी जाए। इससे संबंधित वार्डों में पुराने जनसंपर्क और संगठनात्मक अनुभव का लाभ पार्टी को मिल सकता है।
उनके सुझाव के मुताबिक, जिन नेताओं ने अब तक अपने वार्डों में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया है, उनकी भूमिका केवल आरक्षण बदलने के कारण सीमित नहीं होनी चाहिए। इसके बजाय उन्हें नए प्रत्याशियों के साथ समन्वय बनाकर चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहने का अवसर दिया जाना चाहिए।
मुकेश चंद्राकर को भी भेजी पत्र की प्रति
ज्ञान चंद जैन ने अपने पत्र की प्रति भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर को भी भेजी है। उन्होंने उनसे अपेक्षा जताई है कि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे मैदानी कार्यकर्ताओं के हितों और उनकी भूमिका को लेकर संगठन के भीतर मजबूती से पक्ष रखा जाएगा।
जैन ने अपने अनुरोध में मैदानी कार्यकर्ताओं के संरक्षण और सम्मान को पार्टी की चुनावी तैयारियों से जोड़ते हुए कहा है कि स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी देने से संगठनात्मक समन्वय को मजबूती मिल सकती है। आरक्षण के कारण चुनावी समीकरण बदलने की स्थिति में अनुभवी नेताओं को साथ लेकर चलना और नए प्रत्याशियों के साथ तालमेल बनाना महत्वपूर्ण होगा।
संगठनात्मक अनुभव के उपयोग पर जोर
भिलाई नगर निगम चुनाव को देखते हुए वार्डों में आरक्षण के बदलाव के बाद कांग्रेस के सामने प्रत्याशियों के चयन के साथ-साथ संगठनात्मक समन्वय बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। ऐसे में ज्ञान चंद जैन का यह पत्र उन नेताओं की भूमिका पर ध्यान आकर्षित करता है, जिनका अपने क्षेत्रों में पहले से जनसंपर्क रहा है, लेकिन आरक्षण की स्थिति बदलने के कारण उनकी चुनावी भूमिका प्रभावित हो सकती है।
अब इस प्रस्ताव पर प्रदेश और जिला कांग्रेस नेतृत्व की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर नजर रहेगी। फिलहाल ज्ञान चंद जैन ने पत्र के माध्यम से मांग रखी है कि आरक्षण से प्रभावित नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी देकर स्थानीय कांग्रेस प्रत्याशियों के पक्ष में काम करने का अवसर दिया जाए।
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