सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई में कथक कार्यशाला

सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई में कथक कार्यशाला
सेंट थॉमस महाविद्यालय, भिलाई में भारतीय ज्ञान परंपरा समिति द्वारा एक दिवसीय कथक कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन “जीवन के नृत्य” का प्रतीकात्मक सूत्रपात था जिसमें विद्यार्थी लावण्यमय जीवनशैली अपनाने, नवीन अनुभवों का स्वागत करने और जीवन के उतार चढ़ावों को क्रमबद्ध क्रियाएं न मानकर एक यात्रा के चरण सदृश समझने हेतु प्रेरित हुए।


अपने स्वागत उद्बोधन में डॉ. अदिति आचार्य ने सहस्राब्दी से भारतीय महाद्वीप में संयुक्त सांस्कृतिक चेतना का अनुरक्षण करने में नाट्यशास्त्र के सिद्धांतों की भूमिका को उजागर किया।
संस्थान के प्रशासक रेव. फा. डॉ. पी. एस. वर्गीस ने वरिष्ठ विद्यार्थी के अनुशिक्षण के माध्यम से नाट्यशास्त्र के संवर्धन हेतु समिति के विशिष्ट पहल की प्रशंसा की।
प्रभारी प्राचार्य डॉ. शाइनी मेंडोंस ने इस तथ्य पर जोर दिया कि कथक जैसे पारंपरिक कला रूप साधकों को केन्द्रीभूत करके उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं तथा शरीर, मन और आत्मा का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने प्राचीन भारत में नाट्यशास्त्र के विकास, उसमें नौ रसों के समावेश एवं नाट्य द्वारा ईश्वर्य सानिध्य सुनिश्चित करने के विषय पर बहुमूल्य जानकारी दी।


स्रोत विशेषज्ञ, सुश्री अमृता लाखे (एम. ए. अंग्रेजी प्रथम सेमेस्टर) ने तत्कार, उसके प्रकार, तोड़ा, कवित, चक्कर दर तोड़ा, और गत निकास के विषय में जानकारी साझा की। इसके अतिरिक्त विभिन्न मूलभूत तत्वों पर भी चर्चा हुई जिनके अनुपालन से नृत्यांगनाएं अपनी कला को निरंतर तराशने में सक्षम होंगी।
सत्र में प्रतिभागी भारत की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर से परिचित हुए।
इस अवसर पर डॉ. सपना शर्मा, विभागध्यक्ष, पी.जी. वाणिज्य विभाग, डॉ. शीजा वर्की, अतिरिक्त विभागध्यक्ष, पी.जी. वाणिज्य विभाग, डॉ. ज्योत्सना गडपायले, डॉ. सुरुचि पारखे, डॉ. ज्योति देवांगन एवं अन्य विभागों के शिक्षकगण उपस्थित थे।