न ढोल-ताशे, न बाइक रैली, स्वागत में भीड़ भी गायब! स्मृति ईरानी के आते ही छत्तीसगढ़ BJP में सादगी या सख्त संदेश? दो दिन में 12 बैठकों से खुलेगी संगठन की परतें
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के रायपुर पहुंचते ही पार्टी के संगठनात्मक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आमतौर पर बड़े नेताओं के आगमन पर ढोल-ताशे, बाइक रैली और शक्ति प्रदर्शन के जरिए माहौल बनाया जाता है, लेकिन इस बार न ढोल-ताशे बजे, न बाइक रैली निकली और न ही एयरपोर्ट पर नेताओं की बड़ी भीड़ नजर आई। स्वागत के लिए केवल 16 नामित पदाधिकारी और विधायक पहुंचे। ऐसे में भाजपा के इस सादगीपूर्ण स्वागत को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। सवाल यह भी है कि यह केवल सादगी थी या संगठन को अनुशासन और कामकाज का संदेश देने की तैयारी?
स्वागत में तामझाम नदारद, संगठन की रणनीति पर चर्चा
रविवार को स्मृति ईरानी रायपुर पहुंचीं तो उनके स्वागत के लिए भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रस्तावित बाइक रैली भी स्थगित कर दी गई। एयरपोर्ट पर मंत्रियों को भी नहीं बुलाया गया। पार्टी की ओर से निर्धारित 16 पदाधिकारी और विधायक ही स्वागत के लिए मौजूद रहे। हालांकि, एयरपोर्ट से भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर तक मार्ग पर पार्टी के झंडे लगाए गए थे।
स्मृति ईरानी के आगमन पर सीमित स्वागत व्यवस्था ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा दी है, लेकिन पार्टी की ओर से इसे किसी आंतरिक नाराजगी या असंतोष से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वागत के तरीके को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय अब सबकी निगाहें अगले दो दिनों की बैठकों पर टिकी हैं।
दो दिन में 12 बैठकें, संगठन के हर स्तर पर होगा संवाद
स्मृति ईरानी और प्रदेश सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर में रहेंगे। इस दौरान प्रदेश भाजपा कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में प्रदेश पदाधिकारियों, संभाग और जिला प्रभारियों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों, सांसदों, विधायकों तथा मंत्रियों सहित संगठन के विभिन्न स्तरों से जुड़े नेताओं के साथ चर्चा की जाएगी।
इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी लेना और पार्टी के कामकाज को लेकर विभिन्न स्तरों पर संवाद करना माना जा रहा है। लगातार बैठकों के इस कार्यक्रम से स्पष्ट है कि प्रदेश प्रभारी का दौरा केवल औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन की स्थिति और कार्यप्रणाली को समझने पर भी जोर रहेगा।
पहले दिन पदाधिकारियों से लेकर पूर्व जनप्रतिनिधियों तक चर्चा
रविवार को पहले दिन प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों के साथ बैठकें निर्धारित हैं। इसके अलावा संभाग प्रभारियों, जिला प्रभारियों, पूर्व विधायकों, पूर्व सांसदों और पूर्व प्रदेश पदाधिकारियों के साथ भी चर्चा होगी। इन बैठकों के जरिए संगठन के विभिन्न स्तरों पर चल रही गतिविधियों और कार्यकर्ताओं से जुड़े विषयों की जानकारी ली जा सकती है।
पूर्व जनप्रतिनिधियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ संवाद को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके नेताओं के अनुभव और सुझाव प्रदेश भाजपा की आगामी कार्ययोजना के लिहाज से उपयोगी हो सकते हैं।
शाम को कोर ग्रुप की बैठक, बड़े मुद्दों पर नजर
पहले दिन की बैठकों के बाद भाजपा कोर ग्रुप की बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें प्रदेश के प्रमुख नेताओं के साथ संगठन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, बैठक का विस्तृत एजेंडा सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में कोर ग्रुप की बैठक पर राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों दृष्टियों से नजर रहेगी। प्रदेश में पार्टी की प्राथमिकताओं, संगठनात्मक समन्वय और आगामी गतिविधियों को लेकर क्या चर्चा होती है, यह बैठक के बाद सामने आने वाली जानकारी से ही स्पष्ट होगा।
दूसरे दिन सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठकें
26 अक्टूबर को स्मृति ईरानी का कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद पर केंद्रित रहेगा। सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के साथ होने वाली बैठकों में संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय सहित विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा सकती है। दो दिनों के भीतर 12 बैठकों का कार्यक्रम प्रदेश भाजपा के लिए महत्वपूर्ण संगठनात्मक गतिविधि के रूप में देखा जा रहा है।
अब स्वागत नहीं, बैठकों के नतीजों पर रहेगी नजर
स्मृति ईरानी के रायपुर आगमन पर स्वागत की सादगी ने जरूर ध्यान खींचा है, लेकिन इस दौरे का वास्तविक महत्व बैठकों में होने वाली चर्चा और उससे निकलने वाले निष्कर्षों से तय होगा। क्या इन बैठकों के बाद संगठनात्मक कामकाज में कोई बदलाव दिखाई देगा? क्या प्रदेश नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर नई प्राथमिकताएं तय होंगी? इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने आना बाकी हैं।
फिलहाल, भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी के सामने दो दिनों में संगठन के विभिन्न स्तरों से संवाद करने का व्यापक कार्यक्रम है। स्वागत में शक्ति प्रदर्शन की जगह सादगी और उसके बाद बैठकों का सघन दौर इस दौरे को चर्चा में जरूर ले आया है। अब राजनीतिक हलकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि 12 बैठकों के बाद प्रदेश भाजपा की आगामी रणनीति और संगठनात्मक प्राथमिकताओं को लेकर क्या संकेत सामने आते हैं।
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