रायपुर में आज से डीजीपी-आईजी सम्मेलन, पीएम नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और एनएसए अजीत डोभाल होंगे शामिल,हाई अलर्ट मोड पर अधिकारी

विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद निरोध, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान एवं एआई के उपयोग जैसे प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। साथ ही ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ‘सुरक्षित भारत’ के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा।

आज से रायपुर में आयोजित होने जा रही डीजी-आईजी सम्मेलन में शामिल होने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देर रात रायपुर पहुंच गए हैं। एयरपोर्ट पर केंद्रीय गृह मंत्री के स्वागत के लिए सीएम विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा पहुंचे थे। इस सम्मेलन में शामिल होने पीएम नरेंद्र मोदी भी आयेंगे। नवा रायपुर में वीवीआईपी सुरक्षा वाली आयोजित डीजी-आईजी कॉफ्रेंस को लेकर एयरपोर्ट से आईआईएम तक सुरक्षा बढ़ा दी गई है। DG-IG कॉन्फ्रेंस के लिए राज्य पुलिस के करीब 2000 से अधिक अधिकारी/जवान तैनात किये गये हैं। पीएम, HM और NSA की आवाजाही को देखते हुए बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा सक्रिय किया गया है। इस पूरी सुरक्षा का जिम्मा सीनियर आईपीएस एडीजीपी दिपांशु काबरा को सौंपा गया है।

उनके नेतृत्व में करीब 38 IPS और SPS सेवा के अधिकारी अलग-अलग मोर्चे पर तैनात किया गये हैं। इसके अलावा एसपीजी और आईबी ने प्रोटोकॉल के तहत उच्चस्तरीय इंट्रीग्रेटेड काउंटर तैयार किया है। नवा रायपुर, अटल नगर में 28 से 30 नवम्बर तक होने जा रहे डीजी–आईजी सम्मेलन को लेकर सुरक्षा तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) परिसर में आयोजित होने वाले इस अखिल भारतीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की उपस्थिति के चलते पूरे क्षेत्र में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं। यह पहला अवसर है जब छत्तीसगढ़ इस राष्ट्रीय पुलिस नेतृत्व बैठक की मेजबानी कर रहा है और इसी कारण नवा रायपुर को उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है।

⁠बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का ढांचा तैयार करते हुए जमीनी तैनाती, आकाशीय निगरानी और रियल–टाइम रूट ऑब्जर्वेशन को एकीकृत किया गया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन के लिए करीब 2000 से अधिक पुलिसकर्मी और स्पेशल यूनिट्स को लगाया गया है। इनमें 38 वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो आईपीएस और एसपीएस श्रेणी के हैं और विभिन्न सेक्टरों में तैनाती, मार्ग नियंत्रण तथा वीवीआईपी मूवमेंट की निगरानी की कमान संभाल रहे हैं।

इसमें अब तक प्रमुख पुलिस चुनौतियों से निपटने में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। साथ ही ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप ‘सुरक्षित भारत’ के निर्माण के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जाएगा। कान्फ्रेंस के अंतिम दिन प्रधानमंत्री मोदी विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे।

कौन करता है आयोजन, क्यों चुना गया छत्तीसगढ़
इस बैठक को इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) आयोजित करता है। सूत्रों के अनुसार माओवादी हिंसा के खिलाफ ये बैठक निर्णायक होगी। इसीलिए इसके लिए छत्तीसगढ़ को चुना गया है। यहां पड़ोसी राज्यों के सुरक्षा अधिकारी अपने अनुभवों को साझा करेंगे और रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

केंद्र में मोदी की सरकार गठित होने के बाद 2014 से अब तक यह सम्मेलन देश के अलग-अलग राज्यों में 10 बार हो चुका है और छत्तीसगढ़ में यह 11वीं बैठक है। यह सम्मेलन गुवाहाटी (असम), कच्छ के रण (गुजरात), हैदराबाद (तेलंगाना), टेकनपुर (ग्वालियर, मध्य प्रदेश), स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (केवड़िया, गुजरात), पुणे (महाराष्ट्र), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), नई दिल्ली, जयपुर (राजस्थान) व भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित किया जा चुका है।

हर सम्मेलन में पीएम ने जताई रुचि
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वार्षिक सम्मेलन में निरंतर गहरी रुचि दिखाई है और स्पष्ट चर्चाओं को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने एक ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां पुलिस व्यवस्था पर नए विचार उभर सकें। व्यावसायिक सत्र, विस्तृत बातचीत और विषयगत चर्चाएं प्रतिभागियों को महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा और नीतिगत मामलों पर सीधे प्रधानमंत्री के साथ अपने विचार साझा करने का अवसर प्रदान करती हैं।

क्यों जरूरी है ये बैठक
यह सम्मेलन देशभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध मुद्दों पर खुले और सार्थक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण संवादात्मक मंच प्रदान करता है। यह पुलिस बलों के सामने आने वाली परिचालन, अवसंरचनात्मक और कल्याण संबंधी चुनौतियों पर चर्चा के साथ-साथ अपराध से निपटने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आंतरिक सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए पेशेवर प्रथाओं के निर्माण और साझाकरण को भी सुगम बनाता है।