रक्षाबंधन पर केंद्रीय जेल दुर्ग में भावुक हुआ माहौल, 4 हजार बहनों ने भाइयों की कलाई पर बांधी राखी
दुर्ग। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर शुक्रवार, 28 अगस्त को केंद्रीय जेल दुर्ग सहित दुर्ग संभाग की विभिन्न जेलों में भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का भावुक नजारा देखने को मिला। जेलों में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए सुबह से ही बड़ी संख्या में बहनें पहुंचीं। केंद्रीय जेल दुर्ग में करीब 4 हजार बहनों ने अपने बंदी भाइयों को राखी बांधी और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की खुशियां साझा कीं।
रक्षाबंधन को लेकर केंद्रीय जेल दुर्ग में इस बार विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। जेल अधीक्षक के मार्गदर्शन में मुलाकात व्यवस्था, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और बहनों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। सुबह से ही जेल परिसर के बाहर बहनों की लंबी कतारें दिखाई देने लगी थीं। इसके बावजूद व्यवस्थाएं व्यवस्थित रहीं और बहनों को अपनी बारी के अनुसार भाइयों से मुलाकात का अवसर मिला।
जेल अधीक्षक की पहल से बेहतर रही व्यवस्था
रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक अवसर पर बड़ी संख्या में परिजनों के जेल पहुंचने को देखते हुए जेल प्रशासन के सामने सुरक्षा के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखने की भी चुनौती थी। जेल अधीक्षक मनीष सम्भाकर ने इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए पहले से आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित कीं।मुलाकात के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो और बहनों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े, इसके लिए व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखा गया।
जेल अधीक्षक के निर्देशन में कर्मचारियों ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ मुलाकात प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखा। भीड़ अधिक होने के बावजूद अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में जेल प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही। बहनों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुलाकात की व्यवस्था की गई, जिससे बड़ी संख्या में आने वाले परिजनों को व्यवस्थित तरीके से अपने भाइयों से मिलने का अवसर मिला।
भाई की कलाई पर राखी बांधते ही छलक उठीं आंखें
केंद्रीय जेल दुर्ग में अपने भाइयों से मिलने पहुंची कई बहनें लंबे समय बाद भाई को सामने देखकर भावुक हो गईं। मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी, मिठाई खिलाई और उनके स्वास्थ्य एवं हालचाल के बारे में जानकारी ली। कुछ बहनों की आंखों में खुशी के आंसू थे तो कुछ बहनें भाइयों को बेहतर भविष्य के लिए हिम्मत देती नजर आईं।
मुलाकात के लिए निर्धारित समय में भाई-बहनों ने एक-दूसरे से बातचीत की और परिवार की बातें साझा कीं। करीब 10 मिनट की मुलाकात भले ही छोटी रही, लेकिन इस दौरान भाई-बहन के बीच भावनाओं का सैलाब उमड़ता नजर आया।
दुर्ग संभाग की अन्य जेलों में भी विशेष इंतजाम
रक्षाबंधन को देखते हुए केवल केंद्रीय जेल दुर्ग ही नहीं, बल्कि राजनांदगांव, कबीरधाम, बेमेतरा, संजारी बालोद, खैरागढ़ और डोंगरगढ़ की जेलों में भी बंदियों की बहनों के लिए विशेष मुलाकात व्यवस्था की गई। सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ परिजनों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया।
सुबह से ही विभिन्न जेलों में बहनों का पहुंचना शुरू हो गया था। हाथों में राखी और मिठाई लिए बहनें अपने भाइयों से मिलने के लिए कतार में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार करती नजर आईं।
जेल की चारदीवारी में भी कायम रहा रिश्तों का प्यार
रक्षाबंधन के इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन के रिश्ते की डोर कमजोर नहीं होती। जेल की चारदीवारी के बीच भी बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद और सुरक्षित भविष्य की कामना की।
वहीं बंदी भाइयों ने भी अपनी बहनों की रक्षा, सम्मान और खुशियों का संकल्प लिया। कई परिवारों के लिए यह मुलाकात भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही।
रक्षाबंधन के अवसर पर केंद्रीय जेल दुर्ग में की गई व्यवस्थाओं और जेल अधीक्षक के निर्देशन में कर्मचारियों द्वारा निभाई गई जिम्मेदारी की बहनों ने भी सराहना की। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद मुलाकात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना जेल प्रशासन की बेहतर तैयारी और संवेदनशील कार्यशैली को दर्शाता है।
रक्षाबंधन का यह आयोजन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बंदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम भी बना। सुरक्षा व्यवस्था के साथ मानवीय संवेदनाओं को प्राथमिकता देते हुए जेल प्रशासन ने इस पर्व को सहज, व्यवस्थित और आत्मीय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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