ऐसा क्या फैसला सुनाया SC ने ? रिटायर्ड IAS को सरेंडर करने तीसरी बार आना पड़ा विशेष कोर्ट,आज होंगे ED की गिरफ्त में, सरेंडर की प्रक्रिया जारी

बहुचर्चित नान (नागर‍िक आपूर्ति निगम) घोटाले मामले में पूर्व मुख्य सचिव और रिटायर्ड IAS अधिकारी आलोक शुक्ला ने आज तीसरी बार ED की विशेष कोर्ट में सरेंडर के लिए पहुंचे। जहां कोर्ट ने उनका सरेंडर आवेदन स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) उन्हें गिरफ्तार कर रिमांड पर लेगी। इसी कड़ी में कोर्ट सरेंडर आवेदन पर सुनवाई करेगी और आगे की कार्यवाही तय करेगी।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार दोपहर पूर्व आईएएस अफसर आलोक शुक्ला तीसरी बार सरेंडर करने की विशेष रायपुर कोर्ट पहुंचे हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अफसरों की मौजूदगी में कोर्ट में अभी सरेंडर करने की प्रक्रिया चल रही है। सुरक्षा के मद्देनजर CRPF जवान भी तैनात किए गए हैं। तीन दिन पहले 19 सितंबर को भी IAS आलोक शुक्ला कोर्ट सरेंडर करने पहुंचे थे, लेकिन ED के वकील केस डायरी लेकर नहीं पहुंचे तो उन्होंने कोर्ट से समय मांगा था।

रिटायर्ड आईएएस अफसर आलोक शुक्ला 18 सितंबर को भी कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन कोर्ट ने सरेंडर कराने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उस समय तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपलोड नहीं हुआ था। दरअसल, नान घोटाला मामले में आलोक शुक्ला को हाईकोर्ट से जमानत मिली थी, लेकिन ED ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। ED ने कोर्ट में बताया था कि आरोपियों ने 2015 में दर्ज नान घोटाला मामले और जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। ईडी के वकील ने कहा कि हमारी जांच अभी पूरी नहीं हुई है। सरेंडर के बाद ईडी आलोक शुक्ला को कस्टोडियन रिमांड पर ले सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर दिया
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीशचंद्र शर्मा की बेंच ने सुनवाई के बाद हाईकोर्ट से आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को मिली अग्रिम जमानत को रद्द कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की कस्टडी के लिए आदेश जारी किया। कोर्ट के आदेश के अनुसार आलोक शुक्ला को पहले 2 हफ्ते ईडी की हिरासत और उसके बाद 2 हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा। इसके बाद ही उन्हें जमानत मिल सकती है। कोर्ट के आदेश के बाद आलोक शुक्ला सरेंडर करने पहुंचे हैं।

छापे के दौरान मिले थे 3.64 करोड़

जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने ईडी और ईओडब्ल्यू को जांच पूरी करने के लिए 2 महीने की मोहलत दी है। बता दें कि नान घोटाला फरवरी 2015 में सामने आया था, जब ACB-EOW ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रभावी संचालन को सुनिश्चित करने वाली नोडल एजेंसी नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के 25 परिसरों पर एक साथ छापे मारे थे। इस दौरान कुल 3.64 करोड़ रुपये नकद भी जब्त किए गए थे।

बहुचर्चित नान घोटाला केस में डॉ. शुक्ला और अनिल टुटेजा को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच जस्टिस सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, दोनों अधिकारियों को पहले दो हफ्ते ईडी की कस्टडी में रहना होगा। उसके बाद दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहना होगा. इसके बाद ही उन्हें जमानत मिल सकेगी। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों ने 2015 में दर्ज नान घोटाला मामले और ईडी की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी। सुप्रीम कोर्ट से जमानत याचिका के खारिज होने के दूसरे ही दिन यानी 18 सितंबर को ईडी की टीम ने डॉ. आलोक शुक्ला के भिलाई के तालपुरी स्थित घर में दबिश दी थी। उस दौरान डॉ. आलोक शुक्ला ED की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचे, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अपलोड नहीं होने का हवाला देते हुए सरेंडर करने से रोक दिया था। इसके अगले दिन यानी 19 सितंबर को उनके सरेंडर आवेदन पर आज यानी 22 सितंबर तक के लिए सुनवाई टाल दी गई थी।