छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! सिर्फ देह व्यापार में शामिल होने से नहीं बनता अपराध, तीन महिलाओं को मिली राहत
कोरबा के चर्चित मामले में राज्य शासन की अपील खारिज, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया—दूसरे के देह व्यापार की कमाई पर जानबूझकर जीवनयापन करना साबित करना जरूरी
छत्तीसगढ़। देह व्यापार से जुड़े एक मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम कानूनी टिप्पणी करते हुए तीन महिलाओं को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने राज्य शासन की अपील खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल स्वयं देह व्यापार में शामिल होने के आधार पर अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 के तहत किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस धारा के तहत अपराध साबित करने के लिए यह स्थापित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के देह व्यापार से अर्जित कमाई पर जानबूझकर अपना जीवनयापन कर रहा था।
क्या है पूरा मामला?
मामला कोरबा जिले का है। जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई 2013 को पुलिस को सूचना मिली थी कि महाराणा प्रताप नगर स्थित एक मकान में देह व्यापार कराया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर छापा मारा और इस मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
जांच के बाद तीन महिलाओं के खिलाफ अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 6 और 7 के तहत भी आरोप तय किए गए थे। हालांकि, सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने महिलाओं को इन आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन धारा 4 के तहत दोषी मानते हुए प्रत्येक को दो-दो साल के कठोर कारावास और 500-500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अपीलीय अदालत से मिली राहत
ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद मामले में अपील की गई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, फास्ट ट्रैक कोर्ट, कोरबा ने 28 अगस्त 2014 को तीनों महिलाओं को अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम की धारा 4 के आरोप से भी बरी कर दिया।
इस फैसले को राज्य शासन ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर विचार करने के बाद राज्य शासन की अपील खारिज कर दी और महिलाओं को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट की टिप्पणी का क्या है कानूनी महत्व?
अदालत की टिप्पणी का मुख्य आधार यह है कि धारा 4 के तहत दोषसिद्धि के लिए केवल देह व्यापार में शामिल होने का तथ्य पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के देह व्यापार से होने वाली कमाई पर जानबूझकर जीवनयापन कर रहा था।
इस प्रकार, अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधान के तहत अपराध साबित करने के लिए आवश्यक साक्ष्यों और कानूनी शर्तों के महत्व को रेखांकित किया।
कानूनी प्रावधानों के आधार पर फैसला
यह फैसला देह व्यापार से संबंधित मामलों में आरोपों की प्रकृति और संबंधित कानून की शर्तों के बीच अंतर को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदालत का निर्णय विशेष रूप से धारा 4 के तहत लगाए गए आरोपों से जुड़ा है। इसे देह व्यापार से संबंधित सभी गतिविधियों को कानूनी मान्यता देने वाला फैसला नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग परिस्थितियों में कानून के अन्य प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
कोरबा के इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य शासन की अपील खारिज करते हुए तीनों महिलाओं को धारा 4 के आरोप से बरी करने के पूर्व फैसले को बरकरार रखा।
देश और दुनिया की हर बड़ी खबर का तुरंत अपडेट पाने के लिए नोटिफिकेशन ऑन करें।