प्रदेश में करीब 18 जगहों पर ACB-EOW ने रेड मारी है। यह छापेमारी DMF और आबकारी घोटाले को लेकर चल रही है। जानकारी के मुताबिक रायपुर बिलासपुर अंबिकापुर कोंडागांव समेत कई शहरों में छापे पड़े है। खबर है कि पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के घर पर भी एक टीम ने दबिश दी है। अधिकारियों-कर्मचारियों के जांच पड़ताल जारी है।

सूत्रों के अनुसार, टीमों ने सुबह लगभग 6 बजे ऑपरेशन शुरू किया। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
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वर्ष 2019 से 2023 के बीच राज्य के 15 बड़े जिलों में पदस्थ आबकारी अधिकारियों ने देसी शराब (B-Part शराब) की अवैध बिक्री कराई। बस्तर और सरगुजा संभाग को छोड़कर बाकी चयनित जिलों में अधिक खपत वाली दुकानों को डिस्टलरी से सीधे अतिरिक्त अवैध शराब भेजी जाती थी, जिसे वैध शराब के साथ बेचा जाता था।


इस नेटवर्क में डिस्टलरी, ट्रांसपोर्टर, सेल्समैन, सुपरवाइजर, आबकारी विभाग के जिला प्रभारी अधिकारी, मैन पावर एजेंसी के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। इस अवैध शराब को ‘बी-पार्ट शराब’ कहा जाता था। इससे होने वाली रकम सीधे सिंडिकेट तक पहुंचती थी।



ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि रिटायर्ड आईएएस निरंजन दास ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा, तत्कालीन विशेष सचिव अरुण पति त्रिपाठी, कारोबारी अनवर ढेबर और अन्य के साथ मिलकर शराब घोटाले का सिंडिकेट खड़ा किया. ईओडब्ल्यू के मुताबिक सिंडिकेट में सरकारी शराब दुकानों में कमीशन तय करने डिस्टिलरी से अतिरिक्त शराब बनवाने, विदेशी ब्रांड की अवैध सप्लाई कराने और डुप्लीकेट होलोग्राम के जरिए शराब बेचने जैसी गतिविधियों से राज्य सरकार को हजारों करोड़ का नुकसान पहुंचाया।
कांग्रेस सरकार में आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा पहले से ही जांच एजेंसियों के रडार पर हैं. कवासी लखमा फिलहाल जेल में बंद हैं. कांग्रेस नेता बार बार कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बेवजह फंसाए जाने का आरोप लगाती रही है. चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के विरोध में तो कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में आर्थिक नाकेबंदी तक की. कांग्रेस हमेशा से आरोप लगाती आई है कि बीजेपी सरकार केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने सियासी फायदे और विपक्षी पार्टियों को बदनाम करने के लिए करती है।





































