चार बेटों के रहते बुजुर्ग दंपत्ति ने इलाज के लिए पैतृक संपत्ति बेचने की बात कही
केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय के निर्देश पर दुर्ग एसडीएम को कार्रवाई के आदेश, बेटों पर देखभाल नहीं करने का आरोप
भिलाई। रिसाली एचएससीएल कॉलोनी, रुआबांधा निवासी 73 वर्षीय अजंता देवी और 76 वर्षीय रमाकांत सिंह ने अपने चार जीवित बेटों के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय में शिकायत कर भरण-पोषण और इलाज में सहयोग नहीं मिलने का आरोप लगाया है। बुजुर्ग दंपत्ति का कहना है कि आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बीच उन्हें अपनी बची हुई पैतृक संपत्ति बेचकर जीवनयापन और इलाज का खर्च जुटाना पड़ा।
मामले को भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ नागरिक कल्याण प्रभाग ने संज्ञान में लिया है। मंत्रालय ने दुर्ग के अनुविभागीय दंडाधिकारी को माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत ट्रिब्यूनल में मामले की सुनवाई कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
आठ वर्षों से सहयोग नहीं मिलने का आरोप
अजंता देवी की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार पिछले करीब आठ वर्षों से चारों जीवित बेटों से उन्हें नियमित देखभाल, भोजन और इलाज के खर्च में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सबसे छोटा बेटा छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत है। हालांकि, बेटों की ओर से इन आरोपों पर उनका पक्ष इस समय उपलब्ध नहीं है और प्रशासनिक सुनवाई में दोनों पक्षों की बात सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
शिकायत के अनुसार परिवार में पांच बेटे और एक बेटी थे। एक बेटे की मृत्यु हो चुकी है। मृत बेटे के 25 वर्षीय पुत्र विक्रांत सिंह की परवरिश दादा-दादी ने की। वर्तमान में विक्रांत एक छोटी फोटोकॉपी की दुकान चलाता है और अपने दादा-दादी के इलाज तथा दैनिक खर्च में मदद कर रहा है।
बीमारी के दौरान आर्थिक परेशानी का दावा
बुजुर्ग दंपत्ति ने अपनी शिकायत में स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा है कि बीमारी के दौरान उन्हें घरेलू जरूरतें पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। शिकायत में दावा किया गया है कि एक समय उन्हें बेडरूम में ही गैस चूल्हा रखकर खाना बनाना पड़ा।
रिटायरमेंट और इलाज की राशि को लेकर भी शिकायत
शिकायत में रमाकांत सिंह के सेवानिवृत्ति लाभ और गंभीर हृदय रोग के उपचार के दौरान पेसमेकर प्रत्यारोपण के लिए मिली शासकीय सहायता की राशि को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। दंपत्ति का कहना है कि इन राशियों पर बेटों ने कब्जा कर लिया या उन्हें अपने पास रखा।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है। संबंधित दस्तावेजों और दोनों पक्षों के बयान के आधार पर ही इस संबंध में वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
समझौते के बाद भी आर्थिक मदद जारी नहीं रहने का आरोप
बुजुर्ग दंपत्ति के अनुसार मार्च 2023 में रिश्तेदारों और समाज के लोगों की मौजूदगी में परिवार के बीच समझौता हुआ था। इसमें बेटों द्वारा प्रतिमाह 3,500 रुपये भरण-पोषण के लिए देने की बात कही गई थी।
शिकायत में आरोप है कि करीब चार महीने बाद यह आर्थिक सहायता बंद हो गई। इसके बाद दैनिक खर्च और आंखों के ऑपरेशन सहित इलाज की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हुआ और दंपत्ति को अपनी बची हुई पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ी।
पोता कर रहा आर्थिक मदद
दंपत्ति के अनुसार उनका पोता विक्रांत सिंह वर्तमान में उनके इलाज, घर के किराए और रोजमर्रा के खर्च में मदद कर रहा है। शिकायत में कहा गया है कि इस सहायता के चलते उस पर भी आर्थिक बोझ और कर्ज बढ़ा है।
बुजुर्ग दंपत्ति ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें जीवन के इस पड़ाव में नियमित भरण-पोषण, इलाज और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जाए।
अंतिम संस्कार को लेकर भी इच्छा जताई
शिकायत में बुजुर्ग दंपत्ति ने अपनी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार में बेटों की भूमिका को लेकर भी अपनी इच्छा व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि जिन बच्चों से उन्हें जीवनकाल में अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, वे उनकी अंतिम यात्रा में शामिल न हों।
यह मांग भी फिलहाल शिकायत में दर्ज दंपत्ति की व्यक्तिगत इच्छा है। इस संबंध में कोई प्रशासनिक या न्यायिक निर्णय सामने नहीं आया है।
क्या कहता है कानून
माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत माता-पिता और पात्र वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से संबंधित प्रावधान हैं। निर्धारित प्रक्रिया के तहत वरिष्ठ नागरिक अपने भरण-पोषण के लिए संतान के खिलाफ मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल में आवेदन कर सकते हैं।
ट्रिब्यूनल मामले की परिस्थितियों और संबंधित पक्षों की स्थिति को देखते हुए भरण-पोषण से संबंधित आदेश जारी कर सकता है। कानून में कुछ परिस्थितियों में उस संपत्ति के हस्तांतरण को निरस्त करने का प्रावधान भी है, जिसे वरिष्ठ नागरिक ने इस अपेक्षा के साथ हस्तांतरित किया हो कि उसकी मूलभूत जरूरतों और देखभाल की जिम्मेदारी पूरी की जाएगी और बाद में वह जिम्मेदारी पूरी नहीं की गई।
अब ट्रिब्यूनल की सुनवाई में सामने आएगी स्थिति
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के निर्देश के बाद अब दुर्ग एसडीएम के स्तर पर मामले की सुनवाई होनी है। इसमें बुजुर्ग दंपत्ति की शिकायत के साथ बेटों का पक्ष, उपलब्ध दस्तावेज, कथित समझौता, संपत्ति की बिक्री और भरण-पोषण से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच की जा सकती है।
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता बुजुर्ग दंपत्ति के पक्ष से हैं। इन आरोपों की पुष्टि और दोनों पक्षों की वास्तविक जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित प्राधिकारी की जांच और सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
देश और दुनिया की हर बड़ी खबर का तुरंत अपडेट पाने के लिए नोटिफिकेशन ऑन करें।