छत्तीसगढ़ में बारिश का रौद्र रूप! गंगरेल के सभी 14 गेट खुले, महानदी में बढ़ा बाढ़ का खतरा; हाईवे जलमग्न, स्कूल बंद, कई मार्गों पर आवागमन ठप
रायपुर/धमतरी। छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। बस्तर से लेकर मैदानी इलाकों तक नदी-नाले उफान पर हैं। कई सड़कें और हाईवे जलमग्न हो गए हैं, जबकि कुछ मार्गों पर आवागमन पूरी तरह रोकना पड़ा है। बस्तर में बारिश और भूस्खलन के कारण 25 सितंबर को यात्री ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
गंगरेल बांध में भारी आवक, सभी 14 गेट खोले गए
धमतरी जिले में लगातार बारिश के कारण गंगरेल बांध तेजी से भर गया। सुबह 8 बजे की स्थिति में बांध 98.14 प्रतिशत भरा था और इसमें 64,117 क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी। उस समय 10 गेटों से 54,950 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था, जिसमें 48,950 क्यूसेक महानदी में और 6,000 क्यूसेक नहर में छोड़ा जा रहा था।
इसके बाद जलस्तर और आवक को देखते हुए गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोल दिए गए। बाद की रिपोर्ट के अनुसार महानदी में पानी की निकासी बढ़ाकर करीब 2.06 लाख क्यूसेक कर दी गई। इसके चलते महानदी के तटीय क्षेत्रों में बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।
मुरुमसिल्ली जलाशय 100 प्रतिशत, दुधावा 97.21 प्रतिशत और सोंढूर 88.18 प्रतिशत तक भर चुका था। इन जलाशयों से भी सुरक्षा और जल प्रबंधन के लिए पानी छोड़ा जा रहा है। प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों से विशेष सावधानी बरतने और नदी-नालों के पास नहीं जाने की अपील की है।
बस्तर में बाढ़ जैसे हालात, कई हाईवे प्रभावित
लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश के कारण जगदलपुर के कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। डिमरापाल के पास नेशनल हाईवे पर जलभराव के कारण आवागमन बाधित हुआ और राहत एवं बचाव के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है।
जगदलपुर को बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा से जोड़ने वाले मार्गों पर भी बारिश का असर पड़ा है। वहीं इंद्रावती नदी का जलस्तर भी बढ़ रहा है। ओडिशा के खाटीगुड़ा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी के आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।
कांकेर में 70 से ज्यादा गांवों का संपर्क प्रभावित
कांकेर जिले में दूध नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण आमाबेड़ा-धनोरा और कांकेर-आमाबेड़ा मार्ग पर आवागमन बंद कर दिया गया है। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर लोगों को उफनते नदी-नालों को पार नहीं करने की चेतावनी दी है।
दूध नदी के उफान के कारण आमाबेड़ा क्षेत्र के 70 से अधिक गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
बालोद में स्कूल बंद, परीक्षाओं की तारीख बदली
भारी बारिश को देखते हुए बालोद जिले में 25 सितंबर को सभी शासकीय, अशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। 25 सितंबर को निर्धारित परीक्षाएं अब 28 सितंबर को पूर्व निर्धारित समय पर आयोजित की जाएंगी।
बालोद शहर में जलनिकासी प्रभावित होने से कई जगह पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। छोटे नाले भी उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
दुर्ग-भिलाई में भी जलभराव से परेशानी
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण कई प्रमुख मार्गों पर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। सुपेला और दक्षिण गंगोत्री के अंडरब्रिज में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ। इन मार्गों से भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
लगातार बारिश, बांधों से पानी छोड़े जाने और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी किनारे और निचले इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। लोगों को उफनती नदियों, नालों और जलमग्न सड़कों को पार करने से बचने की सलाह दी गई है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता महानदी समेत प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर और निचले इलाकों में संभावित जलभराव को लेकर है।
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