42 करोड़ के पेवर ब्लॉक कार्यों की जांच की मांग, दया सिंह ने डिप्टी सीएम अरुण साव से की मुलाकात; सचिव को कार्रवाई के निर्देश
भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई में पिछले वर्षों में कराए गए पेवर ब्लॉक कार्यों को लेकर निगम के उपनेता प्रतिपक्ष दया सिंह ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पेवर ब्लॉक कार्यों में सामने आई बताई जा रही वित्तीय एवं तकनीकी विसंगतियों की विस्तृत जांच कराने तथा जांच में जिम्मेदारी तय होने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
दया सिंह द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए कुछ पेवर ब्लॉक कार्यों की जांच में माप पुस्तिका (एमबी) में दर्ज मात्रा और मौके पर उपलब्ध कार्य के बीच अंतर संबंधी टिप्पणियां सामने आई हैं। ज्ञापन में कुछ मामलों में भुगतान से जुड़ी विसंगतियों और रिकवरी संबंधी बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है।
ज्ञापन के मुताबिक, अब तक की जांच में लगभग 16.85 लाख रुपये के अतिरिक्त भुगतान अथवा रिकवरी से संबंधित आपत्तियां सामने आई हैं। दया सिंह ने कहा है कि पिछले पांच वर्षों में निगम क्षेत्र में लगभग 42 करोड़ रुपये के पेवर ब्लॉक कार्य कराए गए, जबकि करीब 12 करोड़ रुपये के कार्यों की ही जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने शेष कार्यों की भी तकनीकी, वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी जांच कराने की मांग की है।
ज्ञापन में करीब 21 कार्यों अथवा अनुबंधों में माप पुस्तिका और वास्तविक कार्य के बीच अंतर संबंधी आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। दया सिंह का कहना है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्चस्तरीय तकनीकी समिति से जांच कराए जाने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
ज्ञापन में कुछ अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी जांच के दौरान सामने आई आपत्तियों का उल्लेख किया गया है। इनमें माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा और मौके की स्थिति में कथित अंतर, भौतिक सत्यापन से संबंधित सवाल तथा भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी विसंगतियों जैसे बिंदु शामिल हैं। हालांकि, इन बिंदुओं के आधार पर किसी अधिकारी की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और सक्षम स्तर पर होने वाली जांच के निष्कर्ष इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।
दया सिंह ने उपमुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं व्यापक जांच कराई जाए। साथ ही जांच में यदि किसी अधिकारी अथवा संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी निर्धारित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा शासन को हुई आर्थिक क्षति प्रमाणित होने पर नियमानुसार उसकी वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाए।
मुलाकात के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए संबंधित सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद मामले में शासन स्तर से आगे की कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
दया सिंह ने कहा कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित दस्तावेजों, माप पुस्तिकाओं, भुगतान अभिलेखों और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का परीक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
फिलहाल प्रकरण में लगाए गए आरोपों और ज्ञापन में उल्लेखित आपत्तियों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
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