सोनिया गांधी पर ‘गांधारी’ टिप्पणी से भड़की सियासत, भूपेश बघेल का BJP पर तीखा पलटवार—बोले, “भाजपा नेताओं का मानसिक संतुलन बिगड़ गया”, VIDEO में सुनिए पूरा जवाब
रायपुर। छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय द्वारा कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की तुलना ‘गांधारी’ से किए जाने और कांग्रेस नेताओं के लिए ‘दुर्योधन-दुशासन’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर तीखा पलटवार किया है। बघेल ने भाजपा नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए भाजपा पर निशाना
राहुल गांधी के निमंत्रण पर दिल्ली रवाना होने से पहले रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान भूपेश बघेल ने भाजपा नेताओं पर जमकर निशाना साधा। सोनिया गांधी को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने राहुल गांधी के पूर्व में दिए गए एक बयान का उल्लेख किया और भाजपा नेताओं पर कटाक्ष किया।
बघेल ने कहा कि भाजपा नेताओं की भाषा लगातार राजनीतिक बहस के स्तर को प्रभावित कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता ऐसे बयान दे रहे हैं, जिनसे वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटक रहा है। सोनिया गांधी को लेकर सांसद संतोष पाण्डेय की टिप्पणी को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई और इसे राजनीतिक मर्यादा से जोड़ते हुए भाजपा पर हमला बोला।
अमित शाह के बयानों को लेकर भी सवाल
भूपेश बघेल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने संसद में चर्चा के मुद्दे पर भाजपा नेताओं के कथित विरोधाभासी रुख पर सवाल उठाया।
बघेल ने कहा कि एक ओर संसद में चर्चा नहीं होने की बात कही जाती है, वहीं दूसरी ओर रायपुर आकर राहुल गांधी को सड़क के बजाय संसद में चर्चा करने की सलाह दी जाती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन भाजपा के अलग-अलग नेताओं के बयानों में विरोधाभास नजर आता है।
नेहरू को लेकर निशिकांत दुबे के बयान पर पलटवार
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के जवाहरलाल नेहरू से जुड़े बयान पर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। बघेल ने ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि बांग्लादेश का गठन वर्ष 1971 में हुआ था और उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं।
उन्होंने निशिकांत दुबे के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक बहस में इतिहास से जुड़े तथ्यों को सही संदर्भ में रखना जरूरी है। इस मुद्दे को लेकर भी उन्होंने भाजपा पर निशाना साधा।
सीजफायर और सैन्य अभियान को लेकर केंद्र से सवाल
भूपेश बघेल ने भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य कार्रवाई और उसे रोके जाने के फैसले को लेकर भी केंद्र सरकार से सवाल किए। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब भारतीय जवान आगे बढ़ चुके थे, तब सैन्य अभियान को रोकने का निर्णय क्यों लिया गया।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन और सीजफायर के बीच संबंध को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, ये सवाल और आरोप बघेल की राजनीतिक टिप्पणी के तौर पर सामने आए हैं और उपलब्ध बयान से यह प्रमाणित नहीं होता कि सैन्य अभियान रोकने का निर्णय किसी विदेशी दबाव में लिया गया था।
धान खरीदी को लेकर राज्य सरकार पर हमला
राजनीतिक मुद्दों के साथ ही भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की तैयारियों को लेकर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में धान खरीदी की शुरुआत एक नवंबर से हो जानी चाहिए थी। बघेल ने आरोप लगाया कि सरकार ने धान खरीदी के लिए पर्याप्त तैयारियां नहीं की हैं।
उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए समय पर सभी जरूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए। खरीदी केंद्रों पर व्यवस्था, प्रशासनिक प्रक्रिया और किसानों से जुड़े कार्यों को लेकर सरकार को पहले से तैयारी करनी चाहिए थी।
पटवारियों की हड़ताल का भी उठाया मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पटवारियों की हड़ताल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े कार्यों पर इसका असर पड़ सकता है और इसका सीधा प्रभाव किसानों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ने की आशंका है।
बघेल ने सरकार से मांग की कि धान खरीदी प्रक्रिया से जुड़े सभी प्रशासनिक और मैदानी इंतजामों को जल्द दुरुस्त किया जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी तरह की परेशानी न हो।
किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि धान खरीदी को लेकर सरकार की तैयारियां स्पष्ट नहीं हैं और अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि किसानों में किसी प्रकार का असमंजस नहीं होना चाहिए और सरकार की जिम्मेदारी है कि खरीदी व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करे।
उन्होंने राज्य सरकार से किसानों के हित में तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की। बघेल के इन बयानों के बाद एक ओर सोनिया गांधी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा-कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हुआ है, वहीं धान खरीदी, संसद में चर्चा, राष्ट्रीय सुरक्षा और केंद्र सरकार की नीतियों को लेकर भी राजनीतिक बहस गरमाती नजर आ रही है।
अब सोनिया गांधी पर भाजपा सांसद संतोष पाण्डेय की टिप्पणी और उस पर भूपेश बघेल के तीखे पलटवार ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। दोनों दलों के बीच आने वाले दिनों में इस बयानबाजी के और तेज होने के आसार हैं।
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