बस्तर में जवानों संग पीएम मोदी की दीपावली, वीरों के शौर्य को देश का सलाम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित करनपुर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। कभी नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले बस्तर में प्रधानमंत्री का जवानों के बीच पहुंचना देश के सुरक्षा बलों के त्याग, तपस्या और अदम्य साहस को सम्मान देने का संदेश बना। प्रधानमंत्री ने जवानों को दीपावली की शुभकामनाएं देते हुए उनके बलिदान और निस्वार्थ सेवा को नमन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बस्तर कभी नक्सलवाद के प्रभाव में था, लेकिन आज यहां विकास और शांति की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी भूमिका उन वीर जवानों की है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
नक्सलवाद के खात्मे के बाद पहली दीपावली
प्रधानमंत्री ने 2026 की दीपावली को विशेष और ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली दीपावली है जब देश के हर जिले को नक्सलवाद से मुक्त बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दशकों तक चली इस लड़ाई में सुरक्षा बलों ने असाधारण साहस का परिचय दिया और करोड़ों देशवासियों को नक्सली हिंसा के भय से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पीएम मोदी ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल हथियारों की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह देश की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा की लड़ाई भी थी। एक समय देश के करीब 20 राज्यों के 230 से अधिक जिले नक्सलवाद से प्रभावित बताए जाते थे। आज हालात में बड़ा बदलाव आया है।
47 साल में पहली बार CRPF में एक साल तक कोई ऑपरेशनल मौत नहीं
जवानों के साहस को सलाम करते हुए प्रधानमंत्री ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि पिछले एक साल में ड्यूटी के दौरान किसी CRPF जवान की ऑपरेशनल मौत नहीं हुई।
CRPF के महानिदेशक जी. पी. सिंह के मुताबिक इस उपलब्धि में आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और घायल जवानों को तेजी से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की अहम भूमिका रही है। प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि को जवानों के साहस और बेहतर रणनीति का परिणाम बताया।
कभी एक साल में होते थे हजारों नक्सली हमले
प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के पुराने दौर को याद करते हुए कहा कि एक समय नक्सली हिंसा का प्रभाव इतना व्यापक था कि एक साल में हमलों की संख्या करीब 2,000 तक पहुंच जाती थी। दंतेवाड़ा में 2010 के उस दर्दनाक हमले का भी उन्होंने उल्लेख किया, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हुए थे।
उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन दौर से देश को बाहर निकालने में सुरक्षा बलों ने असाधारण कीमत चुकाई है। जवानों की शहादत और उनके परिवारों के त्याग को देश कभी नहीं भूल सकता।
जवानों के परिवारों के त्याग को भी किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब कोई जवान देश की सुरक्षा के लिए अपने घर से हजारों किलोमीटर दूर तैनात रहता है, तो उसके परिवार को भी अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए जवानों की जिम्मेदारी में उनके परिवार भी बराबर के भागीदार हैं।
उन्होंने कहा कि देशवासी जिस सुरक्षित माहौल में दीपावली का त्योहार मनाते हैं, उसके पीछे सीमा और देश के भीतर सुरक्षा में तैनात जवानों की मेहनत और त्याग है। उन्होंने देश के करोड़ों नागरिकों की ओर से सुरक्षाबलों के प्रति आभार व्यक्त किया।
आंतरिक सुरक्षा मजबूत तो बाहरी दुश्मनों पर भी दबाव
प्रधानमंत्री ने आंतरिक सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा की अहम कड़ी बताते हुए कहा कि देश के भीतर पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी सीमा पर तैनात सेना की। मजबूत आंतरिक सुरक्षा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करती है।
उन्होंने जवानों से कहा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है और उनके त्याग पर प्रत्येक भारतीय को गर्व है। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
बस्तर में विकास की नई सुबह
प्रधानमंत्री की बस्तर यात्रा का एक बड़ा संदेश यह भी रहा कि जिस क्षेत्र में कभी नक्सली हिंसा के कारण शाम होते ही भय और सन्नाटा छा जाता था, वहां अब शांति, विकास और नई संभावनाओं की बात हो रही है। केंद्र सरकार के अनुसार 31 मार्च 2026 को देश को नक्सल समस्या से मुक्त घोषित किया गया था, जिसके बाद बस्तर सहित प्रभावित क्षेत्रों में विकास गतिविधियों को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।
जवानों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा जारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जवानों के साथ दीपावली मनाने की परंपरा नई नहीं है। वर्ष 2014 में सियाचिन से शुरू हुई यह परंपरा अलग-अलग वर्षों में देश के सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंची। इस बार बस्तर को चुनना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह वही क्षेत्र है जो लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहा।
बस्तर की धरती पर जवानों के बीच मनाई गई यह दीपावली केवल एक पर्व का आयोजन नहीं, बल्कि उन वीर सुरक्षाकर्मियों के सम्मान का अवसर बनी, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि देश चैन से दीप जलाता है, क्योंकि उसके वीर जवान दिन-रात देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं।
वीर जवानों को शत-शत नमन। जय हिंद।🇮🇳
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