भिलाई इस्पात संयंत्र में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रक की चपेट में आए ठेका मजदूर की मौत, प्रबंधन ने मदद का दिया आश्वासन
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र के प्लांट परिसर में सोमवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में ठेका मजदूर की मौत हो गई। रेल मिल क्षेत्र के जीरो कार्बाइड मोड़ के पास तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से साइकिल सवार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद संयंत्र परिसर में हड़कंप मच गया। मामला भट्टी थाना क्षेत्र का है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सीजी 04 ओएम 7139 नंबर का ट्रक रेल पटरी लोड करने के लिए रेल मिल शिपिंग एरिया की ओर जा रहा था। इसी दौरान जीरो कार्बाइड मोड़ के पास 14 नंबर बिल्डिंग के सामने टर्न लेते समय ट्रक के पिछले पहिए की चपेट में साइकिल से जा रहे मजदूर आ गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गया।
मृतक की पहचान खुर्सीपार निवासी गोमती प्रसाद साहनी (55 वर्ष) के रूप में हुई है, जो एसआरयू के तहत ठेका मजदूर के रूप में कार्यरत थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोमती प्रसाद रोज की तरह साइकिल से ड्यूटी पर जा रहे थे, तभी यह हादसा हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।
घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन अस्पताल पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। बताया जा रहा है कि गोमती प्रसाद अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके परिवार में पत्नी और एक छोटी बेटी है, जिसकी पढ़ाई जारी है। इस हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
हादसे के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने मृतक परिवार को सहायता देने की घोषणा की है। प्रबंधन ने मृतक की बेटी की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने, उचित मुआवजा देने और उनकी पत्नी को नौकरी देने का आश्वासन दिया है, जिससे परिवार को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
इधर, भट्टी थाना पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और ट्रक चालक से पूछताछ की जा रही है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों की सुरक्षा और भारी वाहनों की आवाजाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लांट परिसर में ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।