बिना सदस्यता कांग्रेस कार्यकर्ता का नाम भाजपा की सूची में! सरगुजा में सियासी विवाद, रविशंकर बोले—“न पद मांगा, न सहमति दी”
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में भारतीय जनता पार्टी की संगठनात्मक सूची को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ग्राम करजी निवासी कांग्रेस कार्यकर्ता रविशंकर नायक का नाम उनकी सहमति के बिना भाजपा के दरिमा मंडल अनुसूचित जाति मोर्चा की पदाधिकारियों की सूची में शामिल कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद संबंधित सूची को सोशल मीडिया से हटा लिया गया, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि अब तक इस मामले में भाजपा की ओर से सार्वजनिक रूप से स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है। मामले की रिपोर्ट 18 अगस्त को भी प्रकाशित हुई है।
मंगलवार को राजीव भवन में कांग्रेस मीडिया सेल प्रभारी अनूप मेहता के साथ आयोजित पत्रकारवार्ता में रविशंकर नायक ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वे ग्राम करजी के कांग्रेस समर्थित उपसरपंच हैं और लुंड्रा विधानसभा क्षेत्र के करजी बूथ क्रमांक 169 में कांग्रेस के बूथ लेवल कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं।
सोशल मीडिया पर सूची देखकर सामने आया मामला
रविशंकर नायक के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया पर भाजपा की संगठनात्मक सूची देखी तो उसमें अपना नाम भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की पदाधिकारियों की सूची में दर्ज पाया। उनका कहना है कि यह देखकर वे स्वयं भी हैरान रह गए, क्योंकि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली है और न ही भाजपा के किसी संगठनात्मक पद के लिए अपनी सहमति दी है।
नायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनका राजनीतिक जुड़ाव कांग्रेस के साथ है और वे लंबे समय से कांग्रेस समर्थक परिवार से आते हैं। ऐसे में भाजपा की संगठनात्मक सूची में उनका नाम शामिल होना उनके लिए अप्रत्याशित है।
भाजपा पदाधिकारियों को दी लिखित शिकायत
रविशंकर नायक ने बताया कि सूची में अपना नाम सामने आने के बाद उन्होंने मामले की जानकारी भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष महेंद्र रवि और दरिमा मंडल अध्यक्ष को लिखित रूप से दी। शिकायत के बाद सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही सूची को हटा लिया गया।
हालांकि, नायक का कहना है कि सूची से नाम हटाए जाने के बावजूद यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनका नाम आखिर किस आधार पर भाजपा की पदाधिकारियों की सूची में शामिल किया गया था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि नाम किसी गलती से शामिल हुआ था, तो भाजपा की ओर से सार्वजनिक तौर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
मई में भाजपा जिला अध्यक्ष से भी की थी मुलाकात
रविशंकर नायक के मुताबिक, उन्होंने मई महीने में सरगुजा जिला भाजपा अध्यक्ष से भी मुलाकात की थी और अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि वे जरूरत पड़ने पर शपथपत्र देकर यह साबित करने के लिए भी तैयार थे कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता नहीं ली है।
नायक का कहना है कि उनकी ओर से लगातार अपनी स्थिति स्पष्ट किए जाने के बावजूद संगठनात्मक सूची में उनका नाम कैसे पहुंचा, यह अब भी सवाल बना हुआ है।
कांग्रेस ने संगठनात्मक प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की संगठनात्मक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल बताया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसका नाम किसी राजनीतिक दल की संगठनात्मक पदाधिकारियों की सूची में शामिल किया जाना गंभीर विषय है।
कांग्रेस ने मांग की है कि भाजपा इस मामले की वास्तविक वजह सार्वजनिक करे और स्पष्ट करे कि रविशंकर नायक का नाम सूची में किस स्तर पर और किस आधार पर शामिल हुआ। पार्टी से यह भी मांग की गई है कि यदि नाम गलती से शामिल हुआ था तो बाकायदा भूल-सुधार जारी कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
भाजपा की ओर से स्पष्टीकरण का इंतजार
मामले में फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि रविशंकर नायक के नाम को भाजपा की संगठनात्मक सूची में शामिल करने की प्रक्रिया क्या थी और सूची से नाम हटाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, सूची हटाए जाने के बाद भी भाजपा की ओर से इस मामले पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है।
ऐसे में सरगुजा की स्थानीय राजनीति में यह मामला कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का नया मुद्दा बन गया है। अब नजर इस बात पर है कि भाजपा संगठन इस मामले पर आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण देता है और रविशंकर नायक का नाम संगठनात्मक सूची में शामिल होने की वजह क्या बताई जाती है।
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