दुर्ग जिले में अवैध मुरुम खनन का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। पाटन ब्लॉक के ग्राम परेवाडीह, महकाखुर्द और महकाकला सहित आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से जारी अवैध उत्खनन को लेकर अब सियासी रंग भी चढ़ता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में उतई नगर पंचायत के एक भाजपा पार्षद एवं मंडल कोषाध्यक्ष का नाम सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खनन स्थल पर जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहन अवैध मुरुम उत्खनन और परिवहन में लगे पाए गए। बताया जा रहा है कि इन वाहनों पर संबंधित भाजपा पार्षद का नाम अंकित है, जिससे उनकी संलिप्तता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब खदान में कार्यरत एक मजदूर ने मौके पर मौजूद लोगों के बीच उक्त पार्षद का नाम लिया। इसके बाद से क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में वाहन बिना वैध परिवहन पास के मुरुम की ढुलाई कर रहे हैं, जिससे शासन को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद खनिज विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप लग रहे हैं कि राजनीतिक दबाव या मिलीभगत के चलते अवैध खनन का यह कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। वहीं, राज्य सरकार द्वारा अवैध खनन पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति के दावों के बीच इस तरह की घटनाएं उन दावों की सच्चाई पर प्रश्नचिन्ह लगाती हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि अवैध खनन में उपयोग हो रहे वाहनों को तत्काल जब्त किया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जब तक इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अवैध उत्खनन पर रोक लगाना संभव नहीं है।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है और जिम्मेदारों पर कब तक कार्रवाई होती है।