स्थानीय कार्यकर्ता, स्थानीय वार्ड को मिले टिकट, बाहरी प्रत्याशियों से संभावित जीत का अवसर न गंवाए कांग्रेस: ज्ञानचंद जैन

भिलाई। नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही स्थानीय और जमीनी कार्यकर्ताओं को टिकट देने की मांग जोर पकड़ने लगी है। दुर्ग (ग्रामीण) जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व जिला महामंत्री एवं प्रवक्ता ज्ञानचंद जैन ने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और भिलाई शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर से मांग की है कि जिस वार्ड में कांग्रेस का मैदानी कार्यकर्ता वर्षों से निवास कर जनता के बीच सक्रिय है, उसी वार्ड से उसे चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाए।
जैन ने कहा कि नगरीय निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर है। मौजूदा परिस्थितियों में जनता के बीच भाजपा के प्रति असंतोष और कांग्रेस के प्रति बन रहे विश्वास का लाभ पार्टी को मिल सकता है। ऐसे समय में प्रत्याशी चयन में होने वाली किसी भी चूक का सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड में कांग्रेस के समर्पित कार्यकर्ता लंबे समय से संगठन के लिए काम कर रहे हैं। यही कार्यकर्ता बूथ स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक पार्टी का आधार मजबूत करते हैं और चुनाव के दौरान सबसे अधिक मेहनत भी इन्हीं कार्यकर्ताओं को करनी पड़ती है। इसलिए टिकट वितरण में सबसे पहला अधिकार जमीन से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ताओं का होना चाहिए।
ज्ञानचंद जैन ने स्पष्ट कहा कि वार्ड बदलकर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को टिकट देने की परंपरा से पार्टी को बचना चाहिए। किसी दूसरे वार्ड से लाकर प्रत्याशी बनाने की स्थिति में स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष पैदा हो सकता है और मतदाताओं के बीच भी यह संदेश जा सकता है कि पार्टी ने स्थानीय नेतृत्व की उपेक्षा की है।
उन्होंने कहा कि प्रभावशाली बताए जाने वाले लोग टिकट के लिए हर स्तर पर राजनीतिक जोड़-तोड़ कर सकते हैं, लेकिन पार्टी नेतृत्व को ऐसे दबावों से ऊपर उठकर संगठन के हित में फैसला लेना होगा। चुनाव में केवल प्रभावशाली चेहरा ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वार्ड के मतदाताओं के साथ प्रत्याशी का व्यक्तिगत जुड़ाव, सामाजिक स्वीकार्यता और लगातार जनसंपर्क अधिक महत्वपूर्ण होता है।
बाहरी प्रत्याशी का वातावरण पूरे क्षेत्र को खा जाएगा
जैन ने कहा कि बाहरी प्रत्याशी का वातावरण पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। स्थानीय कार्यकर्ता वर्षों से जिन लोगों के बीच काम करता है, उनके सुख-दुःख में शामिल होता है और वार्ड की समस्याओं को समझता है। इसके विपरीत अचानक दूसरे वार्ड से प्रत्याशी उतारने पर उसे मतदाताओं का विश्वास हासिल करने में कठिनाई हो सकती है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को पिछले लोकसभा चुनाव के अनुभवों को भी ध्यान में रखना चाहिए। यदि वर्तमान परिस्थितियों में जनता कांग्रेस को चुनावी बढ़त का अवसर दे रही है तो टिकट वितरण की गलत रणनीति के कारण इस अवसर को गंवाना पार्टी के लिए नुकसानदायक होगा।
आरक्षित वार्ड के कार्यकर्ताओं को संगठन में मिले जिम्मेदारी
ज्ञानचंद जैन ने यह भी सुझाव दिया कि जिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वार्ड आरक्षित हो गए हैं, उन्हें दूसरे वार्ड से टिकट देने के बजाय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए। ऐसे कार्यकर्ता लंबे समय से पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और उनके अनुभव का उपयोग संगठन को मजबूत करने में किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय कार्यकर्ताओं को चुनाव लड़ने का अवसर मिलने से पार्टी के भीतर विश्वास बढ़ेगा और कार्यकर्ताओं में यह संदेश जाएगा कि संगठन कठिन समय में उनके साथ खड़ा है। इससे बूथ और वार्ड स्तर पर कांग्रेस का संगठन और अधिक मजबूत होगा।
जैन ने कांग्रेस नेतृत्व से आग्रह किया कि नगरीय निकाय चुनाव में पैराशूट प्रत्याशियों और वार्ड बदलकर चुनाव लड़ने वालों के बजाय स्थानीय, समर्पित और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि “स्थानीय कार्यकर्ता, स्थानीय वार्ड” का फार्मूला कांग्रेस के लिए चुनावी रूप से अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि यह चुनाव कांग्रेस के लिए एक बड़ा अवसर है। जनता के बीच बने माहौल को टिकट वितरण की चूक के कारण कमजोर नहीं होने देना चाहिए। पार्टी नेतृत्व यदि कार्यकर्ताओं का सम्मान करते हुए स्थानीय चेहरों को अवसर देता है तो कांग्रेस नगरीय निकाय चुनाव में मजबूत जनाधार के साथ अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।
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