UCC पर दीपक बैज के बयान से गरमाई सियासत, कन्हैया सोनी का तीखा पलटवार— “आदिवासियों को डराना बंद करे कांग्रेस, BJP है हितों की सच्ची रक्षक”
बैज के आरोपों पर सोनी ने गिनाए उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और असम के उदाहरण, बोले— जहां UCC आया वहां ST समुदायों को दी गई विशेष छूट
भिलाई। प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज द्वारा UCC को लेकर आदिवासी समाज के अधिकारों, पांचवीं अनुसूची और संवैधानिक संरक्षण पर सवाल उठाए जाने के बाद भाजपा ने पलटवार किया है। भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं ओबीसी मोर्चा नेता कन्हैया सोनी ने बैज के बयान को लेकर कांग्रेस पर आदिवासी समाज में भ्रम और भय पैदा करने की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
कन्हैया सोनी ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को UCC को लेकर बयान देने से पहले उन राज्यों के कानूनों और वास्तविक प्रावधानों का अध्ययन करना चाहिए, जहां समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है या विधानसभा से पारित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकारों ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों को हमेशा प्राथमिकता दी है।
“तथ्यहीन बयान देकर राजनीतिक जमीन तलाश रही कांग्रेस”
कन्हैया सोनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार ऐसे मुद्दों को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है, जिनके वास्तविक कानूनी प्रावधान उसके आरोपों से अलग हैं। उन्होंने कहा कि UCC के नाम पर आदिवासी समाज के बीच भय पैदा करना कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि जनता अब कांग्रेस की इस राजनीति को समझ चुकी है। यही वजह है कि कांग्रेस लगातार राजनीतिक रूप से कमजोर होती जा रही है और अब ऐसे मुद्दों के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।
“पहले उन राज्यों का कानून पढ़ें, जहां UCC लागू हुआ”
कन्हैया सोनी ने कहा कि यदि UCC का उद्देश्य आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपराओं को खत्म करना होता, तो जिन राज्यों में UCC लागू हुआ या पारित हुआ है, वहां अनुसूचित जनजातियों को विशेष छूट क्यों दी जाती?
उन्होंने उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात और असम का उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों में UCC से संबंधित प्रावधानों में अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष व्यवस्था या छूट का प्रावधान किया गया है।
उत्तराखंड का उदाहरण देते हुए कांग्रेस पर निशाना
कन्हैया सोनी ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां UCC लागू किया गया। वहां अनुसूचित जनजातियों को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। ऐसे में यह कहना कि UCC के कारण आदिवासी समाज की परंपराएं और अधिकार समाप्त हो जाएंगे, वास्तविक प्रावधानों की अनदेखी करना है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों की अपनी प्रथागत व्यवस्थाओं और सामाजिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए कानून में विशेष प्रावधान किए गए हैं।
मध्य प्रदेश, गुजरात और असम का भी दिया हवाला
सोनी ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी UCC से संबंधित कानून में अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। इसी तरह गुजरात और असम में भी ST समुदायों तथा विशेष संवैधानिक संरक्षण वाले क्षेत्रों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि चार राज्यों के उदाहरण सामने हैं, जहां UCC के साथ आदिवासी समाज के लिए विशेष संरक्षण की व्यवस्था की गई है। ऐसे में छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर आदिवासी समाज के बीच डर पैदा करने की कोशिश उचित नहीं है।
क्या कहा था दीपक बैज ने?
दरअसल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने UCC को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आदिवासी समाज के अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण को लेकर सवाल उठाए थे। बैज ने कहा था कि यदि राज्य में UCC लागू किया जाता है तो आदिवासी समाज के हितों और अधिकारों का किसी भी कीमत पर हनन नहीं होना चाहिए।
उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की थी कि UCC के दायरे से आदिवासी समाज को बाहर रखा जाएगा या नहीं। बैज ने पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में पंचायतों के अधिकार, आदिवासी जमीनों, भू-राजस्व संबंधी प्रावधानों और विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय समुदायों के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए थे।
बस्तर की जमीनों के मुद्दे पर भी सियासी टकराव
दीपक बैज ने बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने के बाद आदिवासी जमीनों पर उद्योगपतियों की नजर होने का आरोप भी लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि आदिवासी हितों की कीमत पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
इन आरोपों पर भी कन्हैया सोनी ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पास जमीनों पर कब्जे या किसी तरह के राजनीतिक संरक्षण से जुड़े ठोस प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंभीर आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी के आधार पर नहीं लगाए जाने चाहिए, बल्कि उनके समर्थन में दस्तावेज और तथ्य भी सामने रखे जाने चाहिए।
“आदिवासी संस्कृति की रक्षा BJP की प्रतिबद्धता”
कन्हैया सोनी ने कहा कि भाजपा हमेशा से आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कहा कि UCC को लेकर भी कानून बनाने वाली भाजपा सरकारों ने आदिवासी समुदायों की विशिष्ट सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा है।
उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि पार्टी को वास्तव में आदिवासी समाज के अधिकारों की चिंता है तो वह राजनीतिक भय पैदा करने के बजाय UCC के वास्तविक कानूनी प्रावधानों पर चर्चा क्यों नहीं करती?
UCC पर अब तथ्य बनाम आरोप की सियासत
छत्तीसगढ़ में UCC को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के संकेत हैं। एक तरफ कांग्रेस आदिवासी अधिकार, पांचवीं अनुसूची, भूमि अधिकार और प्रथागत कानूनों के संरक्षण का मुद्दा उठा रही है। वहीं भाजपा इन राज्यों में बनाए गए UCC के प्रावधानों का हवाला देकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर रही है।
कन्हैया सोनी ने कहा कि UCC को लेकर आदिवासी समाज को भ्रमित करने के बजाय कानून के वास्तविक प्रावधानों को सामने रखकर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासी समाज के हितों और उनकी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
फिलहाल UCC को लेकर छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। दीपक बैज के सवालों के जवाब में कन्हैया सोनी का यह पलटवार आने वाले दिनों में इस मुद्दे को और राजनीतिक गर्मी दे सकता है।
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