भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग में घटनास्थल की वैज्ञानिक जांच एवं फॉरेंसिक साइंस की भूमिका पर कार्यशाला का सफल आयोजन
दुर्ग। भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के फॉरेंसिक साइंस विभाग द्वारा "सड़क यातायात दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच एवं फॉरेंसिक साइंस की भूमिका" विषय पर कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों को घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण करने, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, स्केच तैयार करने तथा प्रत्येक साक्ष्य की चेन ऑफ कस्टडी प्रक्रिया का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। घटनास्थल पर भौतिक एवं जैविक साक्ष्यों जैसे वाहन के टूटे हुए भाग, टायर के निशान, कांच के टुकड़े, पेंट चिप्स, रक्त के धब्बे, वस्त्र, बाल, जैविक नमूने तथा अन्य ट्रेस एविडेंस की पहचान, वैज्ञानिक विधियों से संग्रहण, सुरक्षित पैकेजिंग, लेबलिंग, सीलिंग एवं विधिवत अग्रेषण की संपूर्ण प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
फॉरेंसिक साइंस केवल अपराधों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में वैज्ञानिक सोच, विधिक जागरूकता तथा न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को सुदृढ़ करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साइबर अपराध, ऑनलाइन धोखाधड़ी, दस्तावेज़ जालसाजी, नशीले पदार्थों से संबंधित अपराध, लैंगिक अपराधों तथा सड़क दुर्घटनाओं जैसे मामलों में वैज्ञानिक साक्ष्यों का संरक्षण एवं उनका सही उपयोग न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे विद्यार्थियों को न केवल एक कुशल फॉरेंसिक विशेषज्ञ बनने में सहायक हैं, बल्कि उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार एवं जागरूक नागरिक बनने की प्रेरणा भी प्रदान करती हैं। वैज्ञानिक साक्ष्य विश्लेषण के प्रभावी उपयोग से पुलिस एवं अन्य अन्वेषण एजेंसियों को जांच प्रक्रिया में नवीन दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है। इससे अपराधों की विवेचना अधिक वैज्ञानिक, सटीक एवं साक्ष्य-आधारित बन सकेगी तथा जांच की गुणवत्ता और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को और अधिक सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग के कुलसचिव डॉ. वीरेन्द्र कुमार स्वर्णकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि फॉरेंसिक साइंस जैसे व्यावहारिक विषय में इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल एवं आत्मविश्वास को बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। फॉरेंसिक साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष जयंत बारीक ने बताया कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी सिद्ध हुई तथा सभी प्रतिभागियों ने इसे फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट व्यावहारिक शिक्षण अनुभव बताया। उक्त कार्यक्रम में विभाग के सहायक प्राध्यापक सूरज कुमार मुदुली, निकिता साहू, भूमिका साहू, एलिसिया रेचल एलेक्स एवं अश्विनी तायड़े का विशेष सहयोग रहा।
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