प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत तीन माह में शुरू होगा संचालन, रायपुर को करना होगा करीब एक साल का इंतजार
रायपुर/दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठने जा रहा है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत राज्य में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन सबसे पहले दुर्ग-भिलाई से शुरू होगा। इसके बाद बिलासपुर और रायपुर में ई-बस सेवा शुरू की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक दुर्ग-भिलाई में आवश्यक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और अगले तीन माह के भीतर बसें सड़कों पर दौड़ने लगेंगी।
हालांकि राजधानी रायपुर के यात्रियों को अभी करीब एक साल तक इंतजार करना पड़ सकता है। यहां ई-बसों के लिए डिपो, चार्जिंग स्टेशन और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण अभी अधूरा है।
240 इलेक्ट्रिक बसों को मिली मंजूरी
प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत सितंबर 2024 में छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख शहरों के लिए 240 इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई थी। इनमें—
* रायपुर – 100 बसें
* बिलासपुर – 50 बसें
* Instruction – 50 बसें
* कोरबा – 40 बसें
आवंटन के डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद अब तक प्रदेश के किसी भी शहर में ई-बस सेवा शुरू नहीं हो सकी है। जबकि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के इंदौर समेत कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसें पहले से संचालित हो रही हैं।
दुर्ग-भिलाई में तैयारियां पूरी
सूडा के अधिकारियों के अनुसार दुर्ग-भिलाई में बस संचालन के लिए एजेंसी का चयन कर लिया गया है और डिपो सहित आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी तैयार हैं। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा तो अगले तीन महीने में यात्रियों को आधुनिक और प्रदूषण मुक्त ई-बस सेवा मिलने लगेगी।
रायपुर में सिर्फ 25 प्रतिशत काम
राजधानी रायपुर में जरवाय क्षेत्र में लगभग दो हेक्टेयर भूमि पर ई-बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। लेकिन अब तक केवल 25 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूरा हो पाया है। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली कनेक्शन और अन्य व्यवस्थाएं पूरी होने में अभी समय लगेगा।
पुरानी सिटी बसें बनीं कबाड़
कोरोना महामारी से पहले प्रदेश के नौ शहरों में 378 सिटी बसें संचालित होती थीं। लंबे समय तक संचालन बंद रहने के कारण 272 बसें कबाड़ में तब्दील हो गईं। वर्तमान में केवल 106 बसें बची हैं, जिनमें भी रोजाना सिर्फ 70 से 80 बसें ही सड़कों पर उतरती हैं।
दुर्ग-भिलाई और जगदलपुर में फिलहाल एक भी सिटी बस संचालित नहीं हो रही है। वहीं रायपुर में पहले 67 बसें चलती थीं, लेकिन अब 32 बसें कबाड़ हो चुकी हैं। इसका सीधा असर आम यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है, जिन्हें निजी वाहनों और महंगे परिवहन साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
प्रदूषण घटाने और सार्वजनिक परिवहन को मिलेगा बढ़ावा
ई-बस सेवा शुरू होने से शहरों में प्रदूषण कम होगा, डीजल पर निर्भरता घटेगी और लोगों को सस्ती, सुरक्षित व आधुनिक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। राज्य सरकार और सूडा का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से सभी स्वीकृत शहरों में ई-बसों का संचालन शुरू करना है।
सूडा के सीईओ सुमित अग्रवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत प्रक्रिया जारी है। दुर्ग-भिलाई में आवश्यक तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, जबकि रायपुर में डिपो और अन्य आधारभूत ढांचे का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।
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