Sawan Somwar 2026: रायपुर के स्वयंभू नरहरेश्वर महादेव, जहां दर्शन मात्र से पूरी होती है हर मनोकामना
रायपुर। सावन का पहला सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ दिनों में माना जाता है। तीन अगस्त को पहले सावन सोमवार के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इसी कड़ी में अमर उजाला की विशेष श्रृंखला 'छत्तीसगढ़ के शिवालय' में आज बात रायपुर के ऐतिहासिक और चमत्कारी नरहरेश्वर महादेव मंदिर की, जिसकी पहचान एक जागृत और स्वयंभू शिवधाम के रूप में है।
करीब 600 साल से अधिक प्राचीननइस मंदिर की धार्मिक मान्यता पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां विराजमान शिवलिंग स्वयंभू है और सच्चे मन से भगवान शिव के दर्शन व पूजा करने वाले भक्त की हर मनोकामना पूरी होती है। कहा जाता है कि जो भी श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
घने जंगल में स्वयं प्रकट हुए थे भोलेनाथ
रायपुर के सिद्धार्थ चौक के समीप दो तालाबों के बीच स्थित नरहरेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बेहद रोचक है। वेद-पुराणों और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर आज मंदिर स्थित है, वहां सदियों पहले घना जंगल हुआ करता था। इसी स्थान पर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए थे। बाद में यहां शिवलिंग की पूजा शुरू हुई और समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन गया।
इतिहासकारों के अनुसार करीब 200 वर्ष पहले तक यहां बहुत कम लोग दर्शन के लिए आते थे, लेकिन धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैल गई। आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। अनेक भक्त बीमारी, पारिवारिक संकट, रोजगार, संतान सुख और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहां विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
150 साल पहले बना वर्तमान मंदिर
मौजूदा मंदिर का निर्माण लगभग 150 वर्ष पहले कराया गया था। मंदिर परिसर में स्वयंभू शिवलिंग के अलावा भगवान गणेश, सूर्यनारायण, वीरभद्र और माता पार्वती की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और चांदी के भव्य श्रृंगार का आयोजन होता है। दूध, जल, बेलपत्र और विभिन्न पुष्पों से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है।
सावन में चलता है एक माह का अखंड रामायण पाठ
नरहरेश्वर महादेव मंदिर में सावन का महीना विशेष धार्मिक आयोजनों के लिए जाना जाता है। यहां गुरु पूर्णिमा से रक्षाबंधन के दूसरे दिन तक लगातार एक माह अखंड रामायण पाठ का आयोजन होता है। प्रत्येक सावन सोमवार को भगवान शिव का विशेष चांदी का श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर पूरे सावन माह में शिव भजनों, मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजता रहता है।
एक ही परिसर में छह प्रमुख मंदिर
मंदिर के पुजारी पंडित देवचरण शर्मा के अनुसार नरहरेश्वर महादेव एक जागृत देवस्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं भगवान शिव की कृपा से पूरी होती हैं। उन्होंने बताया कि नरहरेश्वर महादेव के नाम पर ही पास स्थित 'नरैया तालाब' का नाम पड़ा।
मंदिर परिसर में भगवान शिव के अलावा भगवान गणेश, राम दरबार, राधा-कृष्ण, हनुमान जी, मां काली, संतोषी माता, दुर्गा माता सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं। यही कारण है कि श्रद्धालु एक ही स्थान पर कई देवी-देवताओं के दर्शन का पुण्य प्राप्त करते हैं।
आस्था का जीवंत केंद्र
सदियों पुरानी परंपरा, स्वयंभू शिवलिंग की मान्यता और सावन में होने वाले विशेष धार्मिक आयोजनों के कारण नरहरेश्वर महादेव मंदिर आज रायपुर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है। सावन सोमवार के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धा इस बात का प्रमाण है कि भगवान भोलेनाथ के प्रति लोगों की आस्था आज भी उतनी ही अटूट है, जितनी सदियों पहले थी।
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