PM आवास पर सियासी महासंग्राम: भूपेश बघेल और विजय शर्मा आमने-सामने, आरोप-प्रत्यारोप के बीच ‘ग्रोk’ का जिक्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ की सियासत में मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के दो बड़े चेहरे एक ही मंच पर आमने-सामने बैठे। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच पीएम आवास योजना को लेकर करीब 1 घंटे 20 मिनट तक तीखी बहस हुई। दोनों नेताओं ने अपने-अपने दावों के समर्थन में आंकड़े पेश किए और एक-दूसरे के आरोपों का जवाब दिया।
रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित इस ओपन डिबेट को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था। प्रधानमंत्री आवास योजना लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव का मुद्दा रही है। भाजपा सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि बताती है, वहीं कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि उसके शासनकाल में केंद्र से पर्याप्त राशि नहीं मिलने के कारण बड़ी संख्या में आवास अधूरे रह गए।
डिबेट की शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वीकृत और पूर्ण किए गए आवासों के आंकड़े सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के दौरान करीब 6 लाख 97 हजार आवास स्वीकृत किए गए थे। बघेल ने कहा कि 2018 में 3 लाख 48 हजार 960 घर स्वीकृत हुए, जिनमें से 1 लाख 39 हजार मकान पूर्ण हुए। वहीं 2020-21 में 1 लाख 97 हजार 811 आवासों का लक्ष्य था और 1 लाख 22 हजार आवास पूरे किए गए।
भूपेश बघेल ने कोरोना काल का हवाला देते हुए कहा कि उस समय आर्थिक स्थिति बेहद कठिन थी और किसी भी सरकार के पास पर्याप्त पैसा नहीं था। उन्होंने दावा किया कि आवास निर्माण के लिए राज्य सरकार को RBI से भी लोन लेना पड़ा था। बघेल ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि जारी नहीं की और पोर्टल भी बंद कर दिया गया था।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने केंद्र से अपना पैसा मांगा और इसके लिए लगातार पत्राचार किया गया। बघेल के मुताबिक 2011 की जनगणना के आधार पर प्रदेश में करीब 18 लाख आवासों की जरूरत थी, जिनमें से कांग्रेस सरकार ने बड़ी संख्या में आवास स्वीकृत किए।
वहीं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भूपेश बघेल के दावों पर जोरदार पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़े किसी राजनीतिक दावे पर नहीं, बल्कि भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित हैं। विजय शर्मा ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में 17 लाख 75 हजार आवास पूर्ण किए जा चुके हैं और इसके आंकड़े भारत सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
विजय शर्मा ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ ने देश में सर्वाधिक प्रधानमंत्री आवास बनाए हैं। उन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि पांच वर्षों में वित्तीय स्वीकृति करीब 3,900 करोड़ रुपये की थी और उस दौरान लगभग 3 लाख आवास पूर्ण हुए, जबकि भाजपा सरकार ने ढाई वर्ष में करीब 16 हजार करोड़ रुपये खर्च किए हैं।
डिबेट के दौरान पोर्टल बंद होने के मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच सीधा टकराव देखने को मिला। भूपेश बघेल ने कहा कि कोरोना काल में केंद्र ने राशि जारी नहीं की और प्रधानमंत्री आवास का पोर्टल बंद था। इसके जवाब में विजय शर्मा ने कहा कि पोर्टल बंद होने की बात गलत है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में भी राशि आ रही थी और असली विषय पोर्टल का नहीं, बल्कि तत्कालीन सरकार के रुख का था।
विजय शर्मा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर कहा था कि प्रधानमंत्री का नाम है तो प्रधानमंत्री ही जाने और पूरी राशि राज्य सरकार अपनी तरफ से देगी। उन्होंने कहा कि लोगों को बरगलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए और आंकड़ों के आधार पर बात होनी चाहिए।
इसी दौरान विजय शर्मा ने भूपेश बघेल के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि ‘ग्रोk’ से पूछिए, सच सामने आ जाएगा। इस बयान के बाद डिबेट का यह हिस्सा राजनीतिक चर्चा का प्रमुख केंद्र बन गया।
भूपेश बघेल ने जवाब देते हुए कहा कि सही क्या है और कौन सच बोल रहा है, इसका फैसला पत्रकार और जनता खुद कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि 25 सितंबर 2023 से दिसंबर 2024 तक 18 लाख मकान स्वीकृत किए गए।
विजय शर्मा ने कहा कि राज्य की साय सरकार ने 18 लाख प्रधानमंत्री आवास बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि 2024-25 में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को 10 लाख 42 हजार 797 आवास दिए, जबकि राज्य सरकार ने 10 लाख 26 हजार 586 आवास लिए। उन्होंने कहा कि केंद्र में दोबारा भाजपा सरकार बनने के बाद 2 करोड़ आवास बनाने का संकल्प लिया गया और इसकी किस्त भी जारी की गई।
डिबेट के दौरान विजय शर्मा ने कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री टीएस सिंहदेव के पुराने पत्र और इस्तीफे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि टीएस सिंहदेव ने स्वयं लिखा था कि राशि नहीं मिलने की वजह से प्रधानमंत्री आवास नहीं बन पाए और इसी कारण उन्होंने इस्तीफा देने की बात कही थी।
इस पर भूपेश बघेल ने दोहराया कि कोरोना काल में केंद्र सरकार ने राज्य को प्रधानमंत्री आवास के लिए राशि जारी नहीं की थी।
करीब 80 मिनट तक चली इस बहस में दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखे सवाल-जवाब हुए। हालांकि दोनों पक्ष अपने-अपने आंकड़ों और दावों को सही बताते रहे। इस पूरी बहस का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यही रहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना अब एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गई है।
प्रेस क्लब में अव्यवस्था पर भी नाराजगी
डिबेट के दौरान रायपुर प्रेस क्लब में बैठने की व्यवस्था को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी। जगह नहीं मिलने से कुछ पत्रकार नाराज हो गए और उन्होंने मंच के सामने पहुंचकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस नेता शैलेश त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं को प्रेस क्लब के भीतर प्रवेश दिया गया, जबकि कांग्रेस नेताओं को बलपूर्वक रोका गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पीएम आवास पर भूपेश बघेल और विजय शर्मा की आमने-सामने बहस ने छत्तीसगढ़ की सियासत में नया राजनीतिक तापमान पैदा कर दिया है। अब दोनों पक्षों के आंकड़ों और दावों की सच्चाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
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