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वर्षा ऋतु में मछलियों की प्रजनन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए जिले में 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक बंद ऋतु यानी क्लोज सीजन घोषित कर दिया गया है।

वर्षा ऋतु में मछलियों की प्रजनन प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए जिले में 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक बंद ऋतु यानी क्लोज सीजन घोषित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम के तहत लागू इस प्रतिबंध के दौरान जिले के सभी नदी-नाले, तालाब और जलाशयों में किसी भी प्रकार का मत्स्याखेट पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सहायक संचालक मछली पालन विभाग ने आदेश जारी कर मछुआरों और व्यापारियों को कड़े निर्देश दिए हैं।

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वर्षा ऋतु मछलियों के अंडे देने और वंश वृद्धि का समय होता है। इस दौरान मछली पकड़ने से मछलियों की संख्या तेजी से घट रही थी और जल स्रोतों में जैव विविधता पर असर पड़ रहा था। इसी को रोकने के लिए शासन ने हर साल 16 जून से 15 अगस्त तक दो माह का बंद सीजन घोषित करने का प्रावधान किया है। इस अवधि में मछलियां बिना किसी बाधा के प्रजनन कर सकेंगी, जिससे आने वाले समय में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा और मछुआरों को दीर्घकालिक फायदा होगा।

मुकेश
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विभाग के अनुसार यह प्रतिबंध जिले के सभी नदी-नालों और उनसे जुड़े तालाबों व जलाशयों पर लागू होगा। हालांकि जिन छोटे तालाबों या जल स्रोतों का किसी नदी-नाले से सीधा संबंध नहीं है, वे इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।

खाटू श्याम
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 इसके साथ ही जिन जलाशयों में केज कल्चर यानी पिंजरा पद्धति से मछली पालन किया जा रहा है, उन पर भी यह नियम लागू नहीं होगा। अन्य सभी जल संसाधनों में जाल डालना, मछली पकड़ना, खरीद-बिक्री और परिवहन पूरी तरह बंद रहेगा।

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सहायक संचालक ने बताया कि बंद ऋतु के नियमों का उल्लंघन करने पर छत्तीसगढ़ राज्य मत्स्य क्षेत्र अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अपराध सिद्ध होने पर दोषी व्यक्ति या समूह से 25 हजार रुपये तक का जुर्माना वसूला जाएगा। जाल, नाव और अन्य उपकरण भी जब्त किए जा सकते हैं। मत्स्य विभाग की टीम नदी-नालों और जलाशयों में लगातार गश्त करेगी और औचक जांच करेगी। 

सीजू एंथोनी
अलताब
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विभाग ने जिले के सभी मछुआरा समितियों और मत्स्य पालकों से अपील की है कि वे बंद ऋतु का पालन करें। प्रजनन काल में मछलियों को संरक्षण देने से ही भविष्य में अच्छी पैदावार मिलेगी। विभाग ने आम नागरिकों से भी सहयोग मांगा है। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधित अवधि में मछली पकड़ते या बेचते हुए दिखे तो तुरंत मत्स्य विभाग या नजदीकी थाने में सूचना दें। प्रशासन का मानना है कि मछलियों के संरक्षण के लिए यह सख्त कदम जरूरी था। दो माह का संयम आने वाले वर्षों में जिले को मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगा।