छत्तीसगढ़ को बड़ा झटका: 5 नए मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर NMC की रोक, स्वास्थ्य मंत्री बोले- ‘अभी मैच खत्म नहीं हुआ’
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के विस्तार को बड़ा झटका लगा है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने राज्य के पांच नए मेडिकल कॉलेजों को मान्यता देने के प्रस्ताव पर फिलहाल रोक लगा दी है। प्रभावित कॉलेजों में दंतेवाड़ा, कवर्धा, कुनकुरी, जांजगीर-चांपा और मनेंद्रगढ़ के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। इस फैसले से राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की योजना पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि राज्य सरकार ने इस फैसले को अंतिम मानने से इनकार किया है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भरोसा जताते हुए कहा कि सरकार जल्द ही इस निर्णय के खिलाफ अपील करेगी और प्रयास रहेगा कि इसी शैक्षणिक सत्र से इन कॉलेजों में पढ़ाई शुरू हो सके।
‘अभी मैच खत्म नहीं हुआ’, मंत्री ने जताया भरोसा
मेडिकल कॉलेजों की मान्यता पर लगी रोक के बाद स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार को एनएमसी के फैसले की जानकारी मिली है, लेकिन यह अंतिम स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत सरकार के पास अपील का अधिकार है और अगले 15 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेजों एवं तथ्यों के साथ पुनर्विचार की मांग की जाएगी।
मंत्री ने कहा, “अभी मैच खत्म नहीं हुआ है। हमें पूरा विश्वास है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी और इन मेडिकल कॉलेजों में इसी शिक्षा सत्र से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी।”
क्या हो सकते हैं रोक के कारण?
हालांकि एनएमसी की ओर से विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि मेडिकल कॉलेजों की मान्यता के लिए निर्धारित मानकों में कुछ कमियां पाई गई होंगी। इनमें फैकल्टी की उपलब्धता, अस्पतालों में बेड क्षमता, चिकित्सा उपकरण, प्रयोगशालाएं, भवन निर्माण, शिक्षण संसाधन और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
एनएमसी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और एमबीबीएस सीटों की स्वीकृति के लिए सख्त मानकों का पालन कराता है। ऐसे में किसी भी कमी के पाए जाने पर मान्यता या अनुमति प्रक्रिया को रोका जा सकता है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
मेडिकल कॉलेजों के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं के दिमाग से अभी भी कमीशनखोरी की राजनीति खत्म नहीं हुई है। मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में हुए कथित रीजेंट घोटाले और अन्य वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने कांग्रेस शासनकाल में किए गए कई संदिग्ध भुगतानों की समीक्षा कर कार्रवाई की है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक जांच कराई जा रही है। मंत्री के अनुसार वर्तमान सरकार ने पिछली सरकार की तुलना में कई गुना अधिक मामलों की जांच कराई है।
अमानक दवाओं पर भी सरकार सख्त
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए अमानक और घटिया दवाओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं ताकि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
मेडिकल शिक्षा विस्तार की योजना को झटका
राज्य सरकार इन पांच नए मेडिकल कॉलेजों के जरिए प्रदेश में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है। ऐसे में एनएमसी की रोक से फिलहाल योजनाओं को झटका जरूर लगा है, लेकिन सरकार का दावा है कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर जल्द ही अनुमति हासिल कर ली जाएगी।
अब सभी की नजर राज्य सरकार की अपील और एनएमसी के अगले फैसले पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि इन पांच मेडिकल कॉलेजों में इस साल से पढ़ाई शुरू हो पाएगी या नहीं।











