SAIL की 2008 पॉलिसी में बड़े बदलाव का श्रेय भाजपा नेताओं को, भिलाई चैंबर ने विजय बघेल और प्रेम प्रकाश पांडे के प्रयासों को बताया निर्णायक
14 साल पुराने विवाद पर मिली राहत; सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं को फायदा, व्यापारियों की लंबित मांगों के समाधान की उम्मीद बढ़ी
भिलाई। भारतीय इस्पात प्राधिकरण (SAIL) की ओर से 15 मई 2026 को आयोजित बोर्ड बैठक में वर्ष 2008 की विवादित पॉलिसी को वापस लेने और उसमें महत्वपूर्ण संशोधन किए जाने के बाद इसका राजनीतिक असर भी दिखाई देने लगा है। भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने इस बदलाव का श्रेय दुर्ग लोकसभा सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे को देते हुए उनके प्रयासों को स्थानीय हितों की बड़ी जीत बताया है।
चैंबर अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने कहा कि SAIL के फैसले से भिलाई सहित देश के सभी इस्पात संयंत्रों के अंतर्गत आने वाली सामाजिक, धार्मिक और चैरिटेबल संस्थाओं को बड़ी राहत मिली है। नई व्यवस्था के तहत इन संस्थाओं को टोकन राशि पर नवीनीकरण का अवसर मिलेगा। वहीं 50 लाख रुपये से अधिक टर्नओवर वाले शैक्षणिक संस्थानों को 10 प्रतिशत राशि जमा कर नवीनीकरण कराने की सुविधा दी गई है।
ज्ञानचंद जैन ने कहा कि यह फैसला वर्षों से चली आ रही मांगों और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने बताया कि भिलाई स्टील सिटी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने व्यापारियों के साथ-साथ सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं को भी अपने अभियान से जोड़ा था और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार जनप्रतिनिधियों एवं प्रबंधन के समक्ष मामला उठाया जाता रहा।
चैंबर का दावा है कि पिछले 14 वर्षों से व्यापारी वर्ग वर्ष 2008 की पॉलिसी का विरोध कर रहा था। इस दौरान दुकानदारों को डिफाल्टर श्रेणी से बाहर निकालने और स्थानीय निवासियों के समान अधिकार देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाती रही। अब पॉलिसी में हुए बदलाव के बाद व्यापारियों को भी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
हालांकि चैंबर का कहना है कि अभी कई मुद्दों का समाधान बाकी है। विशेष रूप से प्रीमियम राशि की 25 प्रतिशत मांग और पुराने बकाया पर लगाए गए ब्याज को लेकर व्यापारी वर्ग असंतुष्ट है। ज्ञानचंद जैन ने कहा कि जब स्वयं SAIL ने 2008 की पॉलिसी को विसंगतिपूर्ण मानते हुए निरस्त कर दिया है, तब दुकानदारों के साथ हुए मूल लीज पंजीयन को आधार मानकर आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए और ब्याज को समाप्त किया जाना चाहिए।
चैंबर ने उम्मीद जताई है कि स्थानीय स्तर पर जारी होने वाले सर्कुलर के बाद शेष समस्याओं के समाधान की दिशा भी स्पष्ट होगी। संगठन का मानना है कि पॉलिसी में अभी लगभग 50 प्रतिशत सुधार की आवश्यकता है और इसके लिए स्थानीय अधिकारियों के पास पर्याप्त अधिकार मौजूद हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चैंबर ने सांसद विजय बघेल और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे की भूमिका को निर्णायक बताते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और प्रयासों के कारण ही यह विषय राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठ सका। संगठन ने केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, SAIL अध्यक्ष अशोक पांडा और भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन के प्रति भी आभार व्यक्त किया है।
इसी विषय पर आगे की रणनीति तय करने और जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए 14 जून को इंडियन कॉफी हाउस सभागार में सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक संस्थाओं तथा व्यापारियों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है। चैंबर का कहना है कि यह केवल नीति परिवर्तन नहीं, बल्कि स्थानीय हितों के लिए लंबे समय से चल रहे संघर्ष की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धि है।











