सट्टे के कर्ज ने निगल लिया पूरा परिवार: रायपुर सामूहिक आत्महत्या कांड में सनसनीखेज खुलासे, 16 लाख का कर्ज और दो रहस्यमयी नंबरों ने बढ़ाई जांच की गुत्थी
रायपुर। राजधानी रायपुर के संजय नगर में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत का मामला अब कई चौंकाने वाले खुलासों के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआत में सामूहिक आत्महत्या के तौर पर सामने आए इस मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आर्थिक तंगी, आईपीएल सट्टेबाजी, लाखों रुपये के कर्ज और घटना से पहले हुई संदिग्ध फोन कॉल्स की परतें खुलती जा रही हैं। विशेष जांच दल (एसआईटी) अब इस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में जुटा हुआ है।
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार के मुखिया साजिद अली लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। पुलिस को मिले तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों से संकेत मिले हैं कि वह आईपीएल सट्टेबाजी में बड़ी रकम हार चुका था। हालात इतने बिगड़ चुके थे कि उसने बाजार से करीब 16 लाख रुपये ऊंचे ब्याज पर उधार लिए थे। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के कारण उस पर लगातार दबाव बढ़ता गया और कर्जदाता कई बार उसके घर तक पहुंचकर रकम वापस करने का दबाव बना रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि साजिद पिछले लगभग एक वर्ष से अपने बैटरी निर्माण के व्यवसाय से दूर था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उसका कारोबार बंद था, तब परिवार का खर्च आखिर किस तरह चल रहा था? पुलिस अब उसके बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और मोबाइल रिकॉर्ड को खंगाल रही है। जांच में आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़े कई वित्तीय लेन-देन के संकेत भी मिले हैं, जिससे सट्टेबाजी के एंगल को और बल मिला है।
घटना की टाइमलाइन भी कई सवाल खड़े कर रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार, साजिद ने कथित तौर पर पहले अपनी पत्नी राबिया, बेटे इरशाद और दोनों बेटियों शाहिदा बेगम तथा इरशाबा परवीन को जहर दिया। इसके बाद वह करीब नौ घंटे तक घर में मौजूद रहा और बाद में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। हालांकि पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम की वैज्ञानिक और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि करने में जुटी हुई है।
इस मामले में सबसे रहस्यमयी पहलू दो मोबाइल नंबरों का सामने आना है। तकनीकी जांच के दौरान साजिद के मोबाइल फोन से ऐसे दो नंबर मिले हैं, जिनसे घटना से पहले लगातार बातचीत हुई थी। बताया जा रहा है कि 17 जुलाई की रात भी उसकी इन नंबरों पर बातचीत हुई थी, जबकि अगले दिन पूरे परिवार के शव घर में मिले। हैरानी की बात यह है कि घटना के बाद से दोनों मोबाइल नंबर बंद हैं। पुलिस अब इन नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी हुई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इन नंबरों का संबंध कर्ज के लेन-देन, सट्टेबाजी के नेटवर्क या किसी अन्य आर्थिक विवाद से था। यह भी जांच का विषय है कि कहीं साजिद किसी बड़े सट्टेबाजी गिरोह या वित्तीय जाल में तो नहीं फंस गया था।
रायपुर का यह सामूहिक आत्महत्या कांड अब केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं रह गया है, बल्कि इसके पीछे आर्थिक अपराध, अवैध सट्टेबाजी और कर्ज के दबाव जैसी गंभीर सामाजिक समस्याओं की आशंका भी सामने आ रही है। पांच जिंदगियों के खत्म होने के बाद कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब पूरे प्रदेश को इंतजार है।
फिलहाल, एसआईटी मामले के हर पहलू की गहन जांच कर रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट, बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और संदिग्ध कॉल्स की जांच आने वाले दिनों में इस दर्दनाक घटना की असली वजह से पर्दा उठा सकती है। यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि अवैध सट्टेबाजी और कर्ज का जाल किस तरह एक पूरे परिवार की जिंदगी को तबाह कर सकता है।
देश और दुनिया की हर बड़ी खबर का तुरंत अपडेट पाने के लिए नोटिफिकेशन ऑन करें।