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भक्ति और भावनाओं में डूबा भिलाई: परशुराम जन्मोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, हनुमान चालीसा के साथ विकास कार्यों का भूमिपूजन

 

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भिलाई। खुर्सीपार स्थित परशुराम चौक में भगवान परशुराम का जन्मोत्सव इस वर्ष गहरी श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। पूरा क्षेत्र आस्था के रंग में सराबोर नजर आया, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ने कार्यक्रम को एक आध्यात्मिक महापर्व का स्वरूप दे दिया। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से वातावरण भक्तिमय हो उठा और हर ओर “जय परशुराम” के जयघोष गूंजते रहे।

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कार्यक्रम के दौरान न केवल धार्मिक अनुष्ठान हुए, बल्कि समाज के विकास को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण कार्यों का भी भूमिपूजन किया गया। पूजन-अर्चना का विधिवत संचालन श्री श्री 1008 श्री रामबालक दास महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ, जिन्होंने भगवान परशुराम के जीवन और उनके आदर्शों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए समाज को धर्म, संस्कृति और मर्यादा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।

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इस अवसर पर एक विशाल डोम शेड निर्माण की घोषणा की गई, जो भविष्य में सनातन धर्मावलंबी परिवारों के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों के लिए निःशुल्क उपलब्ध रहेगा। साथ ही जी.ई. रोड से परशुराम चौक तक भव्य परशुराम द्वार, पावर हाउस चौक के समीप सर्वसुविधायुक्त यात्री प्रतीक्षालय तथा पहुंच मार्ग के निर्माण कार्य का भूमिपूजन भी किया गया। इन घोषणाओं ने उपस्थित लोगों में उत्साह और गर्व की भावना भर दी।

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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे ने समाज में शिक्षा, संगठन और जागरूकता को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी कमियों को दूर कर एकजुट होकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है, तभी सनातन मूल्यों की सच्ची स्थापना संभव है।

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कार्यक्रम के आयोजक एवं परशुराम सेवा समिति के अध्यक्ष पीयूष मिश्रा ने बताया कि जिस मार्ग को पहले कैनाल रोड के नाम से जाना जाता था, उसे अब समाज के सामूहिक प्रयासों से “परशुराम मार्ग” के रूप में शासकीय अभिलेखों में दर्ज कराया गया हैं। यह निर्णय समाज के लिए गर्व का विषय है और उनकी पहचान को नई मजबूती देगा।

कार्यक्रम में प्रभुनाथ मिश्रा ने समाज को संगठित एवं एकजुट रहने का संदेश दिया।

राममिलन दुबे, के.एल. तिवारी, शशिकांत तिवारी, सुमित शर्मा सहित ब्राह्मण समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने समाज की एकता और संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया।

रात में आयोजित भजन संध्या ने कार्यक्रम को और भी भावपूर्ण बना दिया। भक्ति गीतों की मधुर धुनों पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।

यह आयोजन न केवल एक धार्मिक उत्सव रहा, बल्कि समाज की एकजुटता, आस्था और विकास की भावना का जीवंत उदाहरण भी बन गया।