तीन जजों की विदाई से पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मजबूती
ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा का तबादला प्रस्तावित, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश; लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी की उम्मीद
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था को और मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ओडिशा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा का छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तबादला करने की सिफारिश की है। कॉलेजियम की यह सिफारिश ऐसे समय में सामने आई है, जब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आने वाले दो महीनों के दौरान चीफ जस्टिस समेत तीन न्यायाधीश सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे में नए न्यायाधीश के प्रस्तावित तबादले को हाईकोर्ट की न्यायिक क्षमता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा के आने से न केवल न्यायाधीशों की संख्या में संभावित कमी की भरपाई में मदद मिलेगी, बल्कि लंबित मामलों की सुनवाई और निपटारे को भी गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, कॉलेजियम की सिफारिश के बाद अभी नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।
6 अगस्त की कॉलेजियम बैठक में अहम सिफारिश
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में 6 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक आयोजित हुई। बैठक में देश के विभिन्न हाईकोर्टों में न्यायाधीशों के तबादले और मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गईं।
इसी बैठक में ओडिशा हाईकोर्ट के जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और जस्टिस मानस रंजन पाठक को गुजरात हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई।
कॉलेजियम की सिफारिशों का उद्देश्य विभिन्न हाईकोर्टों में न्यायिक संसाधनों का बेहतर संतुलन बनाए रखना और न्यायिक कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करना भी माना जाता है।
तीन न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति से बनेगी चुनौती
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में वर्तमान में चीफ जस्टिस सहित कुल 13 न्यायाधीश कार्यरत हैं। आने वाले समय में न्यायाधीशों की संख्या में कमी आने की संभावना है। जस्टिस संजय एस. अग्रवाल, जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल और चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा अगले दो महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
एक साथ तीन न्यायाधीशों के सेवानिवृत्त होने से हाईकोर्ट पर लंबित मामलों के निपटारे का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में जस्टिस मोहपात्रा के तबादले की सिफारिश को समय की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।
नए न्यायाधीश के आने से मामलों की सुनवाई के लिए उपलब्ध न्यायिक क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न पीठों में मामलों के वितरण को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है।
कौन हैं जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा?
जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा का जन्म 18 अप्रैल 1965 को हुआ था। उनका परिवार न्यायिक पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है। उनके पिता सरत चंद्र मोहपात्रा भी न्यायाधीश रह चुके हैं। इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण उन्हें कानून और न्यायिक क्षेत्र की समझ प्रारंभ से मिली।
उन्होंने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसके बाद 7 फरवरी 1988 को ओडिशा स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया।
लगभग 26 वर्षों तक उन्होंने वकालत की। इस दौरान उन्होंने सिविल, आपराधिक, सेवा और संवैधानिक मामलों में अदालत के समक्ष पक्ष रखा। लंबे समय तक विभिन्न प्रकार के मामलों की पैरवी करने के कारण उन्हें कानून के अलग-अलग क्षेत्रों में व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
परिवार और किशोर न्याय से जुड़े मामलों में विशेषज्ञता
जस्टिस मोहपात्रा को विशेष रूप से परिवार और बच्चों से जुड़े कानूनों के मामलों में अनुभव रहा है। उन्होंने अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम, हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, हिंदू दत्तक ग्रहण एवं भरण-पोषण अधिनियम तथा किशोर न्याय अधिनियम से जुड़े मामलों में काम किया है।
इन कानूनों से जुड़े मामलों में बच्चों की अभिरक्षा, संरक्षकता, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण और किशोर न्याय से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न सामने आते हैं।
सरकार और बड़े संस्थानों की ओर से भी की पैरवी
वकालत के दौरान जस्टिस मोहपात्रा ने ओडिशा सरकार और ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं।
इसके अलावा उन्होंने कई सरकारी एवं सार्वजनिक संस्थानों की ओर से भी अदालत में पैरवी की। इनमें सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (NIOS), नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड और बैंक ऑफ बड़ौदा सहित अन्य संस्थान शामिल रहे।
इस व्यापक कानूनी अनुभव के कारण उन्हें विभिन्न प्रकृति के मामलों को समझने और उन पर न्यायिक दृष्टिकोण विकसित करने का लंबा अनुभव प्राप्त है।
अन्य हाईकोर्टों को लेकर भी कॉलेजियम की बड़ी सिफारिशें
6 अगस्त की बैठक में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य हाईकोर्टों के लिए भी महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं।
कॉलेजियम ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस वी. कामेश्वर राव को पटना हाईकोर्ट,बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस रविंद्र वी. घुगे को कलकत्ता हाईकोर्ट तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी को बॉम्बे हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश की है।
वहीं पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को उसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की अनुशंसा की गई है।
लंबित मामलों के निपटारे पर रहेगा फोकस
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। न्यायाधीशों की उपलब्धता किसी भी हाईकोर्ट में मामलों के निपटारे की गति को सीधे प्रभावित करती है। ऐसे में एक ओर जहां तीन न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति होने वाली है, वहीं दूसरी ओर नए न्यायाधीश के तबादले की सिफारिश को न्यायिक व्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा के आने के बाद लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी, न्यायिक कार्यों के बेहतर वितरण और मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद की जा रही है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश है। नियुक्ति की आगे की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही जस्टिस मोहपात्रा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में औपचारिक रूप से पदभार संभालेंगे।
न्यायिक व्यवस्था के लिए अहम समय
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक साथ तीन न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति और नए न्यायाधीश के तबादले की सिफारिश के बीच आने वाले महीने न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। जस्टिस कृष्णा राम मोहपात्रा का लंबा वकालती अनुभव और न्यायिक पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। अब निगाहें उनकी नियुक्ति की आगामी औपचारिक प्रक्रिया और पदभार ग्रहण पर टिकी हैं।
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