सेफी ने केन्द्रीय वित्त मंत्री से सी.पी.एस.ई. के अधिकारियों हेतु चतुर्थ वेतन संशोधन समिति (पीआरसी) के शीघ्र गठन हेतु किया अनुरोध
सेफी चेयरमेन एवं कार्यकारी अध्यक्ष, नेशनल कांफिडरेशन आफ आफिसर्स एसोसिएशन, नरेन्द्र कुमार बंछोर ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) के अधिकारियों हेतु चतुर्थ वेतन संशोधन समिति (पीआरसी) के शीघ्र गठन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को पत्र लिखकर किया अनुरोध।
विदित हो कि यह एक स्थापित एवं प्रगतिशील परंपरा रही है कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में बोर्ड स्तर तथा बोर्ड स्तर से नीचे के कार्यपालक अधिकारियों एवं गैर-यूनियन पर्यवेक्षकों के लिए लगभग प्रत्येक दस वर्ष में वेतन संशोधन समितियों का गठन किया जाता है। ये संशोधन केंद्रीय वेतन आयोग की रूपरेखा के अनुरूप होते हैं तथा मुद्रास्फीति, बढ़ती जीवन-यापन लागत, आंतरिक समानता तथा निजी क्षेत्र के वेतन ढांचे के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को संबोधित करते हैं।
विदित हो कि केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 25 नवंबर 2025 को किया जा चुका है और इसके द्वारा शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। साथ ही, केन्द्रीय सरकारी लोक उद्यमों के लिए चतुर्थ वेतन संशोधन 01.01.2027 से प्रभावी होना है। अतः आवश्यक है कि चतुर्थ वेतन संशोधन समिति के गठन की प्रक्रिया अग्रिम रूप से प्रारंभ की जाए, जिससे विचार-विमर्श, हितधारकों से परामर्श तथा समयबद्ध क्रियान्वयन हेतु पर्याप्त समय उपलब्ध हो सके।
सेफी ने वित्त मंत्री को अनुरोध करते हुए अवगत कराया कि तृतीय वेतन संशोधन समिति का गठन 9 जून 2016 को किया गया था तथा केंद्र सरकार के अनुमोदन के पश्चात सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई) द्वारा 3 अगस्त 2017 को वेतन संशोधन आदेश जारी किए गए, जो 01.01.2017 से प्रभावी हुए।
वर्तमान में सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अत्यंत प्रतिस्पर्धी एवं गतिशील वातावरण में कार्य कर रहे हैं, जहाँ उन्हें घरेलू एवं वैश्विक निजी क्षेत्र की कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही, ये उद्यम राष्ट्र निर्माण, अधोसंरचना विकास, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल विस्तार तथा अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सेफी ने वित्त मंत्री से निवेदन किया है कि ऐसी स्थिति में वेतन एवं भत्तों का समय पर संशोधन एक रणनीतिक आवश्यकता है, जिससे-
ऽ बोर्ड स्तर तथा बोर्ड स्तर से नीचे के स्तर पर उच्च कौशलयुक्त एवं प्रतिभाशाली पेशेवरों को आकर्षित करना तथा उन्हें बनाए रखना संभव हो सके।
ऽ निजी क्षेत्र के समकक्ष उद्योगों के साथ प्रतिस्पर्धात्मकता एवं समानता सुनिश्चित की जा सके।
ऽ केन्द्रीय सरकारी लोक उद्यमों की परिचालन दक्षता एवं राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति को बल मिल सके।
ऽ विशेषकर तकनीकी एवं विशिष्ट क्षेत्रों में अनुभवी मानव संसाधन के पलायन को रोका जा सके।
पीआरसी के गठन में विलंब से कार्यपालक अधिकारियों में अनिश्चितता उत्पन्न हो सकती है, जिससे प्रतिभा को बनाए रखने तथा संगठनात्मक प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब इन उद्यमों से देश की विकास यात्रा में और अधिक योगदान की अपेक्षा है।









