भारती विश्वविद्यालय में एंटी-रैगिंग जागरूकता, राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता आयोजित
दुर्ग, छत्तीसगढ़ | भारती विश्वविद्यालय, दुर्ग में सुरक्षित, अनुशासित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने तथा विधिक शिक्षा के व्यावहारिक पक्ष को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय के एंटी-रैगिंग सेल द्वारा एंटी-रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम ,तथा विधि अध्ययनशाला एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC Cell) के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 आयोजित की गई। एंटी-रैगिंग जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना तथा विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षित, सम्मानजनक, समावेशी एवं रैगिंग-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम विश्वविद्यालय कुलाधिपति श्री सुशील चंद्राकर,उप कुलपति डॉ. आलोक भट्ट,कुलसचिव डॉ. विरेन्द्र कुमार स्वर्णकार निदेशक श्री आर. पी. अग्रवाल,डीन अकादमिक्स डॉ. अजय सिंह एवं डॉ. मनोज मौर्य की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।अतिथियों ने विद्यार्थियों को अनुशासन, पारस्परिक सम्मान, सहानुभूति एवं जिम्मेदार व्यवहार के महत्व से अवगत कराया,साथ ही यूजीसी “रैगिंग की कुप्रथा पर रोक लगाने संबंधी विनियम, 2009” के प्रावधानो पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को रैगिंग से संबंधित किसी भी घटना अथवा आशंका की सूचना तत्काल संबंधित प्राधिकारियों को देने के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो .आस्था चतुर्वेदी, डीन एवं विभागाध्यक्ष, विधि विभाग द्वारा किया गया। श्रीमती आकांक्षा झा, सहायक प्राध्यापक, विधि संकाय ने रैगिंग के विभिन्न पहलुओं एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों के संबंध में विद्यार्थियों से जानकारी साझा की,सुश्री दीपान्विता चटर्जी, सहायक प्राध्यापक, विधि ने एंटी-रैगिंग सेल की भूमिका, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया एवं उपलब्ध शिकायत निवारण तंत्र से विद्यार्थियों को अवगत कराया।कार्यक्रम के दौरान संकाय सदस्य सुश्री संपदा बैस, सुश्री सरिता गुप्ता, श्रीमती सुष्मिता बोस, सुश्री योगिता सिन्हा एवं श्री प्रियान्शु चौधरी उपस्थित रहे।कार्यक्रम एंटी-रैगिंग शपथ के साथ समाप्त हुआ ।
अगली कडी मे दिवसीय राष्ट्रीय मूट कोर्ट प्रतियोगिता 2026 आयोजित की गई,प्रथम दिवस 10 टीमों के मध्य आरंभिक चरण मे कल्याण लॉ कॉलेज, दुर्ग की प्राचार्य डॉ. सुशीला यादव एवं *विश्वविद्यालय विधि अध्ययनशाला की प्रभारी डीन डॉ. आस्था चतुर्वेदी ने निर्णायक की भूमिका निभाई ।
द्वितीय दिवस सेमीफाइनल में पहुंची शीर्ष चार टीमों के बीच प्रतिस्पर्धा के बाद फाइनल राउंड आयोजित हुई जिसके निर्णायक वरिष्ठ अधिवक्ता श्री एस. के. सिंह एवं श्री अरविंद कुमार सिंह, रहे।
सर्वश्रेष्ठ टीम का पुरस्कार पायल अग्लॉवे, आरती कंवर राजपुरोहित एवं सोनम की टीम को, सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल का पुरस्कार तमन्ना कुरैशी, अर्चिता ठाकुर एवं यश प्रजापति की टीम को तथा सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार पायल अग्लॉवे को प्रदान किया गया ।
संचालन मे संकाय समन्वयक सुश्री संपदा बैस एवं सुश्री सरिता गुप्ता तथा छात्र समन्वयक अनिरुद्ध पचकावड़े एवं पवन सिंह राजपुरोहित का योगदान रहा।
उक्त उपक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रबंधन ने जहा एक ओर विद्यार्थियों में अनुशासन, सम्मान, समानता एवं रैगिंग के प्रति शून्य-सहिष्णुता की भावना को मजबूत किया, वहीं दूसरी ओर विधिक शोध, तर्कशक्ति, वाद-विवाद, प्रभावी संप्रेषण एवं व्यावहारिक विधिक ज्ञान को विकसित करने का अवसर विद्यार्थियो को प्रदान किया जो विश्वविद्यालय की गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
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