नितिन गडकरी के ‘नई पीढ़ी’ वाले बयान से बढ़ी हलचल, क्या सियासत से संन्यास का है इशारा?
नागपुर: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान ने मंगलवार को सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी। नागपुर के काटोल क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि वह पिछले करीब 30 वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं, लेकिन अब पहले की तरह ज्यादा काम नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालने और काम करने का मौका मिलना चाहिए।
गडकरी के इस बयान के बाद उनके राजनीतिक संन्यास को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। खासकर इसलिए कि यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर चर्चा चल रही है। हालांकि, गडकरी ने राजनीति से संन्यास लेने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता’
कार्यक्रम में गडकरी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने इस दौरान कई उतार-चढ़ाव देखे और कई बार सम्मान भी मिला। लेकिन अब वह पहले जितना काम नहीं कर सकते। उनका कहना था कि नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का अवसर दिया जाना चाहिए और पुरानी पीढ़ी को नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करना चाहिए।
गडकरी ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि समय के साथ जिम्मेदारियों का हस्तांतरण स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसी वजह से उनके शब्दों को राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जाने लगा।
लेकिन क्या यह बयान राजनीति से जुड़ा था?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई है। गडकरी के कार्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि उनके बयान को राजनीतिक संन्यास के संकेत के रूप में देखना सही नहीं है। उनका संदर्भ लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट से जुड़ा था, जिसे गडकरी ने स्थापित किया है और जो आदिवासी इलाकों में स्कूल चलाने जैसे सामाजिक कार्य करता है।
गडकरी के कार्यालय के मुताबिक, नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की बात ट्रस्ट के कामकाज और भविष्य के नेतृत्व के संदर्भ में कही गई थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस बयान को राजनीति से जोड़कर पेश किए जाने पर भी कार्यालय ने आपत्ति जताई है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि गडकरी राजनीति से संन्यास लेने जा रहे हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य और जीवनशैली का भी जिक्र
गडकरी ने कार्यक्रम में अपने जीवन और काम करने के तरीके में आए बदलाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद उन्होंने अपनी जीवनशैली में बदलाव किया है और अब नियमित रूप से योग करते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी सेहत के बिना ताकत और पैसा भी बहुत मायने नहीं रखता।
उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक दिनों को याद करते हुए यह भी बताया कि पार्टी के लिए काम करते समय उनका जीवन काफी अलग था और उस दौर में वह काफी व्यस्त रहते थे।
बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव से जोड़कर देखा गया बयान
गडकरी के बयान को इसलिए भी राजनीतिक नजरिए से देखा गया क्योंकि बीजेपी में हाल में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में बड़ी संख्या में नए चेहरों को जगह मिली है। रिपोर्टों के मुताबिक 65 सदस्यीय टीम में 51 नए चेहरे हैं। इसे पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव के संकेत के रूप में देखा गया है।
इसी बीच केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल की चर्चाओं ने भी गडकरी के बयान को और ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर गडकरी के बयान को सीधे तौर पर किसी मंत्रिमंडल बदलाव या उनके इस्तीफे से जोड़ने की पुष्टि नहीं हुई है।
विकास के मुद्दों पर भी बोले गडकरी
दिलचस्प बात यह है कि नई पीढ़ी को मौका देने की बात करने के बाद गडकरी ने विकास के मुद्दों पर भी जोर दिया। उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी इलाकों में विकास और बिजली पहुंचाने की जरूरत पर बात की। उनका लक्ष्य बताया गया कि राज्य का कोई भी आदिवासी गांव बिजली से वंचित न रहे और विकास का असर जमीन पर दिखाई दे।
यानी उनका पूरा भाषण केवल राजनीतिक भविष्य या जिम्मेदारियों से पीछे हटने के बारे में नहीं था, बल्कि सामाजिक कार्य, स्वास्थ्य, विकास और नई पीढ़ी की भूमिका जैसे मुद्दों पर भी केंद्रित था।
क्या गडकरी राजनीति से संन्यास ले रहे हैं?
फिलहाल इसका जवाब ‘नहीं’ है। गडकरी के बयान ने जरूर राजनीतिक अटकलों को हवा दी, लेकिन उनके कार्यालय की सफाई के बाद तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने राजनीति छोड़ने या मंत्री पद से हटने की घोषणा नहीं की है। उनका ‘नई पीढ़ी को मौका’ वाला बयान मुख्य रूप से लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के कामकाज और उसमें नई पीढ़ी की जिम्मेदारी के संदर्भ में था।
इसलिए फिलहाल गडकरी के बयान को राजनीतिक संन्यास की घोषणा के बजाय जिम्मेदारियों के हस्तांतरण और नई पीढ़ी को अवसर देने की उनकी सोच के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा। हालांकि, जिस समय यह बयान आया है—जब बीजेपी में संगठनात्मक बदलाव और केंद्र में कैबिनेट फेरबदल की चर्चाएं चल रही हैं—उस वजह से इस पर राजनीतिक चर्चा होना स्वाभाविक है।
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