सेंट थॉमस कॉलेज एवं इस्कॉन,मुंबई ने सिगमंड फ्रायड का स्मरण दिवस मनाया

सेंट थॉमस कॉलेज एवं इस्कॉन,मुंबई ने सिगमंड फ्रायड का स्मरण दिवस मनाया

सेंट थॉमस कॉलेज, भिलाई के स्नातकोत्तर मनोविज्ञान विभाग ने इस्कॉन के सहयोग से सिगमंड फ्रायड के स्मृतिदिवस पर उनके जीवन और मनोविज्ञान के क्षेत्र में उनके अग्रणी योगदान को सम्मानित करते हुए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया । मनोविश्लेषण के जनक माने जाने वाले फ्रायड ने अचेतन, बचपन के अनुभवों और आंतरिक संघर्षोंकी भूमिका पर प्रकाश डालकर मानव मन की हमारी समझ को बदल दिया । ये वे अवधारणाएँ हैं जो आधुनिक मनोवैज्ञानिक चिंतन के केंद्र में हैं।


इस आयोजन का विषय था, “आध्यात्मिक चेतना बनाम मनोगतिक अचेतन: चेतन मन की जड़ों की खोज।” इस सत्र में आध्यात्मिक दृष्टिकोणों और फ्रायड के मनोगतिक ढाँचे के अंतर्संबंध पर चर्चाकी गई और प्रतिभागियों को इस बात पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया किकैसे ये अलग-अलग लेकिन पूरक दृष्टिकोण चेतना की हमारी समझ को समृद्ध करते हैं।


कार्यक्रम के वक्ता, इस्कॉन, मुंबई से पधारे परम पूज्य हयग्रीव चरण दास ने चेतन और अचेतन पर गहन अंतर्दृष्टिसाझा की। परम पूज्य हयग्रीव चरण दास ने अपने भाषण में पदार्थऔर आत्मा के बीच के अंतरों का वर्णन किया। चेतन उद्देश्यों, इच्छाओं और चेतन व्यवहार पर उनके प्रभाव को दैनिक उदाहरणों के साथ समझाया गया। उन्होंने यह भी बताया किआत्मा, मन, बुद्धिऔर शरीर किस प्रकार व्यवहार करने के लिए परस्पर क्रिया करते हैं।
कॉलेज के प्रशासक, रेवरेंड फादर डॉ. पी.एस. वर्गीस ने इस पहल की सराहना की, जबकिप्रभारी प्राचार्यडॉ. शाइनी मेंडोंसे ने विभाग को ऐसे विचारोत्तेजक कार्यक्रमों का आयोजन जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। विभागाध्यक्ष डॉ. देबजानी मुखर्जीने मनोविज्ञान पर फ्रायड के स्थायी प्रभाव पर बात की। कॉलेज की सहायक प्राध्यापक डॉ. अंकिता देशमुख और डॉ. सुमिता सिंह ने कार्यक्रम का सफल संचालन और समन्वय किया।