
नेशनल काफ्रेडेशन आफ आफिसर्स एसोसिएशन की नेशनल एक्सीक्यूटिव काउंसिल की बैठक दिल्ली में सम्पन्न
पीएसयू अधिकारियों के चौथे पे-रिविजन, ईपीएस-95 हायर पेंशन, केन्द्र सरकार के अधिकारियों के समकक्ष टैक्स छूट आदि मुद्दों पर की गहन चर्चा

नेशनल काफ्रेडेशन आफ आफिसर्स एसोसिएशन की नेशनल एक्सीक्यूटिव काउंसिल की बैठक डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर, जनपथ, नई दिल्ली में रखी गई थी। एन.सी.ओ.ए. की इस बैठक की शामिल एनसीओए के कार्यकारी अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार बंछोर ने बताया कि इस महत्वपूर्ण बैठक में देश के सार्वजनिक क्षेत्र के सभी उपक्रमों के अधिकारियों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गयी। इस बैठक में एनसीओए के कार्यकारी अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार बंछोर सहित अध्यक्ष एम एस अडसुल, महासचिव जी अनिल कुमार, चेयरमेन गर्वनिंग काउंसिल वी.के. तोमर, संगठन सचिव कुसुमा राजशेखर, सचिव महिला कल्याण गीता सुनातकरी, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार, सेफी महासचिव संजय आर्या, सेफी सह-सचिव केवीडी प्रसाद, सेफी सदस्य अबकाश बेहरा आदि उपस्थित रहेे।

सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारियों के चौथे पे-रिविजन पर चर्चा
विदित हो कि केन्द्र सरकार ने आठवें केन्द्रीय वेतन आयोग का गठन कर दिया है। एनसीओए टीम ने लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के अधिकारियों के साथ पूर्व में ग्रेच्युटी वृद्धि एवं चौंथे पीआरसी पर हुई चर्चा की इस बैठक में जानकारी साझा की। 23 अक्टूबर 2025 को अध्यक्ष श्री एम. एस. अदासुल, कार्यकारी अध्यक्ष श्री एन. के. बन्छोर तथा चेयरमेन गर्वनिंग काउंसिल श्री वी. के. तोमर ने संयुक्त सचिव/आर्थिक सलाहकार, डीपीई से मुलाकात की थी। आगामी चौथे पीआरसी की प्रक्रिया में एनसीओए की भूमिका पर विस्तृत चर्चा की थी। एनसीओए प्रतिनिधियों ने घाटे में चल रहे सीपीएसई में तीसरे पे-रिविजन को लागू करने तथा चौथे पीआरसी के गठन के संबंध में भी चर्चा की थी। संयुक्त सचिव/आर्थिक सलाहकार ने अवगत कराया था कि चौथे पीआरसी के गठन की प्रक्रिया हेतु तैयारियां की जा रही है। इन सभी चर्चाओं की जानकारी नेशनल एक्सीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में दी गई।
एनईसी की बैठक में तीसरे पे-रिविजन में अफोर्डेबिलिटी क्लॉज की समीक्षा कर उसे चौथे पीआरसी से हटाने का एक सुर में प्रस्ताव पारित किया गया। पदाधिकारियों ने बताया गया कि चौथे पीआरसी के गठन के बाद इस विषय पर प्रतिनिधित्व किया जाएगा, और पूर्व के पे-रिविजन से संबंधित इन मुद्दों का समुचित समाधान करने का प्रयास किया जाएगा।
पदाधिकारियों ने हार्डशिप एलाउंस, इन्क्रिमेंटल पीआरपी, पीएसयू अधिकारियों को केन्द्र सरकार के अधिकारियों के समकक्ष टैक्स छूट, सीपीएफ ब्याज पर टैक्स की सीमा बढ़ाने, बढ़ी हुई ग्रेच्यूटी पर टैक्स छूट जैसे मुद्दों को एनईसी के समक्ष रखा।
हार्डशिप एलाउंस (Hardship Allowances)
स्टील, पावर, उर्वरक, केमिकल एवं अन्य हजार्डस सार्वजनिक उपक्रमों में तीसरे पे-रिविजन में कठिनाई भत्ते के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया था। इस कमी को दूर करते हुए चौथे पीआरसी में इन्हें विधिवत शामिल कराने हेतु एनसीओए प्रयास करेगा।


इन्क्रिमेंटल पीआरपी
इन्क्रिमेंटल पीआरपी के लिए द्वितीय पे-रिविजन आदेश में वर्तमान वित्तीय वर्ष के लाभ की तुलना पिछले वित्तीय वर्ष के लाभ से की गई है, जिसे चौथे पे-रिविजन में संशोधित किया जाना आवश्यक है।
चौथे पीआरसी में इंक्रीमेंटल प्राफिट लाभ बनाम लाभ (Profit Vs Profit) के स्थान पर PBT बनाम PBT (Profit Before Tax Vs Profit Before Tax) होना चाहिए।
पीएसयू अधिकारियों को केन्द्र सरकार के अधिकारियों के समकक्ष टैक्स छूट
एन.सी.ओ.ए. नेशनल एक्सीक्यूटिव काउंसिल की इस बैठक में काउंसिल ने केन्द्र शासन के द्वारा बी.एस.एन.एल. व एम.टी.एन.एल. के पुर्नउद्धार हेतु किये जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के प्रस्तावित निजीकरण के प्रयासों पर अपनी असहमति जताते हुए इससे राष्ट्र को होने वाली संभावित क्षति पर भी सारगर्भित चर्चा की। इस बैठक में केन्द्र सरकार के कार्मिकों की तुलना में सार्वजनिक क्षेत्र के कार्मिकों पर टैक्स के अधिक भार के कारण उत्पन्न भेदभाव को समाप्त करने की मांग पर चर्चा हुई। विदित हो कि केन्द्रीय कार्मिकों को आवास के लिए नोशनल परक्यूसीट टैक्स, कार लोन,, एजुकेशन लोन, होम लोन इत्यादि पर टैक्स में अधिक छूट प्राप्त है जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के कार्मिकों को इन सभी मदों पर टैक्स में समान छूट प्राप्त नहीं है।
एनईसी बैठक में सीपीएफ ब्याज पर टैक्स जो वर्तमान में 2.5 लाख रूपये से अधिक ब्याज पर लिया जाता है, उसे बढ़ाकर 5 लाख ब्याज की सीमा करने हेतु वित्त मंत्रालय व प्रधानमंत्री कार्यालय में अपील करने पर चर्चा हुई।

इस बैठक के दौरान सदस्यों ने एक बार फिर उन घाटे में चल रहे सीपीएसई के लिए ग्रेच्युटी वृद्धि का मुद्दा उठाया, जिन्होंने अभी तक तीसरा पीआरसी लागू नहीं किया है। एनसीओए ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रेच्युटी का अधिकार वेतन संशोधन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। एनसीओए ने डीपीई से अनुरोध किया था कि सभी सीपीएसई के लिए ग्रेच्युटी की सीमा ₹25 लाख तक बढ़ाने हेतु एक पृथक आदेश जारी किया जाए।
विदित हो कि डीपीई के तीसरे पे-रिविजन की दिशानिर्देश के अनुरूप डीए 50 प्रतिशत से अधिक होने के कारण ग्रेच्युटी की सीमा 20 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गयी है। डीपीई द्वारा 29 अक्टूबर को डीए बढ़ने का आदेश सभी पीएसयू के लिए लागू हुआ जिसमें 51.8 प्रतिशत डीए 2017 पे-स्केल के लिए प्रभावी हुआ है।
श्री बंछोर ने कहा कि ग्रेच्यूटी की बढ़ी हुई 5 लाख की राशि पर टैक्स को शून्य करवाने हेतु श्रम मंत्रालय से एनसीओए अपील करेगा। साथ ही ग्रेच्यूटी की सीमा जिन सार्वजनिक उपक्रमों में तीसरा पे-रिविजन लागू नहीं होने के कारण अभी भी 20 लाख है, उसे 25 लाख करवाने हेतु श्रम मंत्रालय से आवश्यक परिपत्र जारी करने हेतु अनुरोध किया जाएगा।
ईपीएस-95 हायर पेंशन
पदाधिकारियों ने ईपीएस-95 हायर पेंशन पर ईपीएफओ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के 04 नवम्बर 2022 के आदेश की अवहेलना पर एनसीओए द्वारा श्रम मंत्रालय में अपना विरोध दर्ज कराने की जानकारी एनईसी सदस्यों को दी गई। कार्यकारी अध्यक्ष श्री एन. के. बन्छोर ने बताया कि पूर्व में सेफी टीम ने माननीय श्रममंत्री श्री मनसुख मांडविया जी को दिल्ली में आयोजित बैठक में सेल में ईपीएस-95 हायर पेंशन पर उत्पन्न विवाद से विस्तारपूर्वक अवगत कराया था। मंत्री जी ने सेफी के बातों को बड़े धैर्य के साथ सुनने के पश्चात इसकी गंभीरता को संज्ञान लेते हुए ईपीएफओ के केन्द्रीय उच्च अधिकारियों को तत्काल इस विषय पर विस्तृत बैठक आयोजित करने हेतु निर्देशित किया था। ईपीएफओ के उच्च अधिकारियों से आयोजित इस बैठक में ईपीएफओ की ओर से श्री रमेश कृष्णमूर्ति, सीपीएफसी के सीईओ, श्री चंद्रमौली चक्रवर्ती, अतिरिक्त केंद्रीय पीएफ आयुक्त (मुख्यालय-सम्मेलन, समन्वय, सीएआईयू, छूट, आईडब्ल्यूडी, पीक्यू, पेंशन) और श्रीमती अपराजिता जग्गी, अतिरिक्त केंद्रीय पीएफ आयुक्त (पेंशन, समन्वय एवं सम्मेलन, योजना एवं नीति) विशेष रूप से उपस्थित थे। लेकिन इस बैठक का कोई सार्थक परिणाम अभी तक नहीं आया है। एनसीओए पदाधिकारियों ने कहा कि लगभग सभी सार्वजनिक उपक्रमों के कार्मिकों एवं पूर्व कार्मिकों ने न्यायालयों में शरण ली है। अभी तक माननीय न्यायालयों के फैसले लगभग कार्मिकों के पक्ष में ही आए हैं। एनसीओए टीम इस मुद्दे पर अपना प्रयास विभिन्न माध्यमों से जारी रखेगी। यह आश्वासन इस बैठक दिया गया।
निजीकरण की बजाए मेगा स्टील पीएसयू बनाने का सुझाव
एनसीओए कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि इस्पात क्षेत्र को रणनीतिक क्षेत्र में रखने हेतु तथा इस्पात क्षेत्र केे सभी सार्वजनिक उपक्रमों का रणनीतिक विलय करके एक मेगा इस्पात कंपनी के गठन करने हेतु केन्द्र सरकार से आग्रह किया जा चुका है एवं इस हेतु सभी केन्द्रीय मंत्रियों से पत्राचार किया गया है व नई सरकार के गठन के बाद कुछ केन्द्रीय मंत्रियों को ज्ञापन भी दिया गया है। वर्तमान में राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड का प्रचालन बड़ी कठिनाई से हो रहा है एवं अधिकारियों के वेतन में भी कमी की गयी है।
एनसीओए का मानना है कि इस्पात क्षेत्र के राष्ट्र के तीन महत्वपूर्ण सार्वजनिक उपक्रमों क्रमशः नगरनार स्टील प्लांट एवं आरआईएनएल को विनिवेश करने के बजाए इन कंपनियों को सेल के साथ मिलाकर एक मेगा पीएसयू बनाने की रखी मांग। यह मेगा पीएसयू राष्ट्र हित में होने के साथ ही राष्ट्र के समग्र विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस संदर्भ में ज्ञात हो कि भारत सरकार द्वारा इस तरह के रणनीतिक विलय बैंको में किया गया जहां इसका बेहतर परिणाम प्राप्त हुआ। इस्पात क्षेत्र में सेल के अलावा राष्ट्रीय इस्पात निगम, मेकॉन, नगरनार स्टील प्लांट, मॉइल, इत्यादि कंपनियां इस्पात मंत्रालय के अधीन कार्यरत हैं। जिनके संविलियन से एक विशाल इस्पात उत्पादक कंपनी का निर्माण किया जा सकता है। जिससे इन अलग-अलग कंपनियों के पास उपलब्ध संसाधनों का अधिक दक्षता से दोहन किया जा सकता है, जिससे प्रस्तावित मेगा पी.एस.यू. अत्यंत ही उत्पादक एवं लाभजनक होगा।
राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के प्रबंधन द्वारा कार्मिकों के वेतन को औसत उत्पादन लक्ष्य के प्राप्ति के अनुपात में वेतन भुगतान की व्यवस्था का विरोध
एनसीओए के कार्यकारी अध्यक्ष श्री नरेन्द्र कुमार बंछोर ने बताया कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के प्रबंधन द्वारा दिनांक 15.11.2025 को जारी परिपत्र संख्या 03/2025 के तहत वेतन को औसत उत्पादन लक्ष्य के प्राप्ति के अनुपात में वेतन भुगतान की व्यवस्था की गई है जो कि अन्यायपूर्ण होने के साथ ही विधिसम्मत नहीं है। अतः इस तरह के अन्यायपूर्ण आदेश का एनसीओए ने कड़ा विरोध इस्पात मंत्रालय, वित्त मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज कराया है।
विदित हो कि आरआईएनएल प्रबंधन ने अपने इस आदेश में डीपीई दिशानिर्देशों की अवहेलना के साथ ही श्रम नियमों की भी अनदेखी कर वेतन निर्धारण का फार्मूला तय किया है, जो किसी भी परिस्थिति में तर्कसंगत व न्यायसंगत नहीं है।
आरआईएनएल प्रबंधन के इस आदेश के तहत नवंबर 2025 माह से वेतन का भुगतान प्राप्त उत्पादन लक्ष्यों के अनुपात में लागू कर दिया है।
एनसीओए ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इस आदेश को गैरविधिसम्मत और अन्यायपूर्ण माना है। इस संदर्भ में एनसीओए के कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि प्रत्येक कार्मिक का मूल वेतन एवं डीए कानूनी रूप से संरक्षित वेतन हैं, ये वेतन उत्पादन या प्रदर्शन आधारित नहीं होते, इसलिए इन्हें किसी भी प्रकार के उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप अनुपातिक रूप से इस वेतन को परिवर्तित नहीं किया जा सकता। परिभाषा के अनुसार तथा स्थापित न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर, यह पद के लिए न्यूनतम गारंटीकृत वेतन है।
डीपीई दिशानिर्देश मूल वेतन, डी.ए., पर्क्स, पी.आर.पी. तथा सेवानिवृत्ति लाभों की संरचना को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। इनमें से केवल प्रदर्शन-आधारित वेतन (पीआरपी) को ही कंपनी के लाभ से जोड़ा जा सकता है।


डी.ए. को सरकार द्वारा त्रैमासिक संशोधित किया जाता है और इसका उद्देश्य केवल मुद्रास्फीति का प्रभाव कम करना तथा क्रय-शक्ति की रक्षा करना है। मूल वेतन और डी.ए. का सम्मिलित भाग ही पीएफ जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना का आधार है।
श्री बंछोर ने आरआईएनएल प्रबंधन के इस परिपत्र को सामाजिक सुरक्षा व न्याय के सिद्धांत का विरोधी बताया है। इस संदर्भ में श्री बंछोर ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध उपबंध अधिनियम और अन्य कल्याणकारी कानून मूल वेतन और डी.ए. को सुरक्षित वेतन घटक के रूप में मान्यता देते हैं, जिससे कर्मचारियों के लिए पूर्वानुमानित पीएफ योगदान सुनिश्चित होता है। उत्पादन से वेतन को जोड़ने का कोई भी प्रयास इस विधिक ढांचे के विरुद्ध है तथा सामाजिक सुरक्षा के उद्देश्य को बाधित करता है। यह संरचना न केवल श्रम कानूनों की दृष्टि से अनुचित है बल्कि समानता, निष्पक्षता तथा सामाजिक सुरक्षा के संवैधानिक अधिकारों पर भी गंभीर प्रश्न उत्पन्न करती है। श्री बंछोर ने जानकारी देते हुए बताया कि आरआईएनएल अधिकारियों पर आज इस आदेश से दोहरी मार पड़ेगी। अफोर्डेबिलिटी क्लॉज के चलते आज भी अधिकारी तीसरे पे-रिविजन से वंचित है।
आरआईएनएल इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एकमात्र ऐसा पीएसयू है जो आज भी द्वितीय पे-रिविजन ही लागू है। आज भी थर्ड पे-रिविजन को लागू नहीं किया जा सका, जबकि कंपनी ने दस में से सात वर्षों में लाभ दर्ज किया था। इस अवधि में आरआईएनएल बड़े विस्तारीकरण से भी गुजरा है। इस कारण आरआईएनएल अधिकारी अन्य स्टील पीएसयू की तुलना में कम वेतन प्राप्त कर रहे हैं।
स्टील उत्पादन एक पूर्णतः एकीकृत प्रक्रिया है। यदि किसी कारणवश ब्लास्ट फर्नेस प्रभावित हो, तो उसकी सीधी प्रभाव श्रृंखला स्टील मेल्टिंग शॉप व रोलिंग मिल पर पड़ती है। ऐसी स्थिति में क्षमता उपयोग का लक्ष्य पूरा न होने पर वेतन काटना तकनीकी रूप से भी अव्यावहारिक है। निर्धारित वेतन पाना प्रत्येक कार्मिक का अधिकार है।








































