चार साल तक क्यों लटकाया सरकारी हेलीकॉप्टर का बीमा दावा? साय सरकार ने ओरिएंटल इंश्योरेंस पर लिया बड़ा फैसला
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन ने शासकीय हेलीकॉप्टर के बीमा दावे के निराकरण में चार साल से अधिक समय तक हुई देरी को गंभीरता से लेते हुए द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (OICL) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विमानन संचालनालय ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए कंपनी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हुए राज्य शासन के हेलीकॉप्टर से जुड़े बीमा दावे के मामले में की गई है।
मामला चार साल तक क्यों अटका रहा?
राज्य शासन ने अपने शासकीय हेलीकॉप्टर का बीमा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से कराया था और इसके लिए निर्धारित बीमा प्रीमियम का पूरा भुगतान किया गया था। मई 2022 में रायपुर एयरपोर्ट पर हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद राज्य शासन की ओर से कंपनी के समक्ष बीमा दावा प्रस्तुत किया गया।
शासन के अनुसार, दावा प्रस्तुत किए जाने के बावजूद उसके निराकरण में अत्यधिक समय लगा। कंपनी ने इस दावे को चार वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखा और अंततः अगस्त 2026 में इसे अस्वीकार कर दिया। लंबे समय तक दावा लंबित रहने और बाद में उसे खारिज किए जाने को शासन ने गंभीरता से लिया।
विमानन संचालनालय ने माना मामला गंभीर
पूरे प्रकरण की जांच और उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के दौरान विमानन संचालनालय ने पाया कि सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े बीमा दावे के निपटारे में असामान्य रूप से लंबा समय लगा। शासन के अनुसार, राज्य सरकार के प्रकरण के निराकरण में कंपनी का रवैया निर्धारित समयबद्धता और शासकीय हितों के अनुरूप नहीं रहा।
शासन ने इस मामले को केवल एक सामान्य बीमा विवाद के रूप में नहीं देखा, बल्कि इसे सार्वजनिक धन और सरकारी संपत्ति से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना। अधिकारियों के मुताबिक, शासकीय हेलीकॉप्टर की खरीदी और उसके बीमा में जनता के धन का इस्तेमाल हुआ है। ऐसे में बीमा दावे के निराकरण में होने वाली देरी का सीधा असर राज्य के वित्तीय हितों पर पड़ता है।
कार्रवाई से पहले कंपनी को मिला पूरा अवसर
राज्य शासन ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया। ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी ने अपना लिखित जवाब शासन के समक्ष प्रस्तुत किया।
इसके बाद कंपनी को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी दिया गया। कंपनी का पक्ष सुनने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण किया गया। इसके बाद विमानन संचालनालय ने कारणों सहित आदेश जारी करते हुए कंपनी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया।
शासकीय हितों पर समझौता नहीं
राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि सरकार के साथ काम करने वाली प्रत्येक सेवा प्रदाता संस्था को अपनी संविदात्मक जिम्मेदारियों का समयबद्ध और जिम्मेदारीपूर्वक निर्वहन करना होगा। सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी को सामान्य प्रक्रिया मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अधिकारियों के अनुसार, बीमा दावों के निपटारे में लंबे समय तक होने वाली देरी से न केवल शासन के वित्तीय हित प्रभावित होते हैं, बल्कि सरकारी संस्थाओं और सेवा प्रदाताओं के बीच जवाबदेही एवं विश्वास का मुद्दा भी सामने आता है।
बीमा राशि की वसूली के लिए कार्रवाई जारी रहेगी
ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद बीमा दावे का मामला खत्म नहीं हुआ है। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि अपने दावे की राशि प्राप्त करने के लिए आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई आगे भी जारी रखी जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा शासन की जिम्मेदारी है। इसलिए राज्य को देय राशि की वसूली के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
तीन साल का ब्लैकलिस्ट आदेश क्यों महत्वपूर्ण?
ओरिएंटल इंश्योरेंस को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किए जाने का निर्णय यह संकेत देता है कि शासकीय विभागों और सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े मामलों में सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही को गंभीरता से लिया जा रहा है। शासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक हित प्रभावित होने और संविदात्मक जिम्मेदारियों के निर्वहन में गंभीर चूक पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मई 2022 में हुई हेलीकॉप्टर दुर्घटना से शुरू हुआ यह मामला अब कंपनी के तीन साल के ब्लैकलिस्ट आदेश तक पहुंच गया है। हालांकि, बीमा राशि की वसूली का मुद्दा अभी भी जारी है और राज्य शासन ने दावा राशि हासिल करने के लिए आगे की कार्रवाई जारी रखने की बात कही है।
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